भारत-चीन झड़प: पिछले छह सालों में पड़ोसी मुल्कों के साथ कब-कब भिड़ी भारतीय फ़ौज

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आधिकारिक तौर पर भारत ने भारत-चीन के बीच विवाद में 20 सैनिकों के मारे जाने और कई के घायल होने की बात कही है.
दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच ये विवाद पाँच मई से चल रहा है और इस बाबत भारत और चीन के सैनिक अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई.
ये पहली बार नहीं हुआ है कि साल 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के बनने के बाद भारत और पड़ोसी मुल्कों की सेनाओं के बीच झड़पें हुई हों.
कई दफ़ा तो भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई के लिए दूसरे मुल्कों के भीतर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा भी किया है.
सर्जीकल स्ट्राइक का दावा

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नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद तक़रीबन साल भर में ही - 9 जून, 2015 को भारत ने पड़ोसी देश मयंमार के भीतर घुसकर उग्रवादी संगठन एनएससीएन-के तक़रीबन तीन दर्जन से अधिक सदस्यों को मार गिराने और उनके कम से कम दो कैंपो को पूरी तरह तबाह करने का दावा किया था.
नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड एक उग्रवादी संस्था है जो अलग नगालैंड देश की माँग करता रहा है.
सरकार के मुताबिक़ म्यांमार की सीमा में घुसकर की गई ये कार्रवाई एक फ़ौजी काफ़िले पर मणिपुर सूबे के चंदेल इलाक़े में किए गए हमले का जवाब था.
तत्कालीन सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने हमले के बाद कहा था, "ये एक बहुत ही ज़रूरी फ़ैसला था जो प्रधानमंत्री ने लिया था. ये बहुत ही साहसिक फ़ैसला था. इसमें हमारे स्पेशल दस्ते के जवानों ने दूसरे मुल्क के बहुत भीतर जाकर कार्रवाई की."
भारत की पहले सर्जीकल स्ट्राइक बताई गई इस घटना के बाद ट्वीटर पर #56inchRocks भी चला था. ये हैश टैग प्रधानमंत्री मोदी के हिम्मत और निर्भीकता को उजागर करने को था.

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हालांकि समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ म्यांमार ने उसकी सीमा के भीतर ऐसे किसी ऑपरेशन की बात से इनकार किया था और कहा था कि वो अपने इलाक़े का इस्तेमाल करने की इजाज़त किसी ऐसे समूह को नहीं देगा जो पड़ोसी मुल्क पर हमला करने का इरादा रखता हो.
भारत की तरफ़ से 'सर्जिकल स्ट्राइक' का दूसरा दावा अगले साल (सितंबर 2016) में आया जब ऐसी ही एक कार्रवाई पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में किए जाने की बात कही गई.
कहा गया कि ये हमला भारतीय कश्मीर के उरी (18 सितंबर) में भारतीय सेना के ठिकाने पर हुए फ़िदायीन हमले के जवाब में की गई थी. इस हमले में 18 फ़ौजियों की मौत हो गई थी. पाकिस्तानी कश्मीर के भीतर ये हमला उरी घटना के 11 दिनों बाद ही किया गया था.
तत्कालीन डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन जनरल दलबीर सिंह के मुताबिक़ भारत ने इस ऑपरेशन की ख़बर पाकिस्तान को दे दी थी, हालांकि भारत का इरादा आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की थी.
म्यांमार की तरह पाकिस्तान ने भी भारत के दावे को ख़ारिज किया और कहा कि भारतीय दस्ते ने नियंत्रण सीमा रेखा को पार नहीं किया था और वहां हुई झड़पों में दो पाकिस्तानी जवानों की मौत हो गई है जबकि नौ घायल हैं.
उसने आठ भारतीय जवानों के मारे जाने और एक को पकड़े जाने का दावा किया था.
भारत का दावा

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भारतीय सेना का कहना था कि पाकिस्तान सच को छुपाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि उसने एक सैनिक के पाकिस्तानी सीमा में भटक जाने की बात को क़बूल किया था. उसका कहना था कि उस जवान का इस ऑपरेशन से किसी तरह का संबंध नहीं था.
ख़बरों के मुताबिक़ भारत ने अपने दस्ते को नियंत्रण रेखा पर विमानों से उतारा जिसके बाद वो तीन किलोमीटर गए और भीमबेर, हॉट स्प्रिंग, केल और लीपा सेक्टर में कार्रवाई कर 38 उग्रवादियों और दो पाकिस्तानी फ़ौजियों को मार गिराया.
भारत का दावा था कि मारे जाने वालों में चरमपंथी और उनके 'हैंडलर' थे.
चार घंटे के इस ऑपरेशन में सात चरमपंथी ठिकानों को नष्ट करने का दावा भी भारतीय मीडिया में आया.
जानी मानी पत्रिका इकोनॉमिस्ट ने लिखा कि चश्मदीदों और अज्ञात अधिकारियों से बातचीत के बाद भारतीय और पाकिस्तानी पत्रकारों ने जो जानकारियां जुटाई हैं उसके मुताबिक़ ऐसा लगता है कि भारतीय कमांडो की एक छोटी टुकड़ी नियंत्रण रेखा के पार उन ठिकानों पर हमला करने गई थी जिनके बारे में समझा जाता है कि उनका इस्तेमाल इस्लामी लड़ाके कर रहे हैं. मारे जानेवालों की तादाद कोई दर्जन भर या उससे कम थी, मगर 38-50 के बीच नहीं जिसका दावा भारत ने शुरुआत में किया था. मारे जानेवालों में पाकिस्तानी फ़ौज का कोई व्यक्ति शामिल नहीं था. और चुंकि पाकिस्तानी सेना देश में किसी तरह के हो-हल्ले से बचना चाहती थी, इसलिए उसने पूरे मामले को ऐसे लिया जैसे कुछ हुआ ही न हो.
साल 2019 की 14 फ़रवरी को एक आत्मघाती हमलावर ने अद्धसैनिक बल सीआरपीएफ़ के क़ाफ़िले पर भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हमला किया जिसमें 46 जवानों की मौत हो गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है.
साल 2019 के आम चुनावों के पहले हुए इस हमले को कुछ हलक़ों में राजनीतिक नज़रिये से भी देखा गया और कहा गया कि इसका फ़ायदा केंद्र में मौजूद मोदी सरकार को मिलेगा.
भारत के अनुसार उसके लड़ाकू विमानों ने ख़ैबर पख़्तूनख्वाह के बालाकोट में चरमपंथी समूह के एक ठिकाने को तबाह कर दिया है.
पाकिस्तान का दावा

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पाकिस्तान ने इससे इनकार किया और पत्रकारों के एक समूह को हमले की जगह के क़रीब भी ले गया लेकिन उस कथित मदरसे के पास जाने से रोक दिया जहां दावे के मुताबिक़ भारतीय विमानों ने हमला किया था.
पाकिस्तानी फ़ौज के प्रेस अधिकारी मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने ट्वीट करके कहा कि भारतीय विमान मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर में घुसे थे लेकिन पाकिस्तानी विमानों के पीछा करने के बाद जल्दी में बालाकोट में बम गिराकर भाग लिए जिसमें किसी तरह की कोई बर्बादी नहीं हुई.
1971 के बाद ये पहली बार था कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह की कार्रवाई में लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया हो.
पाकिस्तान ने ऑपरेशन में शामिल एक भारतीय विमान को गिराकर उसके पॉयलट को अपने क़ब्ज़े में भी ले लिया गया था जिसे बाद में रिहा कर दिया गया.
हालांकि पिछले छह सालों के बीच भारत के कई दूसरे फ़ौजी ठिकाने जैसे पठानकोट एयरफ़ोर्स बेस पर भी हथियारबंद हमले हुए हैं और इस तरह की ख़बरें भी आती रही हैं कि ये पाकिस्तान की शह पर हुआ है लेकिन भारत की तरफ़ से किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं हुई है.
चीन के ख़िलाफ़, जिसके साथ भारत की झड़प बढ़कर कम से कम 20 भारतीय सैनिकों की मौत तक पहुंच गई है, भारत में हाल के सालों में मामला इतना बढ़ा नहीं है.
साल 2017 जून में डोकलाम में भारत और चीन के बीच तनाव पैदा हुआ था लेकिन बातचीत के बाद दोनों फ़ौजों ने अपने सैनिकों को वापस बुलाने की बात कही थी.
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