चीन के पाले में जा रहा श्रीलंका, पहले किया था भारत से कई बार अनुरोध- प्रेस रिव्यू

चीन-श्रीलंका

इमेज स्रोत, Getty Images

श्रीलंका एक बार फिर से चीन के पाले में जा रहा है. श्रीलंका की राजपक्षे सरकार अंतरराष्ट्रीय क़र्ज़दाताओं से से क़र्ज़ लेने की कोशिश कर रही है लेकिन उसे चीन से ही ज़्यादा उम्मीद दिख रही है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के अनुसार श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निजी तौर पर आग्रह किया था कि आर्थिक संकट तो देखते हुए वो श्रीलंका को क़र्ज़ चुकाने के लिए और मोहलत दें. द हिन्दू ने इस ख़बर को पेज संख्या आठ पर विस्तार से छापा है.

द हिन्दू के अनुसार राजपक्षे ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को क़र्ज़ से राहत देने का अनुरोध किया है. श्रीलंका के प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि श्रीलंका ने सभी क़र्ज़दाताओं से क़र्ज़ चुकाने के लिए मोहलत देने की अपील की है और इसमें भारत भी शामिल है.

96 करोड़ डॉलर का भारतीय क़र्ज़

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार 96 करोड़ डॉलर के भारतीय क़र्ज़ की अदायगी को लेकर और मोहलत देने पर श्रीलंका और भारत में बात हो रही है. इसके अलावा श्रीलंका ने भारत से मुद्रा की अदला-बदली की सुविधा की भी मांग की है. भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि श्रीलंका को वर्चुअल बैठक के लिए कहा गया है लेकिन अभी तारीख़ तय नहीं हो पाई है. श्रीलंका ने वर्चुअल बैठक को लेकर अभी कुछ भी नहीं कहा है.

पिछले हफ़्ते श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने यूरोपीय यूनियन के राजदूतों के एक समूह से कहा था कि श्रीलंका को नए निवेश की ज़रूरत है न कि नए क़र्ज़ की. इसके साथ ही उन्होंने क़र्ज़ चुकाने में और मोहलत देने की मांग की थी. कोरोना वायरस की महामारी के वक़्त से ही श्रीलंका क़र्ज़ को चुकाने में आ रही समस्या से जूझ रहा है.

चीन-श्रीलंका

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और चीन के राष्ट्पति शी जिनपिंग

श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार पहले से ही ख़ाली पड़ा है. श्रीलंका एक साथ कई मोर्चों पर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है. द हिन्दू ने लिखा है कि पिछले साल ईस्टर पर आतंकवादी हमला और इसके बाद कोरोना वायरस की महामारी ने श्रीलंका के कारोबार की कमर तोड़ दी है. श्रीलंका मुख्य रूप से चाय, कपड़ा, विदेशों में काम रहे श्रीलंकाई श्रमिकों और पयर्टन सेक्टर से विदेशी मुद्रा हासिल करता है लेकिन ये सारे सेक्टर कोरोना के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

श्रीलंका को इस साल कुल विदेशी क़र्ज़ का 2.9 अरब डॉलर भुगतान करना है. इसे लेकर श्रीलंका ने भारत से क़र्ज़अदायगी की मोहलत बढ़ाने और मुद्रा अदला-बदली की सुविधा देने को लेकर दो बार अनुरोध किए हैं.

चीन की ओर गया श्रीलंका

और जगह उम्मीद नहीं दिखने के बाद श्रीलंका की सरकार एक बार फिर से चीन की शरण में जा रही. श्रीलंका ने ऐसा ही 2014 में भी किया था. ऐसे में भारत के लिए यह पूरा मामला चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है.

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार 13 मई को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे की बीच बातचीत हुई थी. चीन श्रीलंका को 50 करोड़ डॉलर का क़र्ज़ देने के लिए तैयार है ताकि वो अपनी माली हालत सुधार सके.

द हिन्दू ने कोलंबो स्थित चीनी दूतावास से इस बारे में पूछा तो बताया कि दोनों देश आर्थिक सहयोग को लेकर बात कर रहे हैं. चीनी दूतावास के प्रवक्ता लुओ चोंग ने द हिन्दू से कहा कि आने वाले हफ़्तों में इस मामले में ठोस प्रगति दिखेगी.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार फ़रवरी महीने में जब प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे भारत के दौरे पर आए थे तब भी उन्होंने भारत से क़र्ज़ अदायगी को टालने का अनुरोध किया था.

अप्रैल महीने में श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने आरबीआई से 40 करोड़ डॉलर की मुद्रा की अदला-बदली की कोशिश की थी. इसके बाद मई महीने में भी यही कोशिश की थी. श्रीलंका ने सार्क सहयोग के तहत यह कोशिश की थी. श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे प्रधानमंत्री मोदी से चाहते थे कि वो 1.1 अरब डॉलर की मुद्रा की अदला-बदली की अनुमति दें.

चीन श्रीलंका

इमेज स्रोत, Getty Images

श्रीलंका के लिए स्थिति तब और विकट हो गई जब जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी ने प्रस्तावित लाइट रेल ट्रांजिट के लिए फंड रोक दी. स्थानीय मीडिया के अनुसार जापान ने श्रीलंका पर विदेशी बढ़ते क़र्ज़ के कारण यह फ़ैसला किया था.

श्रीलंका पर कुल विदेशी क़र्ज़ क़रीब 55 अरब डॉलर है और यह श्रीलंका की जीडीपी का 80 फ़ीसदी है. इस क़र्ज़ में चीन और एशियन डिवेलपमेंट बैंक का 14 फ़ीसदी हिस्सा है. जापान का 12 फ़ीसदी, विश्व बैंक का 11 फ़ीसदी और भारत का दो फ़ीसदी हिस्सा है.

इस इलाक़े के और देशों को भी क़र्ज़ भुगतान के लिए क़र्ज़ की ज़रूरत है. शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे से बात की थी.

इमरान ख़ान ने राजपक्षे से कोरोना महामारी से उपजी आर्थिक परेशानी को कम करने के लिए 'ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन डेब्ट रिलीफ़' में शामिल होने के लिए कहा था. इसे लेकर कोलंबो स्थिति पाकिस्तानी उच्चायोग ने एक प्रेस रिलीज़ भी जारी किया है.

श्रीलंका भारत

इमेज स्रोत, Getty Images

इसके अलावा मालदीव के राष्ट्रपति सोलेह क़र्ज़ को लेकर अपने द्विपक्षीय साझेदारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बात कर रहे हैं. मालदीव के राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहिम हुड ने द हिन्दू से कहा, ''हम पूरी दुनिया में महामारी से उपजे आर्थिक संकट से निपटने के लिए विकल्प की तलाश कर रहे हैं. हम भारत से भी मदद चाहेंगे. भारत हमारा क़रीबी दोस्तों में से एक है.''

सरकार के सूत्रों के अनुसार मालदीव पर भारत का बहुत छोटा क़र्ज़ है. मालदीव चाहता है कि भारत वहां की परियोजनाओं और विकास की योजनाओं में निवेश करे. मालदीव पर चीन का 1.5 अरब डॉलर का क़र्ज़ है.

60 करोड़ डॉलर तो सीधे दोनों सरकारों के बीच का क़र्ज़ है. सोलेह सरकार इससे पहले चीन के क़र्ज़ को ख़तरनाक बता चुकी है. हालांकि ऐसी रिपोर्ट है कि चीन ने इस साल की अदायगी को 10 करोड़ डॉलर से कम कर 7.5 करोड़ डॉलर कर दिया है.

टिड्डी

इमेज स्रोत, Getty Images

टिड्डियों का ख़तरा अब भी कायम

नवभारत टाइम्स ने दिल्ली और एनसीआर में टिड्डियों के ख़तरे को लेकर पहले पन्ने पर लीड ख़बर लगाई है. अख़बार ने लिखा है कि हरियाणा के महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी के रास्ते टिड्डियों ने शनिवार दिन में गुड़गाँव और इससे लगती राजधानी के इलाक़ों में धावा बोला, लेकिन शाम होते-होते फ़रीदाबाद और पलवल की ओर निकल गया.

टिड्डी दल के इस हमले में फसलों का बड़ा नुक़सान नहीं हुआ है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ख़तरा अभी टला नहीं है. ये पीली टिड्डियां थीं जो अंडे देती हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में इन टिड्डी दलों का फिर से हमला हो सकता है. इसे देखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार ने ज़रूरी इंतज़ाम किए हैं.

नवभारत टाइम्स के अनुसार 1931 के बाद पहली बार दिल्ली तक कोई टिड्डी दल पहुंचा है. इसे देखते हुए आईजीआई के हर पायलटों को एडवाइजरी जारी की गई है. केंद्र ने कहा है कि यूपी और हरियाणा में टिड्डी दल को कंट्रोल में करने के लिए टीमें तैनात की गई हैं.

अहमद पटेल

इमेज स्रोत, Getty Images

कांग्रेस नेता अहमद पटेल से ईडी की पूछताछ

जनसत्ता ने पहले पन्ने पर कांग्रेस नेता अहमद पटेल से प्रवर्तन निदेशालय की घंटो पूछताछ की ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार ने लिखा है कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की एक टीम शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के दिल्ली स्थित आवास पहुंची और संदेसरा बंधुओं से संबंधित घपले के मामले में उनसे पूछताछ की.

ईडी के तीन अधिकारी शनिवार को दिल्ली के 23 मदर टेरेसा क्रेसेंट स्थित पटेल के आवास पर सुबह साढ़े 11 बजे पहुंचे थे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)