सचिन पायलट गहलोत के हमले पर बोले, संस्कार का दिया हवाला

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी में शांति और भाईचारा अब भी कायम है.

उन्होंने बीजेपी पर सरकार गिराने का आरोप लगाते हुए हमला किया. अशोक गहलोत का यह बयान तब आया है जब विधायक दल की बैठक होने जा रही है.

गहलोत ने कहा, ''पार्टी के भीतर शांति और भाईचारा अब भी है. तीन सदस्यों की एक कमिटी का गठन किया गया है और यह समिति पार्टी के भीतर के मतभेदों को सुलझाएगी. बीजेपी ने हमारी सरकार गिराने की कोशिश की लेकिन अंततः सारे विधायक एक मंच पर आ गए.''

कांग्रेस विधायक दल की बैठक जैसलमेर में हो रही है. अगले हफ़्ते से राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है. जैसलमेर जाने से पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने तीन निर्दलीय विधायक- सुरेश टाक, ओम प्रकाश हुड्ला और खुशवीर सिंह से मुलाक़ात की. सुरेश टाक ने मुख्यमंत्री से मिलने के बाद कहा कि वो गहलोत के साथ हैं.

दूसरी तरफ़ सचिन पायलट भी जयपुर पहुंच गए हैं और वहां से जैसलमेर रवाना होंगे. पहली बार सचिन ने पत्रकारों से बात की और कहा कि उन्होंने कोई पद की मांग नहीं की है.

सचिन पायलट से पत्रकारों ने पूछा कि अशोक गहलोत ने उन्हें ख़ूब भला-बुरा कहा था क्या वो इसका जवाब नहीं देंगे? क्या आपको अशोक गहलोत का नेतृत्व स्वीकार है?

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सचिन पायलट ने जवाब में कहा, ''मैंने अपने परिवार से जीवन में कुछ संस्कार हासिल किए हैं और कितना भी मैं किसी का विरोध करूं, वो कोई भी नेता हो, किसी भी दल का हो, मेरा कट्टर दुश्मन भी हो, किसी और दल में हो, तब भी इस प्रकार की भाषा का मैंने कभी प्रयोग नहीं किया.''

उन्होंने कहा, ''अशोक गहलोत जी मुझसे उम्र में काफ़ी बड़े हैं और व्यक्तिगत रूप से मैंने उनका काफ़ी मान सम्मान ही किया है लेकिन अगर काम करने के तरीक़े में, गवर्नेंस में अगर मुझे कुछ इश्यू दिखता है तो मेरा अधिकार है कि मैं उसका विरोध जाहिर करूं. लेकिन मुझे लगता है कि जिस प्रकार की टीका टिप्पणी हुई जिन शब्दों का प्रयोग किया गया, दुख तो हर इंसान को होता है लेकिन मैं समझता हूं कि उस पर मैं अगर जवाब दूं तो उचित नहीं है."

उन्होंने आगे कहा, "सार्वजनिक तौर पर एक संवाद, एक शालीनता, एक लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए. मैंने अपने 20 साल के जीवन में कभी उस लक्ष्मण रेखा को पार नहीं किया. इसलिए मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं. लेकिन इतना ज़रूर कहना चाहता हूं कि जिस तरह के आरोप लगाए गए, जिस तरह की बातें बोली गईं, आज वो सच सब दुनिया के सामने आ चुका है."

"स्पष्ट, खुली और निर्णायक चर्चा"

कांग्रेस विधायक दल की बैठक पार्टी अध्यक्ष के उस फ़ैसले के एक दिन बाद हो रही है जिसमें राजस्थान के बाग़ी नेताओं की शिकायतें सुनने के लिए तीन सदस्यीय कमिटी गठित की गई है.

यह फैसला सचिन पायलट की दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद लिया गया है. उसके बाग़ी तेवर से राजस्थान की गहलोत सरकार पर ख़तरा मंडरा रहा था.

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सचिन पायलट की राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद कहा, "उनके बीच स्पष्ट, खुली और निर्णायक चर्चा हुई है. सचिन पायलट ने कांग्रेस पार्टी और राजस्थान में कांग्रेस सरकार में काम करने अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है."

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बाद में समिति गठन के फ़ैसले का स्वागत करते हुए सोमवार रात सचिन पायलट ने कहा कि वो किसी पद के लिए ये लड़ाई नहीं लड़ रहे थे और उन्होंने सोचा था कि कुछ मुद्दों का उठाया जाना ज़रूरी था.

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सचिन पायलट ने आज तक न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा, ''मैं तो पद पर था और अब पद को भी छोड़ दिया. आप पद किसी को दें और मान सम्मान न दें तो मुझे कोई पद नहीं चाहिए. मुझे गाड़ी और बंगले के लिए पद नहीं चाहिए. मैं केंद्र में मंत्री था तो आज़ादी के साथ काम किया. हमारी आज भी वही मांग है कि हम जिन लोगों के कंधों पर चढ़कर सत्ता में आए हैं उनके लिए काम करना होगा. हमारी जो पुरानी मांग है वो रहेगी. सराकर और पार्टी को मज़बूती देने का काम करता रहूंगा. लेकिन भविष्य में क्या होगा इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता. लोग अपनी बात खुलकर कहें इतनी जगह तो होनी चाहिए.''

14 जुलाई को सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से राजस्थान की सियासत में भूचाल आया था और करीब एक महीने तक सियासी ड्रामा चलता रहा. हालांकि सोमवार को हुई मीटिंग के बाद मामला सुलझता दिख रहा है.

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