श्रीलंका ने क्या भारत का प्रोजेक्ट रोक दिया, राजपक्षे के बयान से हलचल- प्रेस रिव्यू

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इमेज कैप्शन, श्रीलंका के प्रधानमंत्री के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

एक साल पहले श्रीलंका की तत्कालीन सरकार ने भारत और जापान के साथ कोलंबो में ईस्ट कॉन्टेनर टर्मिनल (ईसीटी) बनाने को लेकर समझौता किया था.

अब श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट पर अभी अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है. इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने प्रमुखता से छापा है.

बुधवार को तमिल मीडिया के संपादकों को संबोधित करते हुए राजपक्षे ने कहा, ''यह समझौता श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुआ था. लेकिन हमने अभी इस पर कोई फ़ैसला नहीं किया है.''

द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि प्रधानमंत्री के बयान से संकते मिलते हैं कि जिस रणनीतिक पोर्ट के पास इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत इच्छुक था, वो हाथ से निकलता दिख रहा है.

अख़बार के मुताबिक़ भारत ने इसे लेकर द्विपक्षीय स्तर पर बात की थी. ईसीटी परियोजना को लेकर श्रीलंका में विवाद है. श्रीलंका के राष्ट्रवादी समूह इसमें किसी भी 'विदेशी संलिप्तता' का विरोध कर रहे हैं.

मई 2019 में बातचीत के लंबे दौर के बाद श्रीलंका, जापान और भारत इस प्रोजेक्ट के एमओयू तक पहुंचे थे. 70 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना पर सहमति बनी थी. इसमें प्रोजेक्ट में 51 फ़ीसदी शेयर जापान का और 49 फ़ीसदी शेयर भारत का होना था. हालांकि इसका स्वामित्व श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी के पास ही रहता. ईसीटी से 70 फ़ीसदी कारोबार भारत से होता.

कोलंबो के अख़बार संडे टाइम्स ने हाल ही में एक रिपोर्ट छापी थी कि अडाणी ग्रुप श्रीलंकाई कंपनी जॉन नील्स होल्डिंग्स से इस प्रोजेक्ट में साझेदारी के लिए बात कर रहा है.

ईसीटी प्रोजेक्ट को लेकर विवाद कोई नया नहीं है. इस टर्मिनल के विकास को लेकर पूर्व तत्कालीन श्रीलंकाई राष्ट्रपति सिरीसेना और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के बीच विवाद था. विक्रमसिंघे का मानना था कि इस टर्मिनल से श्रीलंका को शिपिंग हब बनाने में मदद मिलेगी जबकि सिरीसेना नहीं चाहते थे कि इसमें कोई विदेश निवेश हो.

ईसीटी कोलंबो इंटरनेशनल कॉन्टेनर टर्मिनल के पास है. कोलंबो इंटरनेशनल कॉन्टेनर को चाइना मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स कंपनी लिमिटेड और पोर्ट्स अथॉरिटी ने मिलकर बनाया है.

इसमें चीनी कंपनी का 85 फ़ीसदी शेयर है. श्रीलंका में भारत और चीन की मौजूदगी को लेकर प्रतिद्वंद्विता की बात कही जाती है. हालांकि श्रीलंका में भारत के प्रोजेक्ट की बातें होती हैं लेकिन चीन अंजाम तक ले जाने में सफल होता है.

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पोर्ट वर्कर पूरे मामले पर भारत के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. जब प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की बात कही तो पोर्टकर्मियों ने अपना विरोध-प्रदर्शन वापस लिया.

भारत श्रीलंका

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श्रीलंका का वामपंथी धड़ा भी इस प्रोजेक्ट में भारत की संलिप्तता का विरोध कर रहा है. श्रीलंका की आर्थिक हालत ठीक नहीं है. वो भारी विदेशी क़र्ज़ों से जूझ रहा है. श्रीलंका पर कुल विदेशी क़र्ज़ क़रीब 55 अरब डॉलर है और यह श्रीलंका की जीडीपी का 80 फ़ीसदी है. इस क़र्ज़ में चीन और एशियन डिवेलपमेंट बैंक का 14 फ़ीसदी हिस्सा है. जापान का 12 फ़ीसदी, विश्व बैंक का 11 फ़ीसदी और भारत का दो फ़ीसदी हिस्सा है.

इससे पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निजी तौर पर आग्रह किया था कि आर्थिक संकट तो देखते हुए वो श्रीलंका को क़र्ज़ चुकाने के लिए और मोहलत दें. श्रीलंका के प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि श्रीलंका ने सभी क़र्ज़दाताओं से क़र्ज़ चुकाने के लिए मोहलत देने की अपील की है और इसमें भारत भी शामिल है.

श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार पहले से ही ख़ाली पड़ा है. श्रीलंका एक साथ कई मोर्चों पर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है. द हिन्दू ने लिखा है कि पिछले साल ईस्टर पर आतंकवादी हमला और इसके बाद कोरोना वायरस की महामारी ने श्रीलंका के कारोबार की कमर तोड़ दी है. श्रीलंका मुख्य रूप से चाय, कपड़ा, विदेशों में काम रहे श्रीलंकाई श्रमिकों और पयर्टन सेक्टर से विदेशी मुद्रा हासिल करता है लेकिन ये सारे सेक्टर कोरोना के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

श्रीलंका को इस साल कुल विदेशी क़र्ज़ का 2.9 अरब डॉलर भुगतान करना है. इसे लेकर श्रीलंका ने भारत से क़र्ज़अदायगी की मोहलत बढ़ाने और मुद्रा अदला-बदली की सुविधा देने को लेकर दो बार अनुरोध किए हैं.

नेपाल

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नेपाल में सियासी घमासान

रांची से प्रकाशित होने वाला हिन्दी अख़बार प्रभात ख़बर ने नेपाल में जारी सियासी घमासान को लीड ख़बर बनाया है. अख़बार ने हेडिंग दी है- नेपाल की राजनीति में प्रचंड तूफ़ान, बजट सत्र स्थगित. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में मचे सियासी घमासान के बीच पड़ोसी देश में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है.''

पार्टी के अंदर विरोध का सामना कर रहे केपी ओली ने गुरुवार को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाक़ात की. इस्तीफ़े की अटकलों के बीच पीएम ओली ने बालुवाटर में कैबिनेट की बैठक बुलाई और संसद का बजट सत्र स्थगित करने का फ़ैसला ले लिया. राष्ट्रपति ने बजट सत्र स्थगित करने की सिफ़ारिश को मान लिया. कहा जा रहा है कि ओली ने ऐसा संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से बचने के लिए किया है.

पुतिन

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चीन से तनाव के बीच रूस से 33 जेट की ख़रीदारी

नवभारत टाइम्स में रूस से 33 जेट की ख़रीदारी पहले पन्ने की लीड ख़बर है. इस ख़बर की हेडिंग है- चीन से तनाव के बीच रूस से लेंगे 33 जेट.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''लद्दाख में चीन से तनातनी के बीच रक्षा सौदे को मंज़ूरी दी गई है. इसमें भारत रूस से 21 मिग-29 विमान ख़रीदेगा. इस पर 7418 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इसके अलावा 12 सुखोई-30 एचएएल से ख़रीदे जाएंगे. यह 10730 करोड़ रुपए की ख़रीदारी होगी. मौजूदा 59 मिग-29 एयरक्राफ़्ट अपगेर्ड किए जाएंगे. गुरुवार को भारतीय सेना, नेवी और एयर फ़ोर्स की ताक़त बढ़ाने के लिए डिफेंस एक्युजिशन काउंसिल ने 38,900 करोड़ रुपए के ख़रीद प्रस्तावों को मंज़ूरी दी.''

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