कोरोना: पाकिस्तान की यूपी से तुलना कितना सहीः फ़ैक्ट चेक

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- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कोरोना महामारी के दौरान भारत में कई राज्यों के कोरोना से निपटने के मॉडलों की चर्चा हो रही है. कभी राजस्थान का भीलवाड़ा मॉडल सुर्ख़ियों में रहा तो कभी उत्तर प्रदेश के आगरा मॉडल की चर्चा रही.
इसी कड़ी में अब उत्तर प्रदेश की चर्चा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हो रही है.
पाकिस्तान के एक पत्रकार और डॉन अख़बार के रेज़िडेंट एडिटर और डॉन चैनल के एंकर फ़हद हुसैन ने उत्तर प्रदेश के कोरोना से निपटने के उपाय की तारीफ़ों वाला एक ट्विट किया है.
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इस ट्विट में उन्होंने एक इंफ़ोग्राफ़िक के ज़रिए उत्तर प्रदेश और पाकिस्तान की जनसंख्या, घनत्व और कुल कोरोना मामले की तुलनात्मक तस्वीर पेश की है.
पाकिस्तान की नाकामियों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘’ इस ग्राफ़ को ध्यान से देखिए, पाकिस्तान और भारतीय राज्य यूपी की मृत्युदर की तुलना की गई है. दोनों ही जगहों की आबादी, साक्षरता दर एक जैसी है. पाकिस्तान का जनसंख्या घनत्व कम और प्रति व्यक्ति जीडीपी यूपी से अधिक है. यूपी में लॉकडाउन को लेकर कड़ाई बरती गई और हमारे यहां ऐसा नहीं हुआ, अब ख़ुद मौत की दरों का अंतर देखें.‘’
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इस दावे और ग्राफ़ की सोशल मीडिया और मीडिया में काफ़ी चर्चा है. पत्रकार फ़हद ने कुल पाँच स्तर पर दावे दिए हैं. जनसंख्या, प्रति किलोमीटर वर्ग जनसंख्या घनत्व, 45 से अधिक उम्र की आबादी, प्रति कैपिटा जीडीपी और शिक्षा दर.
हमने हर स्तर पर इस दावे की पड़ताल की और साथ ही ये भी जानने की कोशिश की कि पाकिस्तान और यूपी में कोरोना टेस्टिंग को कितनी वरीयता दी जा रही है.
दावा 1- फ़हद का दावा है कि दोनों ही देश जनसंख्या और डेमोग्राफ़ी के आधार पर समान हैं. उनके दावे के मुताबिक़ पाकिस्तान की जनसंख्या 208 मिलियन है यानी 20.8 करोड़ है, वहीं उत्तर प्रदेश की आबादी 225 मिलियन यानी 22.5 करोड़ है.
पड़तालः पाकिस्तान में 1998 के बाद सीधे 19 साल बाद 2017 में जनगणना हुई. इस छठे जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक़ पाकिस्तान की कुल आबादी 22.7 करोड़ है. वहीं भारत में हर 10 साल में जनगणना होती है. साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक़ 19.9 करोड़ है.
दावा 2- दूसरा दावा प्रति किलोमीटर घनत्व को लेकर किया गया है. कहा गया है कि पाकिस्तान में प्रति किलोमीटर में 275 लोग और उत्तर प्रदेश में 995 लोग रह रहे हैं.
पड़तालःवर्ल्ड बैंक के मुताबिक़ साल 2018 में पाकिस्तान के प्रति वर्ग किलोमीटर का घनत्व 275 ही है लेकिन चूंकि यहां तुलना भारत के एक राज्य से की गई है तो राज्य स्तर के डेटा की प्रमाणिक जानकारी जनगणना के आंकड़ों से ही पायी जा सकती है. ऐसे में हमने उत्तर प्रदेश की जनसंख्या घनत्व की जानकारी 2011 के जनगणना के आंकड़ों से जुटाई. जिसके मुताबिक़ यूपी में प्रति वर्ग किलोमीटर 828 लोग रहते हैं.

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दावा 3- प्रति व्यक्ति जीडीपी में पाकिस्तान आगे
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक़ पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति जीडीपी 1482 अमरीकी डॉलर है.
वहीं उत्तर प्रदेश भारत के पाँच सबसे कम जीडीपी प्रति व्यक्ति वाले राज्य की श्रेणी में आता है. जो 68,792 रुपये यानी 911 अमरीकी डॉलर है.
हालांकि अगर पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति जीडीपी की तुलना भारत से की जाए तो ये आंकड़ा 11,317 अमरीकी डॉलर है. जो पाकिस्तान से लगभग 10 गुना ज़्यादा है.
पाकिस्तान और उत्तर प्रदेश के आंकड़ों की तुलना में तो बड़ा अंतर नज़र नहीं आता लेकिन अब इनकी कोरोना संक्रमण और टेस्ट के मामले में तुलना करते हैं.
यूपी बनाम पाकिस्तानः कोरोना वायरस टेस्ट
चूंकि पत्रकार ने दोनों देशों की तुलना कोरोना वायरस के संदर्भ में की है इसलिए इन्हें महामारी के लिहाज़ से देखते हैं.
पाकिस्तान में कोरोना के कुल मामले 1 लाख 36 हज़ार तक पहुँच गए हैं और मरने वालों की संख्या 2,067 तक जा पहुँची हैं
उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां 7 जून तक कुल कोरोना के मामले 10,536 हैं और 275 लोगों की इस संक्रमण से अब तक मौत हो चुकी है. दावा यही किया जा रहा है कि कैसे लगभग एक जैसी आबादी वाली जगहों पर कोरोना के मामले में इतना बड़ा अंतर आया.

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सबसे अहम बात है टेस्टिंग. पाकिस्तान के आधिकारिक आकड़ों के मुताबिक़ वहां अब तक कुल 705,833 टेस्ट किए गए हैं वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 7 जून को जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़ यहां अब तक 3,60,258 सैंपल ही टेस्ट के लिए गए हैं. जिनमें से 10,536 कोरोना पॉज़िटिव, 3,46,684 सैंपल नेगेटिव और 3038 सैंपल के टेस्ट के नतीजों का इंतज़ार है.
अब इन आंकड़ों को प्रति 10 लाख (मिलियन) के संदर्भ में देखें तो उत्तर प्रदेश में प्रति 10 लाख आबादी पर 1896 टेस्ट किए गए हैं. वहीं पाकिस्तान में प्रति 10 लाख आबादी पर यह संख्या 3,329 है.
एक बात जो बिल्कुल साफ़ है वो ये कि पाकिस्तान में कुल कोरोना के जितने टेस्ट अब तक किए गए हैं, उत्तर प्रदेश में अब तक उसके मुक़ाबले लगभग 50 फ़ीसदी कम ही टेस्ट किए गए हैं.
ऐसे में उत्तर प्रदेश और पाकिस्तान की तुलना कोरोना मामले में करना उचित नहीं लगता.




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