कोविड-19: महिला पुलिसकर्मी जो करती हैं परायों का अंतिम संस्कार
इमेज कैप्शन, पुलिस ऑफिसर संध्या शिलवंत....में
Author, सुशीला सिंह
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
“मैडम ये जो वर्दी है ना ये बहुत ताक़त देती है.”
ये आपको किसी फिल्म का डॉयलाग ही लगेगा लेकिन जब आप संध्या शिलवंत से बात करने लगते हैं तो अपने आप विश्वास होने लग जाता है कि वो न केवल दिलेर हैं बल्कि एक सकारात्मक सोच वाली महिला भी हैं.
मुंबई पुलिस में नायक के पद पर कार्यरत संध्या शिलवंत हाल के दिनों में खूब प्रशंसा बटोर रहीं हैं.
राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी उनकी तारीफ़ करते हुए ट्वीट किया, ''शाहूनगर पुलिस स्टेशन की कॉन्स्टेबल संध्या शिलवंत ने एक दिन में चार लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया. आज तक इस तरह से उन्होंने छह लोगों के अंतिम संस्कार किए हैं. अगर आपके मन में सोशल कमिटमेंट हो तो हर तरह के भय के दरवाज़े बंद हो जाते हैं''- उनके ये शब्द सिर्फ़ पुलिस विभाग के लिए ही नहीं सभी के लिए प्रेरणादायक हैं.
दरअसल, संध्या शाहू नगर पुलिस थाने में एक्सिडेंटल डेथ रिपोर्ट या ADR का काम संभालती हैं.
एक दिन में चार शव का अंतिम संस्कार
कोविड-19 के दौर में उन्होंने एक दिन में चार शवों का अंतिम संस्कार किया जिसमें से एक कोरोना पॉजिटिव पाया गया था.
वे बताती हैं कि 14 मई के दिन चार शव और 24 अप्रैल को 2 शव का मैंने अंतिम संस्कार किया और 26 मई को दो और शवों का करूंगी. इन शवों का अंतिम संस्कार ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना वायरस का पूरा देश सामना कर रहा है.
वे गृह मंत्री की तारीफ़ के लिए उनका आभार प्रकट करती हैं और हंसते हुए कहती हैं, “आपको लगेगा कि मेरी प्रशंसा हो रही है इसलिए मैं ऐसा कह रही हूं पर ये मेरी ड्यूटी है और समाज के प्रति मेरी ज़िम्मेदारी भी है जो निभानी पड़ती है. मैं अपने विचारों को सकारात्मक रखती हूं. बस!”
मैं जिस विभाग में हूं इसके लिए मुझे लोकमान्य तिलक अस्पताल जाना ही पड़ता है. वहां हर तरह के केस आते हैं जिसमें कोविड के भी होते हैं और संक्रमित होने का डर रहता है.
इमेज कैप्शन, पुलिस ऑफिसर संध्या शिलवंत
संध्या बताती हैं कि महाराष्ट्र में केस बढ़े हैं. ऐसे में हम पुलिसकर्मियों के भी टेस्ट करवाए गए जिसमें कई पुलिसकर्मियों में टेस्ट पॉजिटिव आया है और जब मेरा टेस्ट हुआ तो वो निगेटिव आया. मैंने दिमाग़ में आने ही नहीं दिया कि मुझे कोरोना हो सकता है.
अब जब पुलिसकर्मियों में मामले सामने आ रहे हैं, इससे स्टाफ़ की कमी भी हो रही है ऐसे में अगर मैं डर जाऊंगी और ऑफ़िस आना बंद कर दूंगी तो कैसे चलेगा?
जब मैंने कहा कि आपके बच्चे छोटे हैं तो संध्या ने कहा कि वो अपने बच्चों से अपने काम के बारे में कोई बात नहीं करतीं और जब मैंने पूछा कि अख़बारों में तुम्हारी फोटो आई तो तुम्हारी 13 साल की बेटी को पता ही चल गया होगा कि जिन चार शवों का अंतिम संस्कार तुमने किया था उसमें से एक कोविड पोजिटिव था. इसके जवाब में संध्या ने कहा कि बेटी ने उन्हें ''कांग्रेट्स'' कहा.
वे बताती हैं कि उनके पिता और ससुर दोनों पुलिस में काम कर चुके हैं इसलिए उनकी मां और सास भी उनके काम को समझती हैं. क्योंकि ये कोविड का दौर हैं तो घर जाने के बाद साफ़ सफ़ाई का भी विशेष ख्याल रखती हूं.
संध्या जानकारी देती हैं, ''मैं दो साल से एडीआर का काम संभाल रही हूं. अब तक करीब 20 शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी हूं. मेरे लिए ये एक पुण्य का काम है. शायद पिछले जन्म का कुछ होता है तभी आपको ये सौभाग्य मिलता है. नहीं तो जिन लोगों का कोई नहीं होता आप उनका अंतिम संस्कार कर रहे हैं जो किसी पुण्य के काम से कम नहीं होता.''
एडीआर विभाग में कार्यरत व्यक्ति का काम लापता, गुमशुदा या अज्ञात लोगों की मौत हो जाने के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के साथ शुरु हो जाता है. संदिग्ध परिस्थिति में मौत होने से कई बार शरीर के अंगों को फोरेंसिक लेबोरेटरी भेजा जाता है. संध्या बताती है कि उनका काम फेफड़े, हार्ट जैसे अंगों को लेबोरेटरी तक ले जाने का होता है. जांच के बाद वे फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट अधिकारियों के समक्ष सौंपती हैं. इस बीच कई बार मृत के परिजन आ जाते हैं और शव ले जाते हैं.
इमेज कैप्शन, पुलिस ऑफिसर संध्या शिलवंत
संध्या के मुताबिक जिन मृतकों के शव को लेने कोई नहीं आता उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है. लेकिन कोविड-19 के कारण हमें तुरंत शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए कहा जा रहा है लेकिन कई केस में शव हम लंबे समय तक भी रखते है जहां जांच की ज़रुरत होती है.
वो कहती हैं कि वो अपने रिश्तेदारों की मौत के दौरान कभी श्मशान घाट नहीं गई क्योंकि हिंदू समाज में महिलाएं श्मशान जाती भी नहीं है लेकिन ''अब ये मेरी ड्यूटी है.''
जहां कोविड-19 के दौरान काम कर रहे फ्रंटलाइन वर्कर की प्रशंसा हो रही थी वहीं ख़बरें ऐसी भी आईं कि कुछ मामलों में परिवारों ने कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति का शव लेने से इंकार कर दिया या उनको अपने इलाक़े में दफ़नाने का विरोध भी किया.
इसमें तमिलनाडु के एक डॉक्टर साइमन हरक्यूलिस का मामला मीडिया में काफ़ी उछला भी था. जिनके शव को दफ़नाने आई एंबुलेंस पर इलाके में रह रहे लोगों ने हमला कर दिया और फिर पुलिस सुरक्षा में उनका अंतिम संस्कार दूसरे इलाक़े में हुआ था. वहीं संध्या शिलवंत जैसे लोग भी हैं जिनके लिए सबसे पहले फर्ज़ है जिससे वे किसी भी हाल में गुरेज़ नहीं करना चाहते.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.