मस्जिद के कार्यक्रम में ना बुलाया जाएगा, ना जाऊंगा: योगी आदित्यनाथ - प्रेस रिव्यू

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अयोध्या में बुधवार को हुए राम मंदिर के भूमि-पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम को आज अधिकांश अख़बारों, ख़ासकर हिन्दी भाषा के अख़बारों ने विशेष कवरेज दी है.

भूमि-पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम के बाद अब मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा.

कई अख़बारों ने लिखा है कि पीएम मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गये हैं जिन्होंने राम जन्म-भूमि और हनुमान गढ़ी का अयोध्या जाकर दर्शन किया.

कार्यक्रम में पीएम मोदी द्वारा 'सियावर राम चंद्र की जय' के उद्घोष की भी सभी अख़बारों में चर्चा है.

हिन्दुस्तान अख़बार ने भूमि-पूजन के अवसर पर अयोध्या समेत देश की राजधानी दिल्ली और अन्य जगहों पर मनाये गये जश्न को कवर किया है. अख़बार ने लिखा है कि 'देश में कई जगह होली और दिवाली एक साथ मनाई गई.' साथ ही यह भी लिखा है कि 'कई जगहों पर कोरोना महामारी को लेकर लापरवाही देखने को मिली.'

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अमर उजाला अख़बार ने लिखा है कि 'राम मंदिर भूमि पूजन पर अमरीका में भी 'राम नाम' की गूंज सुनाई दी. वर्षों पुरानी इच्छा पूरी होने पर अमरीका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने दीप जलाकर अपनी खुशी ज़ाहिर की. वॉशिंगटन शहर में विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने राम मंदिर की डिजिटल तस्वीरों वाली झांकी निकाली.'

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने इस मौक़े पर अयोध्या ज़मीन विवाद के पक्षकार रहे हाशिम अंसारी के बेटे इक़बाल अंसारी का इंटरव्यू प्रकाशित किया है. इक़बाल अयोध्या में हुए शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल थे.

अख़बार से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं वहाँ यह संदेश देने के लिए गया कि भारत का मुसलमान राम मंदिर बनने से खफ़ा नहीं है और ना ही इसका विरोध करता है."

जब उनसे पूछा गया कि 'मंदिर बनने के बाद की स्थिति को वे कैसे देखते हैं?' तो उन्होंने कहा, "ज़्यादातर हिन्दू बहुत सहिष्णु हैं. राम में उनकी आस्था है और अगर हम उसका सम्मान करें तो दो समुदायों में टकराव का सवाल ही पैदा नहीं होता."

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नवभारत टाइम्स अख़बार ने लिखा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्यक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के सीएम आदित्यनाथ योगी ने राम मंदिर के साथ-साथ विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात की.

इस दौरान उनसे कहा गया कि 'राम मंदिर के भूमि-पूजन में वे शामिल हुए, पर ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब मस्जिद की नींव रखी जायेगी तो सीएम योगी वहाँ नहीं जायेंगे.' इस पर योगी ने कहा, "मेरा जो भी काम है, वो मैं करूंगा. बाकी मुझे ना तो वहाँ बुलाया जायेगा इसलिए मैं वहाँ जाऊंगा भी नहीं."

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वहीं 'द टेलीग्राफ़' अख़बार ने उस प्रश्न को विशेष महत्व दिया है कि 'क्या देश के प्रधानमंत्री को एक मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए था?' अख़बार ने मुख पृष्ठ पर भारतीय संविधान की एक तस्वीर के साथ लिखा है, 'वो क़िताब जो 'हम, भारत के लोग' से शुरू होती है, उसे हमने असफल कर दिया.'

अख़बार लिखता है कि 'भारतीय गणतंत्र में राजा और ऋषि के बीच अब अंतर नहीं रहा.'

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मोदी की तारीफ़ करने पर स्टालिन ने अपने विधायक को किया निलंबित

राम मंदिर निर्माण के प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करने पर द्रविड़ मुनेत्र कणगम (द्रमुक) पार्टी ने अपने एक विधायक को सस्‍पेंड कर दिया.

इस ख़बर को दैनिक जागरण अख़बार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है. अख़बार ने लिखा है, 'पीएम मोदी की तारीफ़ करना द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन को इतना नागवार गुज़रा कि उन्होंने अपने विधायक कूका सेल्वम को पार्टी के सभी पदों से कार्यमुक्त करते हुए निलंबित कर दिया. द्रमुक ने विधायक को नोटिस भेजकर पूछा है कि क्यों ना उन्हें पार्टी से बर्ख़ास्त कर दिया जाये.'

इस बीच विधायक सेल्वम ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि निलंबित किये जाने से वे चिंतित नहीं हैं और पार्टी से बर्ख़ास्त किये जाने के बाद भी वे जनहित का काम करते रहेंगे.

अख़बार के अनुसार, सेल्वम ने द्रमुक प्रमुख स्टालिन से सांगठनिक चुनाव कराने की माँग करते हुए कहा था कि पार्टी कों कांग्रेस से नाता तोड़ लेना चाहिए क्योंकि उसके नेता राहुल गांधी पीएम की आलोचना करते रहते हैं.

तमिलनाडु के थाउजैंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र के विधायक सेल्वम ने सुशासन और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के प्रयासों के लिए पीएम मोदी की तारीफ़ की थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जीसी मुर्मू

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मुर्मू के इस्तीफ़े की वजह क्या रही?

केंद्र शासित जम्मू और कश्मीर के पहले उप-राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के इस्तीफ़े की ख़बर को लगभग सभी अख़बारों ने प्रकाशित किया है. यह पद संभालने के नौ महीने बाद उन्होंने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने इसे 'आकस्मिक गतिविधि' बताया है. अख़बार ने लिखा है, 'मुर्मू ने अनुच्छेद-370 हटने की पहली वर्षगांठ पर त्याग-पत्र दिया. वे अब भारत के अगले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक बनाये जा सकते हैं.'

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 'उप-राज्यपाल मुर्मू और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम के बीच कुछ प्रशासनिक समस्याओं के कारण मतभेद थे जिसकी वजह से उप-राज्यपाल ने उन्होंने बैठकें और फ़ाइलें अपने दफ़्तर में बुलानी शुरू कर दी थीं और वे नोट्स के ज़रिये मुख्य सचिव को निर्देश भेज रहे थे.'

अख़बार ने उप-राज्यपाल के एक क़रीबी सूत्र के हवाले से लिखा है कि 'मुर्मू सिविल सर्वेंट्स के बीच जवाबदेही की कमी को लेकर चिंतित थे. साथ ही वे नौकरशाहों पर जनता के दखल को बढ़ाने का दबाव बना रहे थे ताकि विकास कार्यक्रमों में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा मिले.'

पिछले साल 31 अक्तूबर को पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तौर पर विभाजन के बाद मुर्मू नये केंद्र शासित प्रदेश के पहले एलजी बने थे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की जगह ली थी.

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रक्षा मंत्रालय ने मानी चीनी सैनिकों के घुसपैठ की बात

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने एक सरकारी दस्तावेज़ के आधार पर लिखा है कि 'रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से इस बात को स्वीकार किया है कि मई महीने में चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र (पूर्वी लद्दाख) में घुसपैठ की थी.'

अख़बार के अनुसार रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट यह दस्तावेज़ अपलोड किया गया है जिसमें लिखा है, "चीनी सैनिकों ने 17-18 मई को अपनी हद पार कर भारत के कुगरांग नाला (पीपी 15 के पास), गोगरा (पीपी-17ए के पास) और पेंगॉन्ग त्सो झील के उत्तरी किनारे के पास घुसपैठ की."

अख़बार ने लिखा है कि 5-6 मई को हुए पहले टकराव के बाद दोनों देशों के बीच पैदा हुए सैन्य तनाव के बाद से लेकर अब तक किसी दस्तावेज़ में यह बात आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं की गई.

इस दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि भारत और चीन के सैनिकों को पूरी तरह पीछे हटने में उम्मीद से ज़्यादा समय लग सकता है.

मई के अंत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'कुछ चीनी सैनिक हर बार की तरह सीमा का उल्लंघन कर हमारी तरफ आये थे.' लेकिन उस वक़्त ज़ोर देते हुए यह स्पष्टीकरण दिया गया था कि इसे यह ना समझा जाये कि 'चीनी सैनिक एलएसी पार कर भारतीय सीमा में घुसे थे.'

दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में अपनी-अपनी सेनाएं पीछे हटाने को लेकर पाँच चरण की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई बड़ा असर नहीं दिखा है.

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