कांवड़िए अगर हरिद्वार पहुँचे, तो 14 दिन के क्वारंटीन पर जाएँगे

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना संक्रमण को देखते हुए सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने पहले प्रतिबंध की घोषणा की और अब कांवड़ियों को हरिद्वार तक पहुँचने से रोकने के लिए और सख़्ती बरती गई है.
हरिद्वार प्रशासन ने तय किया है कि प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई बाहरी व्यक्ति हरिद्वार आता है, तो उसे 14 दिन तक क्वारंटीन में रहना होगा और इसका ख़र्च उन्हें ख़ुद ही वहन करना पड़ेगा.
उत्तराखंड की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश और हरियाणा के ज़िलों के अधिकारियों के साथ हरिद्वार के अधिकारियों की हुई बैठक के बाद सीमा पर चौकसी बढ़ाने और बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने की तैयारियों पर चर्चा हुई.
हरिद्वार के ज़िलाधिकारी सी रविशंकर ने बीबीसी को बताया, "आम लोगों को यात्रा स्थगित करने के बारे में सूचना दी जा रही है. इसके लिए बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाएगा. लेकिन इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति आता है तो उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. जो लोग बाहर से यहाँ आएँगे उन्हें 14 दिन तक क्वारंटीन में रहना होगा और इसका ख़र्च भी उन्हें ही देना होगा."
हरिद्वार के ज़िलाधिकारी ने बताया कि यह फ़ैसला उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पड़ोसी ज़िलों के ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ हुई समन्वय बैठक में किया गया. उन्होंने कहा कि यह बैठक प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराने संबंधी रणनीति तैयार करने के लिए हुई थी.
बैठक में हरिद्वार के अधिकारियों के अलावा हरियाणा के यमुनानगर और करनाल ज़िले के अधिकारी और यूपी में मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर और बिजनौर के अधिकारी मौजूद थे.
सावन के महीने में पवित्र गंगा जल लेने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए हरिद्वार आते हैं, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पिछले महीने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने यात्रा को स्थगित करने की घोषणा की थी.

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कांवड़ यात्रा आगामी छह जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने से शुरू होने वाली थी. तीनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक में तय किया गया कि श्रद्धालुओं को अपने-अपने क्षेत्र में सख़्ती से रोका जाएगा. इसके अलावा तीनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने बॉर्डर पर सघन चेकिंग अभियान भी चलाएगी.
बैठक में अधिकारियों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि सघन चेकिंग के दौरान किसी भी जनपद से श्रद्धालुओं के समूह या दल को हरिद्वार नहीं आने दिया जाएगा. हरिद्वार के ज़िलाधिकारी के मुताबिक, कांवड़ यात्रा को पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय निवासी या कोई भी बाहरी यात्री अगर सादे कपड़े में हरिद्वार आता है तो उसे जल भरने से नहीं रोका जाएगा और ना ही कोई कार्रवाई की जाएगी.
बैठक में मौजूद मुज़फ़्फ़रनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने बताया कि सभी पुलिस अधीक्षकों ने इस बार यात्रा मार्गों में किसी भी प्रकार के राहत शिविर, भंडारों के आयोजन जैसे कार्यक्रमों को भी प्रतिबंधित करने की बात की है. बैठक में तय किया गया कि किसी भी संस्था को शिविर और भंडारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और न ही कांवड़ बेचने की अनुमति दी जाएगी.
कोरोना संक्रमण को देखते हुए 21 जून को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा ने संयुक्त रूप से निर्णय लेते हुए 6 जुलाई से शुरू होने वाली वार्षिक कांवड़ यात्रा स्थगित करने का फ़ैसला किया था.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच वीडियो-कॉन्फ्रेंस पर हुई वार्ता के बाद कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं देने का फ़ैसला किया गया था.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और संभागीय आयुक्तों को भी धार्मिक नेताओं, कांवड़ संघों और शांति समितियों को फ़ैसले के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया था.
सावन के महीने में शिव भक्तों की कांवड़ यात्रा एक प्रमुख धार्मिक यात्रा होती है और बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं. हरिद्वार के अलावा वाराणसी और अन्य जगहों पर भी शिवभक्त गंगाजल लेकर शिव मंदिरों में चढ़ाने के लिए जाते हैं. पिछले साल क़रीब चार करोड़ श्रद्धालु हरिद्वार गए थे और उत्तर प्रदेश में कई जगह कांवड़ियों पर हेलिकॉप्टरों से फूल बरसाए गए थे.
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