वाराणसी में जिस युवक का सिर मुंडवाया गया वो नेपाली नहीं बनारसी है?

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
वाराणसी पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों जिस कथित नेपाली युवक के कुछ लोगों ने सिर के बाल मुंडवाए और नेपाल विरोधी नारे लगवाए, वह नेपाली नहीं बल्कि वाराणसी का ही रहने वाला है.
पुलिस के मुताबिक़, युवक के पिता सरकारी कर्मचारी थे और युवक भी सरकारी घर में ही रहता है.
वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने बताया, "घटना में जिस व्यक्ति के बाल मुंडवाने का वीडियो बनाया गया है वह व्यक्ति वाराणसी के भेलूपुर थाने के अंतर्गत आने वाले जल संस्थान में सरकारी क्वार्टर में रहता है. युवक के पिता और माता दोनों जल संस्थान वाराणसी में सरकारी नौकरी करते थे."
"मां की मृत्यु के पश्चात उनके स्थान पर भाई को नौकरी प्राप्त हुई. वर्तमान में वीडियो में बाल मुंडवाते दिख रहा व्यक्ति और उसका भाई दोनों जल संस्थान में सरकारी क्वार्टर में ही निवास करते हैं. इनके पास यहीं के वोटर कार्ड और आधार कार्ड हैं. इनके पूर्वज नेपाल में कहां रहते थे इस सम्बन्ध में इनको जानकारी नहीं है."
क्या था मामला?
वाराणसी में रहने वाले एक नेपाली नागरिक का कुछ लोगों ने वाराणसी में गंगा के किनारे बुधवार को जबरन मुंडन कर दिया. यही नहीं, नेपाली युवक के सिर पर 'जय श्रीराम' लिख दिया गया और युवक से नेपाली प्रधानमंत्री 'मुर्दाबाद' जैसे नारे लगवाए गए.
इस दौरान युवक का वीडियो बनाया गया और आस-पास खड़े दूसरे लोग भी नारे लगा रहे थे.
बाद में विश्व हिंदू सेना नाम के एक संगठन ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो जारी करते हुए कथित तौर पर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके अयोध्या के नेपाल में स्थित होने संबंधी बयान पर चेतावनी भी दी.

साथ ही बनारस में रह रहे नेपाली नागरिकों को भी यह चेतावनी दी है कि यदि नेपाल के पीएम लगातार ऐसे बयान देंगे तो इसका परिणाम उन्हें भुगतना होगा.
सोशल मीडिया के ज़रिए पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए गुरुवार को पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की थी. इस मामले में अब तक कुल छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. हालांकि मुख्य अभियुक्त अरुण पाठक अभी भी पुलिस की गिरफ़्त से बाहर है.
कौन है युवक?
एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि युवक का नाम धर्मेंद्र सिंह है और जिन लोगों ने उसके साथ यह सलूक किया है वो भी उसके जानने वाले ही थे. एसएसपी के मुताबिक, इस काम के लिए धर्मेंद्र सिंह को 1000 रुपये भी दिए गए हैं.
विश्व हिंदू सेना ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर जारी की, जिसमें पशुपतिनाथ मंदिर के प्रांगण में पोस्टर चिपका दिख रहा है. इस पोस्टर में यह लिखा था कि नेपाल के पीएम ओली भगवान श्रीराम के बारे में दिया गया अपना बयान वापस ले लें, वरना नेपाली नागरिकों को परिणाम भुगतना होगा.

बुधवार को इस तरह के पोस्टर चिपकाने के बाद ही शाम को विश्व हिंदू सेना ने गंगा घाट के किनारे जा रहे एक नेपाली नागरिक को कथित तौर पर रोककर उसका मुंडन कर दिया.
वीडियो बनाते वक़्त नेपाली युवक यह कहता हुआ दिख रहा है, "मैं इस देश यानी भारत में रहता हूं, यहीं का खाता हूं और भगवान श्रीराम का जन्म भारत में ही हुआ था. वो नेपाल के नहीं हैं."
एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि इस मामले में संतोष पाण्डेय, अमित दुबे, आशीष मिश्रा और राजू यादव को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था जबकि दो लोगों को शनिवार को गिरफ़्तार किया गया है.
इन सभी के ख़िलाफ़ भेलूपुर थाने में प्रभारी इंस्पेक्टर ने आईपीसी की धारा 505(2) और 295 तथा आईटी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज कराया गया है. हालांकि मुख्य अभियुक्त अरुण पाठक अब तक फ़रार हैं.

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वाराणसी में रहने वाले नेपाली लोग
पिछले दिनों नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा था कि अयोध्या नगरी भारत में नहीं बल्कि नेपाल के एक गांव में है. उनके इस बयान पर भारत में काफ़ी विरोध हो रहा है.
वाराणसी मामले में स्थानीय पत्रकार गिरीश दुबे कहते हैं कि यहां नेपाली लोगों का एक पूरा मोहल्ला ही है और अन्य जगहों पर भी तमाम नेपाली लोग रहते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि नेपालियों में किसी तरह का भय हो.
गिरीश दुबे के मुताबिक, "यह कुछ लोगों की शरारत के अलावा और कुछ नहीं है. जिस नेपाली युवक के साथ यह घटना घटी है, उसे भी कोई जबरन नहीं ले गया था. पोस्टर लगाने वाले लोग अक्सर इस तरह के विवादित काम करते रहते हैं चर्चा में आने के लिए. जहां तक नेपालियों का सवाल है तो वो बनारस में बहुत आराम और निर्भीक होकर पहले की ही तरह रह रहे हैं."
स्थानीय लोगों के मुताबिक, धर्मेंद्र सिंह और उनका परिवार लंबे समय से भले ही बनारस में रह रहा है और परिवार के लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं लेकिन मूल रूप से ये लोग नेपाल के ही हैं.
एसएसपी अमित पाठक का कहना था कि धर्मेंद्र सिंह को यह नहीं मालूम कि वो नेपाल में कहां के मूल निवासी हैं.
इस बीच, बीबीसी हिन्दी ने पीड़ित बताए जा रहे युवक से बात करने की कोशिश की लेकिन उससे बात संभव नहीं हो पाई.
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