कोरोना: चेन्नई की तरह दिल्ली-मुंबई भी एक और लॉकडाउन की ओर बढ़ रहे हैं?

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एक तरफ़ जब कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ-साथ देश के ज़्यादातर हिस्से लॉकडाउन से बाहर निकलते हुए दिख रहे थे, तो इसी बीच चेन्नई में शुक्रवार से एक बार लॉकडाउन लागू कर दिया गया.
शुक्रवार को चेन्नई में 1322 नए मामलों की पुष्टि के साथ ही इस महानगर में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 38 हज़ार से ज़्यादा हो गई है. दूसरी तरफ़ दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या भी शुक्रवार को 50 हज़ार पार कर गई है.
वहीं, मुंबई में शुक्रवार को कोविड-19 से संक्रमण के 1269 नए मामले दर्ज किए गए और यहां 114 लोगों की मौत हो गई. मुंबई महानगर पालिका के अनुसार इस महानगर में कोरोना वायरस से संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 64,068 हो गई है.
कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार तेज़ी के बाद तमिलनाडु में चेन्नई समेत तीन अन्य ज़िलों में फिर से लॉकडाउन लगा दिया गया है.
12 दिन का यह लॉकडाउन 30 जून तक के लिए है और इस दौरान सिर्फ़ ज़रूरी सेवाएं जारी रहेंगी. ज़रूरी सेवाओं के अलावा किराने की कुछ दुकानें भी खुली रहेंगी.
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई भारत का छठवां सबसे बड़ा शहर है. पूरे राज्य में कोविड-19 के 50 हज़ार से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 37 हज़ार अकेले तमिलनाडु से हैं.
कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर यहां अब तक 600 लोगों की मौत हो चुकी है यानी मृत्यु दर भारत के अन्य शहरों के मुकाबले कम है.
हालांकि इस बीच आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ चेन्नई में हुई कम से कम 200 मौतों को कोरोना संक्रमण से हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया था. इस रिपोर्ट के बाद शहर में मौतों के आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है.

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शहर छोड़कर निकले लोग
चेन्नई भारत का एकमात्र ऐसा शहर है जिसने संक्रमण मामले बढ़ने के बाद दोबारा लॉकडाउन लागू किया है. लॉकडाउन शुरू होने से एक दिन पहले हज़ारों लोग शहर छोड़कर चले गए.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लोग इतनी बड़ी संख्या में शहर छोड़कर निकले कि वाहनों की जांच वाले सभी एग्ज़िट पोस्ट्स पर कारों की वजह से 'जाम' लग गया था. 'द हिंदू' अख़बार के अनुसार उस दिन चेन्नई एयरपोर्ट पर पिछले कुछ दिनों के मुकाबले दोगुनी भीड़ थी.
इस वक़्त भारत में कोविड-19 संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या तीन लाख 50 हज़ार से ज़्यादा है. इसी के साथ भारत सबसे ज़्यादा संक्रमण मामलों वाले देशों की सूची में चौथे नंबर पर आ चुका है.
देश के हर राज्य हिस्से में रोज़ाना संक्रमण मामले बढ़ रहे हैं और तमिलनाडु सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक है.
पिछले महीने भारत ने लगातार बढ़ते मामलों के बावजूद लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील देना शुरू कर दिया था. भारत में लगाए गए लॉकडाउन को दुनिया के सबसे सख़्त लॉकडाउन में से एक माना जा रहा है.
भारत में मार्च के आख़िरी हफ़्ते में लॉकडाउन की शुरू हुई थी जब देश में संक्रमण के महज कुछ सौ मामले थे. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सख़्त लॉकडाउन की वजह से 37,000-78,000 लोगों की जानें बचाई जा सकी हैं.
लेकिन इस सख़्त लॉकडाउन की कीमत देश की अर्थव्यवस्था ने चुकाई है और लाखों प्रवासी मज़दूरों को शहर छोड़कर अपने गांव जाने पर मजबूर होना पड़ा. पैदल ही अपने घरों को जाते हज़ारों मज़दूरों ने लॉकडाउन का एक दूसरा पहलू पेश किया था.

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नए लॉकडाउन में क्या खुला है, क्या बंद?
किराने की दुकानें और पेट्रोल पंप कुछ घंटों के लिए खोले जाएंगे लेकिन यहां फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन अनिवार्य होगा.
आपातकालीन स्थिति को छोड़कर टैक्सी, ऑटो रिक्शा और निजी वाहनों को चलने की अनुमति नहीं होगी.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एडिपडी के पलानीस्वामी ने पिछले हफ़्ते लोगों को सलाह दी थी कि अगर कोई स्टोर उनके घर के दो किलोमीटर के दायरे में है तो वो वहां निजी वाहन से न जाएं.
अन्य निर्देश
- रेस्तरां बंद रहेंगे लेकिन खाने की होम डिलिवरी और पैक कराकर ले जाने की इजाज़त होगी.
- राज्य सरकार के दफ़्तर और बैंक 33 फ़ीसदी स्टाफ़ की मौजूदगी में खुले रहेंगे.
- अस्पताल, लैब और दवा की दुकानों जैसी ज़रूरी सेवाएं पहले की तरह चालू रहेंगी.

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