अस्पतालों के चक्कर लगाती रही गर्भवती महिला, किसी ने नहीं किया भर्ती, एंबुलेंस में मौत

नीलम की अंतिम यात्रा

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

तीस वर्षीय गर्भवती महिला के परिजन नोएडा और ग़ाज़ियाबाद के अस्पतालों में उसे लेकर घंटों घूमते रहे, आठ अस्पतालों के चक्कर लगाए, मिन्नतें कीं लेकिन अस्पतालों ने महिला को भर्ती नहीं किया.

आख़िरकार महिला ने अपने गर्भस्थ शिशु के साथ एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. यह पूरी घटना राजधानी दिल्ली से लगे उत्तर प्रदेश के दो सबसे हाई प्रोफ़ाइल कहे जाने वाले ज़िलों में हुई है. इस पूरी घटना का संज्ञान लेते हुए नोएडा के डीएम सुहास एलवाई ने जांच के आदेश दिए हैं.

ग़ाज़ियाबाद ज़िले की खोड़ा कॉलोनी निवासी नीलम कुमारी आठ महीने की गर्भवती थीं. तबीयत ख़राब होने की वजह से नीलम कुमारी के पति ब्रजेंद्र अपने भाई के साथ अस्पताल ले जाने लगे.

मृतका के जेठ (पति के बड़े भाई) शैलेंद्र कुमार ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार को सुबह छह बजे से लेकर शाम साढ़े सात बजे तक वो लोग अस्पताल दर अस्पताल घूमते रहे लेकिन कहीं भी उसे भर्ती नहीं किया गया.

शैलेंद्र बताते हैं, "मैं ऑटो चलाता हूं. ऑटो पर बैठाकर हम लोग पहले ईएसआईसी अस्पताल ले गए लेकिन वहां से उसे सेक्टर तीस स्थित ज़िला अस्पताल में रेफ़र कर दिया गया. ज़िला अस्पताल ने यह कहते हुए भर्ती करने से मना कर दिया कि हम लोग कंटेनमेंट ज़ोन से आ रहे हैं इसलिए वो भर्ती नहीं कर सकते हैं. इसके बाद हम लोग नोएडा सेक्टर 51 स्थित शिवालिक हॉस्पिटल ले गए जहां उसका पहले भी इलाज हुआ था. लेकिन उन लोगों ने कहा कि मरीज की हालत ज़्यादा गंभीर है इसलिए किसी बड़े अस्पताल में ले जाइए. फिर हम फ़ोर्टिस अस्पताल ले गए."

नीलम

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इमेज कैप्शन, नीलम अपने पति और बच्चे के साथ

मृतका नीलम के पति ब्रजेंद्र एक मीडिया हाउस के मेंटिनेंस विभाग में काम करते हैं और नीलम भी किसी प्राइवेट कंपनी में काम करती थीं. नीलम के पास ईएसआई कार्ड भी था.

शैलेंद्र कुमार ने बताया कि ईएसआईसी अस्पताल में कुछ देर तक नीलम को ऑक्सीजन दी गई लेकिन उसके बाद उन्होंने इलाज की सुविधा न होने का हवाला देकर ज़िला अस्पताल भेज दिया लेकिन ज़िला अस्पताल में नीलम को किसी डॉक्टर ने या किसी अन्य स्टाफ़ ने देखा तक नहीं.

शैलेंद्र कहते हैं कि फ़ोर्टिस अस्पताल वालों ने यह कहकर उन्हें मना कर दिया कि उनके यहां इलाज का ख़र्च बहुत ज़्यादा आएगा जिसे आपलोग दे नहीं सकते हैं. शैलेंद्र बताते हैं, "फ़ोर्टिस की डॉक्टर ने कहा कि वेंटिलेटर पर डाल देंगे तो पांच छह लाख रुपये का बिल आएगा. आप लोग पैसा दे नहीं पाओगे और फिर झगड़ा करोगे. मैंने उनसे कहा कि आप भर्ती कर लीजिए, हम जैसे भी संभव होगा, बिल चुकाएंगे लेकिन उन लोगों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया."

फ़ोर्टिस अस्पताल के बाहर शैलेंद्र कुमार ने 112 नंबर पर पुलिस को भी फ़ोन किया. वो बताते हैं कि पुलिस वाले आए और उन्होंने भी काफ़ी कोशिश की कि मरीज भर्ती हो जाए लेकिन अस्पतालों ने किसी की नहीं सुनी. हालांकि फ़ोर्टिस अस्पताल के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन विभाग के प्रमुख अजेय महराज इस आरोप को सिरे से ख़ारिज करते हैं.

बीबीसी से बातचीत में अजेय महराज कहते हैं, "हमारे अस्पताल में मरीज को क़रीब 11 बजे सुबह गंभीर हालत में लाया गया था. आईसीयू के आइसोलेशन वॉर्ड में कमरा उपलब्ध नहीं था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल के वेटिंग एरिया में ही ऑक्सीजन और नेबुलाइज़र उपलब्ध कराई. मरीज़ के पति को डॉक्टरों ने समझाया कि उन्हें तत्काल किसी दूसरे अस्पताल में लाइफ़ सपोर्ट उपकरणों वाली एसीएलएस एंबुलेंस में ले जाएं. मरीज के पति ने इसके लिए मना कर दिया और ऑटो रिक्शा से ही वे लोग मरीज को अस्पताल से बाहर लेते गए."

वहीं शैलेंद्र बताते हैं कि उसके बाद भी उन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और जेपी, शारदा अस्पताल और जिम्स में ले गए लेकिन किसी ने भी नीलम को भर्ती नहीं किया.

शैलेंद्र कुमार बताते हैं कि शारदा अस्पताल में हमें कहा गया कि पहले कोविड-19 टेस्ट कराना पड़ेगा.

वो कहते हैं, "हम टेस्ट के लिए तैयार हो गए. हमसे टेस्ट के लिए 4500 रुपये लिए गए लेकिन उसके बाद हमें जिम्स अस्पताल रेफ़र कर दिया गया. अब नीलम की तबीयत बहुत ज़्यादा ख़राब होती जा रही थी. 108 नंबर पर फ़ोन करके एंबुलेंस बुलाई गई लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली. उसके बाद हमने एक प्राइवेट ऐंबुलेंस बुलाई और उसके ऑक्सीजन सपोर्ट पर जिम्स अस्पताल लेकर गए लेकिन वहां भी खाली बेड नहीं मिले."

नीलम के परिजनों को शारदा अस्पताल इसलिए रेफ़र किया गया क्योंकि वहां कोरोना संक्रमित लोगों को भर्ती किया जाता है. हालांकि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे लेकिन अस्पतालों ने बिना डॉक्टरों के देखे ही ये निर्णय ले लिया कि मरीज कोरोना संक्रमित हो सकता है.

वीडियो कैप्शन, केजरीवाल बोले, सारे मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं

शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि अभी कुछ दिन पहले ही नीलम सेक्टर 51 स्थित शिवालिक अस्पताल में पांच दिन तक भर्ती रही लेकिन उस अस्पताल ने भी कोराना संदिग्ध मानते हुए भर्ती करने से मना कर दिया.

वो कहते हैं, "31 मई से लेकर चार जून तक वह शिवालिक में भर्ती रही. इस दौरान उसका कोई कोरोना परीक्षण नहीं किया गया. हज़ारों रुपये अस्पताल ने ले भी लिए और जब दोबारा बीमार पड़ी तो कोरोना का बहाना बनाकर अस्पताल में भर्ती करने से ही मना कर दिया."

इस दौरान नीलम के परिजन उन्हें लेकर वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल भी ले गए और हार कर दोबारा जिम्स अस्पताल ले गए. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही नीलम ने दम तोड़ दिया.

शैलेंद्र कुमार रोते हुए कहते हैं, "इन अस्पतालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. हम तो बस यह चाहते हैं कि जैसा हमारे साथ हुआ, वैसा किसी दूसरे के साथ न हो."

नीलम का एक पांच साल का बेटा है. नौ जून को उसका जन्म दिन है. पूछ रहा है कि "मम्मी अस्पताल से कब आएंगी?"

शैलेंद्र कुमार अपने भाई के साथ नीलम को लेकर जिन-जिन अस्पतालों में भटकते रहे, उन अस्पतालों के पास इस सवाल के कोई जवाब नहीं हैं कि उन्होंने मरीज को भर्ती क्यों नहीं किया. कई अस्पतालों से हमने उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिल पाया.

एंबुलेंस

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गौतमबुद्धनगर के ज़िलाधिकारी सुहास एलवाई ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई है. उन्होंने अपर ज़िलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मुनींद्र नाथ उपाध्याय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर दीपक ओहरी को इसकी जांच सौंपी है.

शैलेंद्र कुमार को इस बात की जानकारी है कि डीएम ने जांच कमेटी बनाई है लेकिन वो चाहते हैं कि उन लोगों से इस बारे में पूरी जानकारी ली जाए.

वो कहते हैं, "कुछ जगहों पर ख़बर आ रही है कि अस्पतालों को इस बारे में जानकारी नहीं है. हमसे पूछा जाए तो हम बताएंगे कि इन अस्पतालों से हमें क्या जवाब मिला और किस तरीक़े से मिला. हर अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा लगा होगा, उससे पता चल जाएगा कि हम यहां आए थे और हमने कितनी मिन्नतें कीं कि मरीज़ मर जाएगा, प्लीज़ भर्ती कर लो."

नोएडा के अस्पतालों में लापरवाही के इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं. पिछले दिनों एक व्यक्ति अपने नवजात शिशु को लेकर ग्रेटर नोएडा और नोएडा के अस्पतालों में भटकता रहा लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया. बाद में बच्चे की मौत हो गई.

एक अन्य मामले में डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने अस्पताल के बाहर एक बच्ची को जन्म दिया लेकिन इलाज न होने के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई. इन सभी मामलों की चल रही है.

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सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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