मणिपुर में भाजपा सरकार संकट में, कांग्रेस खेमे में नई उम्मीद

इमेज स्रोत, BBC/DILIP KUMAR SHARMA
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए गुवाहाटी से
मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के तीन विधायक पार्टी से इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए है. जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार विधायकों समेत कुल छह विधायकों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है.
इस तरह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीते तीन साल से प्रदेश में चल रही बीजेपी गठबंधन वाली सरकार संकट में आ गई है.
अपने तीन विधायकों के पार्टी छोड़ने की बात की पुष्टि करते भाजपा प्रवक्ता विजय चंद्र ने बीबीसी से कहा,"हमारे तीन विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.अब वे लोग मतदान करने के लिए योग्य नहीं रहेंगें. दरअसल 19 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होने है और तबतक यह उठापटक चलेगी."
एनपीपी के चार विधायकों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है, तो क्या ऐसी स्थिति में आपकी सरकार बच पाएगी?
इस सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने कहा,"अभी इन तमाम बातों पर कुछ नहीं कहा जा सकता. जो भी संकट सामने आया है पार्टी स्तर पर बातचीत हो रही है और गुरूवार शाम तक तस्वीर साफ हो जानी चाहिए."
60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में भाजपा गठबंधन के पास कुल 32 विधायकों का समर्थन था. लेकिन अब 9 विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है जिनमें तृणमूल कांग्रेस का एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है.
भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक सुभाष चंद्र सिंह, टीटी हाओकिप और सैमुअल जेंदाई मुख्यमंत्री से बेहद नाराज़ थे.
भाजपा नेता विजय चंद्र कहते है," मणिपुर में केवल 12 लोगों का मंत्रिमंडल बनाया जा सकता है. इतने छोटे मंत्रिमंडल में सभी विधायकों को मंत्री बनाना कैसे संभव हो सकता है. ऐसी में सबकी नाराज़गी को दूर नहीं किया जा सकता. जबकि हमने एक उप-मुख्यमंत्री समेत एनपीपी के चारों विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया था, फिर भी वे खुश नहीं थे. असल में एनपीपी हमेशा समस्या खड़ी करने वाली पार्टी रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में भी इस पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ काम किया था."
ये भी पढ़िए

इमेज स्रोत, BBC/DILIP KUMAR SHARMA
कांग्रेस करेगी सरकार बनाने का दावा
मणिपुर में कांग्रेस विश्वास मत के लिए विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने की मांग के साथ राज्यपाल से मिलने के लिए तैयारी कर रही है.
कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा,"बीजेपी के नेतृत्व वाली वर्तमान राज्य सरकार ने अपने गठबंधन सहयोगियों का समर्थन खो दिया है. हमने एक धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील मोर्चा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है. हम गुरूवार को एक साथ राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे."
दरअसल तकनीकी तौर पर देखा जाए तो 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में फ़िलहाल सदस्यों की संख्या घटकर 49 रह गई है.
कांग्रेस के जिन सात विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का समर्थन किया था, उन सभी पर अयोग्यता के मामले चल रहे हैं और हाल ही में हाई कोर्ट ने उन विधायकों को विधानसभा में प्रवेश करने से रोक दिया है.
इससे पहले कांग्रेस के एक और विधायक को अयोग्य घोषित किया गया था. इस तरह कांग्रेस के कुल आठ विधायकों को पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है और बुधवार को बीजेपी के जिन तीन विधायकों ने इस्तीफ़ा दिया था उनको भी अयोग्य घोषित किया जा चुका है.
मणिपुर में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 28 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी लेकिन 21 सीटें जीतने वाली बीजेपी सहयोगी दलों के समर्थन से राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाने में सफल रही.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















