राम मंदिर भूमि पूजन: भारत में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक वीडियो का भंडाफोड़

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े भ्रामक वीडियो का भंडाफोड़

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, श्रुति मेनन
    • पदनाम, बीबीसी रियलिटी चेक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में विशाल राम मंदिर के निर्माण की बुधवार को आधारशिला रखी.

मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम बेहद विवादास्पद विषय रहा है.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ हो पाया था.

कभी इस जगह पर मस्जिद हुआ करती थी, जिसे साल 1992 में हिंदुओं की एक भीड़ ने ढहा दिया था.

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश में दंगे भी हुए जिनमें तकरीबन दो हज़ार लोग मारे गए थे.

भारत में सोशल मीडिया पर मंदिर की डिज़ाइन, ब्लूप्रिंट और भूमि पूजन समारोह को लेकर तरह-तरह की बातें कही-सुनी जा रही हैं जिनमें कुछ तो बेहद ही भ्रामक हैं.

हम ऐसे ही कुछ सोशल मीडिया संदेशों पर गौर करेंगे जिन्हें बहुत सारे लोग शेयर कर रहे हैं.

ये नए मंदिर का ब्लूप्रिंट नहीं है

प्रस्तावित राम मंदिर का डिज़ाइन सरकार ने इसी हफ़्ते जारी किया है. लेकिन इससे काफी पहले से इंटरनेट पर 'मंदिर कैसा दिखेगा' को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म था.

साल 2014 में बने एक ग्राफिक एनीमेशन को अयोध्या का राम मंदिर बताकर शेयर किया जा रहा था जो दरअसल एक जैन मंदिर का था.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर ये कहते हुए पोस्ट शेयर किए जा रहे थे, "ये भगवान श्रीराम का विशाल मंदिर होगा. मेरे ईश्वर की जन्म भूमि से तिरपाल हटा दिया गया है. भारत एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है. अयोध्या पुकार रहा है, मंदिर का निर्माण करें."

Graphic image of Jain temple

रिवर्स इमेज सर्च की सामान्य तकनीक के ज़रिये ये जानकारी सामने आई कि असली वीडियो महाराष्ट्र के आर्किटेक्चर डिज़ाइन स्टूडियो ने तैयार किया था.

नहीं, ये राम मंदिर के भूमिपूजन की जगह नहीं है

सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में नए राम मंदिर के भूमि पूजन की तैयारियों के सिलसिले में वृहद स्तर पर सजावट दिखाया जा रहा था.

वीडियो में एक बड़ा सा भव्य हॉल कैंडल और फूलों से सजा हुआ दिख रहा था.

लेकिन रिवर्स इमेज सर्च से एक बार फिर इस बात से पर्दा उठ गया कि इस वीडियो का राम मंदिर या इसके भूमि पूजन से कोई संबंध नहीं था.

A temple in southern India claimed to be the inauguration deck in Ayodhya

दरअसल, ये तेलंगाना में हो रहे एक समारोह का वीडियो है. वीडियो में दिख रहे देवता भगवान विष्णु हैं न कि भगवान राम.

भारतीय मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आ रही हैं कि अयोध्या में भूमि पूजन समारोह से पहले शहर को पूरी तरह से सजा दिया गया है लेकिन इस वीडियो का बुधवार के कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है.

ये तीर्थयात्री अयोध्या की तरफ़ जा रहे थे लेकिन ये पिछले साल की बात है.

एक वायरल वीडियो जिसमें भगवा लंगोट पहने कुछ लोग सिर पर ईंट लिए बारिश में पैदल जा रहे थे, ये दावा किया गया कि वे राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए 1800 किलोमीटर चल कर अयोध्या की तरफ़ कूच कर रहे हैं.

ट्विटर पर शेयर किए गए एक वीडियो पोस्ट को एक लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

इसमें कोई शक नहीं कि ये वीडियो अयोध्या की तीर्थ यात्रा से ही जुड़ा हुआ है लेकिन इस पोस्ट को पहली बार पिछले साल सितंबर में फ़ेसबुक पर वीडियो में दिख रहे एक शख़्स ने शेयर किया था.

वीडियो में दिख रहे लोग कन्नड़ में बोल रहे हैं और वे कर्नाटक से अयोध्या की तरफ़ बढ़ रहे थे. उन्होंने भगवान राम के सम्मान में एक महत्वपूर्ण त्योहार में हिस्सा लेने के लिए 1800 किलोमीटर की यात्रा की थी.

इन लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि इन ईंटों का इस्तेमाल नए राम मंदिर के निर्माण में किया जाए.

स्पेन में भारतीय नए मंदिर के निर्माण का जश्न नहीं मना रहे हैं

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में सफ़ेद, केसरिया और हरे रंग के कपड़े पहने लोगों का एक समूह स्पेन की सड़कों पर ड्रम बजाते हुए देखा जा सकता है.

इस वीडियो को शेयर करते हुए ये दावा किया जा रहा है कि स्पेन में रहने वाले भारतीय लोग मंदिर निर्माण का जश्न मना रहे हैं.

A dance group performs in Spain in June 2018

इस वीडियो को एक सोशल पोस्ट में एक लाख से भी ज़्यादा बार देखा गया है.

रिवर्स इमेज तकनीक के ज़रिए ये पता चलता है कि ये वीडियो दरअसल साल 2018 के जून महीने का है. तब भारत से एक डांस ग्रुप स्पेन के दौरे पर गया था, और वही लोग वहां ड्रम बजा रहे थे.

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