कोरोना वायरस: दिल्ली संक्रमण के मामले में मुंबई से आगे कैसे हो गई?

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- Author, ब्रजेश मिश्र
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले मुंबई से भी ज़्यादा हो गए हैं. संक्रमण के मामले में मुंबई अब तक दिल्ली से आगे थी. दिल्ली में गुरुवार सुबह के आँकड़ों के मुताबिक़ अब कुल कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 70390 हो गई है जबकि मुंबई में संक्रमण के मामले 69528 हैं.
दिल्ली में बीते 24 घंटों में संक्रमण के 3788 नए मामले सामने आए हैं. वहीं मुंबई में 24 घंटों में 1118 नए मामले मिले. हालांकि संक्रमण से होने वाली मौतों के मामले में दिल्ली मुंबई से पीछे है और स्थिति बेहतर है.
दिल्ली में अब तक संक्रमण से कुल 2365 लोगों की मौत हुई है जबकि मुंबई में 3964 लोग अब तक संक्रमण की वजह से जान गंवा चुके हैं.
कोरोना टेस्ट के आँकड़े
दिल्ली में अब तक कुल 4.2 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं. दिल्ली में टेस्टिंग रेट हर 10 लाख लोगों में 22142 है. जबकि मुंबई ने अब तक 2.94 लाख टेस्ट किए हैं और यहां टेस्टिंग की दर प्रति 10 लाख में 22668 है.
दिल्ली में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 2 मार्च को सामने आया था. जबकि मुंबई में पहला मामला 11 मार्च को आया.

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टेस्ट बढ़ने से संक्रमण के मामले बढ़े?
दिल्ली में संक्रमण के मामले बढ़ने को लेकर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यहां टेस्टिंग बढ़ी है जिससे अधिक लोग सामने आ रहे हैं. लेकिन कुछ जानकार इस बात पर सहमत नज़र नहीं आते.
दिल्ली में एंटिजेन रैपिड टेस्टिंग के अलावा कंटेनमेंट ज़ोन में घर-घर जाकर कोरोना टेस्टिंग करने की योजना पर भी काम चल रहा है. माना जा रहा है कि 30 जून तक कंटेनमेंट ज़ोन वाले सभी घरों में स्क्रीनिंग कर ली जाएगी. इसके बाद शहर के बाकी इलाकों में 6 जुलाई तक घर-घर जाकर स्क्रीनिंग का काम पूरा किया जाएगा.
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. गिरीश त्यागी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ज़्यादा टेस्टिंग होने की वजह से ही दिल्ली में संक्रमित लोग अधिक सामने आ रहे हैं.
उन्होंने कहा, ''अधिक टेस्टिंग हो रही है तो मामले भी अधिक मिल रहे हैं. अगर मुंबई से तुलना करें तो दिल्ली में टेस्ट ज़्यादा हो रहे हैं. मुझे लगता है यही एक वजह है. टेस्ट से पॉजिटिव लोगों का पता चल रहा है और उसी हिसाब से आगे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके.''
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डॉ. त्यागी कहते हैं, ''दिल्ली को कोरोना फ्री बनाने की दिशा में सही कदम उठाए जा रहे हैं. संक्रमित लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है. अलग-अलग जगह क्वारंटीन की व्यवस्था की जा रही है, लोग होम आइसोलेशन में हैं. साथ ही सरकार कोशिश कर रही है कि स्टेडियम, बैंक्वेट जैसी जगहों को अस्थाई तौर पर कोविड केयर सेंटर बना दिया जाए ताकि बेड की समस्या न हो.''
वो यह भी कहते हैं कि दिल्ली में जो लोग कोरोना संक्रमित हैं और होम आइसोलेशन में हैं उन्हें एहतियात बरतने की ज़रूरत है ताकि उनके जरिए किसी और तक संक्रमण न पहुंचे.
हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. जगदीश प्रसाद कहते हैं कि ज़्यादा टेस्टिंग की वजह से ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं यह कहना सही नहीं होगा.
बीबीसी से बातचीत में डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा, ''दिल्ली में कोरोना टेस्ट पहले भी होते थे, अब भी हो रहे हैं. लेकिन पहले अगर 10 टेस्ट में दो लोग पॉजिटिव आते थे, तो अब करीब 10 में से 6 लोग आ रहे हैं. तो आप कैसे कह सकते हैं कि टेस्ट बढ़े हैं इसलिए केस बढ़ रहे हैं. आप एक लाख लोगों में टेस्ट का औसत निकालिए. पहले अगर 10 हज़ार में से दो हज़ार आते थे, तो अब अगर 10 हज़ार में तीन हज़ार लोग संक्रमित मिल रहे हैं तो सोचने की ज़रूरत है. संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ी है, इसलिए ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं.''
वो कहते हैं कि दिल्ली में कोरोना मामलों की मॉनिटरिंग और सर्विलांस संतोषजनक नहीं है. दिल्ली में सर्विलांस बहुत ज़रूरी है और उसके बाद लोगों को आइसोलेट करना बेहद ज़रूरी है. लेकिन यह काम सही ढंग से नहीं हो रहा.

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केंद्र और दिल्ली के बीच मतभेद
हाल ही में दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोगों को होम आइसोलेशन में रखने को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच तकरार दिखी थी. उपराज्यपाल ने आदेश दिया था कि होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को कोविड केयर सेंटर या अस्पताल में भर्ती कराया जाए. दिल्ली सरकार ने इस फैसले का विरोध किया था. बाद में उपराज्यपाल का आदेश बदल दिया गया. हालांकि उपराज्यपाल ने अपने आदेश में कहा कि जो लोग कोरोना संक्रमित हैं और होम आइसोलेशन में हैं उन्हें पांच दिन में कोविड सेंटर रहना होगा. इसका भी दिल्ली सरकार ने विरोध किया और कहा कि इतने लोगों के लिए एंबुलेंस की सुविधा कैसे हो पाएगी.
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एक बार फिर से दिल्ली में कोरोना मरीज़ों के लिए पुराना नियम लागू होगा. इसके साथ ही पिछले छह दिन से चला आ रहा विवाद आज जा कर खत्म हुआ.
उन्होंने कहा, 'अगर किसी को कोरोना पॉजिटिव आता है तो वो घर में ही रहेंगे और एक मेडिकल टीम जाकर उनकी स्थिति का जायजा लेगी. अगर घर में पर्याप्त जगह है और स्वास्थ्य संबंधी कोई बड़ी परेशानी नहीं है तो मरीज़ घर में ही रह सकेंगे और वहीं इलाज होगा. यानी अगर आप होम आइसोलेशन में रहने के एलिजिबल हैं तो कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी घर में रह सकेंगे. बीते चार दिनों के लिए जो नई व्यवस्था लागू हुई थी वो अब बदल दी गई है.''
सिसोदिया ने बताया कि होम आइसोलेशन की व्यवस्था रहते हुए दिल्ली में करीब 30 हज़ार मरीज़ ठीक हुए हैं.
दिल्ली सरकार ने इस बीच केंद्र सरकार से मांग की है कि कोरोना के इलाज के लिए दिल्ली में सेना के डॉक्टर भी दिए जाएं. गृह मंत्रालय ने उनकी इस मांग को मान लिया है.
बीते सोमवार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कोरोना से लड़ाई में केंद्र सरकार से काफ़ी सहयोग मिल रहा है और यह वक़्त राजनीति का नहीं है. ये समय आपस में लड़ने का नहीं है.
दिल्ली में मरीज़ों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में बेड को लेकर भी सवाल उठे हैं हालांकि सरकार लगातार यह कहती रही है कि पर्याप्त इंतज़ाम किए जा रहे हैं और सरकार कोविड केयर सेंटर बनाकर इस समस्या से निपटने के प्रयास कर रही है.
फिलहाल दिल्ली के अस्पतालों में कुल 13218 बेड में 6957 बेड खाली है.
दिल्ली सरकार की आधिकारिक वेबसाइट में दिए आंकड़े बताते हैं कि कुल 738 बेड वेंटिलेटर की सुविधा वाले हैं इनमें से फिलहाल 254 खाली हैं.

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दिल्ली सरकार का 5-टी प्लान
अप्रैल महीने की शुरुआत में अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए '5-टी' प्लान तैयार किया था. इसमें टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, टीमवर्क और ट्रैकिंग के जरिए कोरोना को हराने की योजना बनाई गई. हालांकि करीब ढाई महीने बाद दिल्ली में संक्रमण के मामले मुंबई से अधिक हो गए हैं. मुंबई सबसे बड़ा हॉटस्पॉट माना जा रहा था.
दिल्ली में टेस्टिंग बेहतर हुई है लेकिन ट्रेसिंग और ट्रैकिंग को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं. साथ ही सर्विलांस को लेकर भी कहा जा रहा है कि इसके तरीके को बदलने की जरूरत है.
डॉ. जगदीश प्रसाद कहते हैं कि ''ऐसा नहीं है कि सर्विलांस का काम बिल्कुल नहीं हो रहा, लेकिन फिलहाल उनका फोकस कंटेनमेंट ज़ोन में है. कंटेनमेंट ज़ोन में तो संक्रमण पहले ही फैल चुका है. हमें सर्विलांस की ज़रूरत है उन इलाकों में ज़्यादा है जहां अब तक मामले नहीं सामने आए. वहां घर-घर जाकर स्क्रीनिंग हो ताकि वहां पर बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले आने या कंटेनमेंट ज़ोन बनने से पहले ही उन इलाकों को सुरक्षित किया जा सके.''
हर ज़िले में लागू हो ये प्लान
वो कहते हैं कि कंटेनमेंट ज़ोन के बजाय हमें कोशिश करनी चाहिए कि स्वस्थ लोगों की मॉनिटरिंग की जाए. ताकि उन्हें संक्रमण न हो. उन इलाकों को बचाया जाए. लोगों के बीच जागरूकता लाने की कोशिश की जाए, तभी संभव है कि संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है.
उन्होंने कहा, ''दिल्ली में दो करोड़ की आबादी है. यह कोई बहुत बड़ा आंकड़ा नहीं है. इतनी आबादी में बड़े आराम से चीज़ें लागू की जा सकती हैं. अगर सर्विलांस रखना है और मॉनिटरिंग करनी है तो हम अगर हर ज़िले में लोगों को 1000-1000 के समूहों में बांट दें तो मॉनिटर करना आसान होगा. वरना मुश्किलें होंगी.''
डॉ. जगदीश प्रसाद ने सार्वजनिक जगहों ख़ासकर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे बंद रखने की सलाह देते हैं. वो कहते हैं, ''मेडिकल के नज़रिए से देखें तो यह ठीक नहीं है. आस्था अपनी जगह है लेकिन संक्रमण बढ़ रहा है तो हमें इन जगहों को फिलहाल बंद रखना चाहिए. दुकान वालों को भी निर्देश सख्त देने चाहिए कि अगर एक वक़्त में एक से अधिक आदमी दुकान के अंदर मिले तो दुकान बंद करा दी जाएगी. सख़्ती बरतने की जरूरत है. सिर्फ़ क्वारंटीन करना समाधान नहीं है.''



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