नेपाल ने कहा, भारत के सेना प्रमुख ने हमारे इतिहास का अपमान किया -प्रेस रिव्यू

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नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल ने कहा है कि लिपुलेख विवाद को लेकर भारत के सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरावने का बयान 'नेपाल के इतिहास का अपमान' है.
हाल में जनरल नरावने ने कहा था कि "नेपाल किसी और के इशारे पर" धारचुला से लिपुलेख सड़क बनाने की भारत की कोशिश का विरोध कर रहा है.
अख़बार 'द इकोनॉमिक टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार 22 मई को नेपाली अख़बार 'द राइज़िंग नेपाल' को दिए एक साक्षात्कर में ईश्वर पोखरेल ने कहा कि भारतीय आर्मी प्रमुख ने अपने बयान में नेपाल के सामाजिक रूपरेखा और आज़ादी को नज़रअंदाज़ किया है.
उन्होंने कहा, "ये अपमानजनक बयान है. उन्होंने हमारे इतिहास, हमारी सामाजिक रूपरेखा और आज़ादी का अपमान किया है. उन्होंने उन नेपाली गोरखाओं का अपमान किया है जो भारत को रक्षा में अपनी जान दांव पर लगा देते हैं. उनके लिए अब गोरखा सुरक्षाबलों से सामने आना मुश्किल होना चाहिए."
इसी साल मई में भारत सरकार ने उत्तराखंड के धारचुला से लिपुलेख तक सड़क निर्माण कार्य का पूरा किया है. ये सड़क पिथौरागढ़-तवाघाट-घाटियाबागढ़ रूट में घाटियाबागढ़ से शुरू होकर लिपुलेख दर्रे पर ख़त्म होती है जो कैलाश मानसरोवर का प्रवेश द्वार है. साथ ही ये सड़क भारत को चीन से भी जोड़ती है.
नेपाल का दावा है कि लिपुलेख दर्रा उसका इलाक़ा है. हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि इस सड़क को लेकर कोई विवाद नहीं है.

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फिर बढ़ा भारत-चीन सीमा विवाद
लद्दाख में भारत-चीन का सीमा विवाद नया रूप लेता हुआ दिख रहा है.
'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार सीमा के विवादित हिस्से के पास चीन की तरफ़ से 5000 सैनिकों की तैनाती की गई है.
अख़बार लिखता है कि भारत ने भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है.
हाल के दिनों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चार जगहों पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई है. इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सैनिक कमांडरों के बीच वार्ता भी चल रही है जिनमें एक मीटिंग सोमवार को हुई थी.
अख़बार के मुताबिक़ सोमवार को हुई मीटिंग बेनतीजा रही. अधिकारियों के हवाले से अख़बार ने लिखा है, "चीन ने अपनी तरफ़ से सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है. लगभग 5000 सैनिक चीन की तरफ़ से तैनात हो सकते हैं. चीन के सैनिक न केवल विवाद वाली जगहों पर तैनात हैं बल्कि वे फैले हुए हैं."

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मंत्री के क्वारंटीन न जाने पर विवाद, सरकार ने बदला नियम
कर्नाटक सरकार ने बाहर से आने वाले लोगों के लिए क्वारंटीन अनिवार्य कर रखा है.
लेकिन दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचे बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा क्वारंटीन में नहीं रहे जिससे अब विवाद हो रहा है.
'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाद में गौड़ा ने कहा कि ये नियम उन लोगों के लिए नहीं है जो महत्वपूर्ण पदों पर हैं.
कर्नाटक सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने भी एक बयान में कहा है कि उन्हें केंद्रीय मंत्री के तौर पर क्वारंटीन नियम से छूट है.
बाद में जारी एक संशोधन में राज्य सरकार ने कहा है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार में मंत्री और ड्यूटी की वजह से यात्रा कर रहे अहम अधिकारियों को क्वारंटीन नियमों से छूट है.

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मध्यप्रदेश के पूर्व कांग्रेस विधायक का अजीबोगरीब बयान
मध्यप्रदेश में 24 सीटों के लिए उपचुनाव होने वाले हैं. अब तक उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन प्रदेश में कांग्रेस के एक पूर्व विधायक के बयान के कारण बीजेपी के लिए अजीबोगरीब स्थिति खड़ी हो गई है.
अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक ख़बर के अनुसार करेरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे जसवंत जाटव ने कहा है कि उपचुनाव पूर्व कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में लड़ा जाएगा.
अख़बार के अनुसार जाटव ने 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में ग्वालियर-चंबा इलाक़े में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय ज्योतिरादित्य सिंधिया को देते हुए कहा, "इस इलाक़े में शिवराज सिंह चौहान को अगर किसी ने चुनौती दी है वो हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया. इससे पहले सिंधिया ने अकेले दम पर कई सीटें जीती हैं लेकिन इस बार वो और चौहान एक मंच पर होंगे."
इसी साल मार्च में मध्यप्रदेश में 22 कांग्रेस विधायकों के बाग़ी होने के बाद कमल नाथ सरकार गिर गई थी. इन बाग़ी नेताओं का नेतृत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया कर रहे थे. जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. फिलहाल वो बीजेपी की तरफ से राज्यसभा के मेंबर हैं.
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