अंफन तूफ़ान का असर, कोलकाता समेत कई इलाक़ों में भारी बारिश

बंगाल

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इमेज कैप्शन, तूफ़ान के कारण तटबंधों के ऊपर आती समुद्री लहरें

बंगाल की खाड़ी से उठने वाला चक्रवाती तूफ़ान अंफन के कारण भारत और बांग्लादेश के तटीय इलाक़ों से बड़ी संख्या में लोगों को हटाया गया है.

कोलकाता के स्थानीय पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी ने बताया है कि पश्चिम बंगाल में अंफन तूफान के असर से राजधानी कोलकाता समेत सात ज़िलों में तेज़ हवाओं के साथ भारी बारिश शुरू हो गई है. तटवर्ती इलाक़ों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. दीघा में समुद्र लहरें ऊंची उठ रही हैं. पानी तटबंध पार कर सड़कों पर आ रहा है.

पश्चिम बंगाल में ज़्यादातर दुकानें और बाज़ार बंद हैं. राज्य के सात ज़िलों में तूफ़ान के असर का अंदेशा है. तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गया है.सुंदरबन में 185 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से तूफ़ान के ज़मीन पर टकराने का अंदेशा है. हावड़ा और सियालदह स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों के पहियों को मोटी जंजीरों से पटरियों के साथ बांधा गया है ताकि वे तूफ़ान से आगे-पीछे नहीं बढ़ें. श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की आवाजाही बंद है. दक्षिण-पूर्वी रेलवे ने भुवनेश्वर-दिल्ली के बीच चलने वाली कुछ ट्रेन का रूट बदला.

ऐसा अनुमान है कि भारत और बांग्लादेश की सीमाओं पर यह चक्रवाती तूफ़ान बुधवार को दस्तक देगा. पहले ही कोरोना महामारी से जूझ रहे ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए तूफ़ान ने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है.

बंगाल की खड़ी में बना चक्रवाती तूफ़ान 'अंफन' सोमवार दोपहर बाद और गहराकर 'सुपर साइक्लोन' में तब्दील हो गया जिसकी वजह से तटवर्ती इलाक़ों में रहने वाले लाखों लोगों को वहाँ से निकाला गया है.अक्टूबर 1999 के बाद यह पहला मौक़ा है जब बंगाल की खाड़ी में कोई 'सुपर साइक्लोन' बना हो.

कोलकाता

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि 20 से अधिक राहत दलों को तैनात किया गया है जबकि कई टीमों को वक़्त आने पर उतारा जाएगा.

कोरोना वायरस महामारी के कारण दोनों देशों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सरकारी कर्मचारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

भारतीय आपदा प्रबंधन के अधिकारी एस.जी. राय ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था, "लोगों को उनके घरों से निकालने के लिए हमारे पास बस छह घंटे का समय है और हमें सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का भी पालन करना है."

मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि अंफन दशक का सबसे बड़ा तूफ़ान है. ऐसा अनुमान है कि यह 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तट पर पहुंचेगा जो चक्रवाती तूफ़ान की पांचवीं श्रेणी के बराबर होगा.

बचावकर्मी

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बांग्लादेश में क्या है स्थिति

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अधिकारियों का कहना है कि यह 2007 में आए चक्रवाती तूफ़ान सिद्र के बाद का सबसे शक्तिशाली चक्रवाती तूफ़ान होगा.

सिद्र तूफ़ान में 3,500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

तट से टकराने के बाद इस तूफ़ान की गति कम होने की संभावना है. भारत के मौसम विभाग का कहना है कि तूफ़ान के कारण समुद्र की लहरें 10 से 16 फ़ुट रहने का अनुमान है.

यह तूफ़ान ऐसे समय पर आ रहा है जब कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन घोषित है और लाखों लोग अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं.

पश्चिम बंगाल और ओडिशा उन राज्यों में शामिल हैं जहां पर भारी संख्या में लोग लौट रहे हैं.

ओडिशा ने अब उन ट्रेनों को रद्द कर दिया है जो 18 से 20 मई के बीच हज़ारों प्रवासी मज़दूरों को वापस लाने वाली थी.

तूफ़ान के कारण कई ज़िलों में अधिकारियों ने लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी है और राज्य सरकार से निवेदन किया है कि उनके रहने की व्यवस्था की जाए.

ओडिशा

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लोगों को रखने के लिए व्यवस्था नहीं

बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन मंत्री ने बीबीसी से कहा कि उनकी योजना 20 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की है. इस अभियान के बुधवार की सुबह शुरू होने की संभावना है.

सोशल डिस्टेंसिंग की जा सके इसके लिए अतिरिक्त शेल्टर होम बनाए गए हैं और फ़ेस मास्क भी बाँटे गए हैं.

हालांकि, भारत में शेल्टर होम को लेकर संघर्ष का भी सामना करना पड़ रहा है. ओडिशा में 800 से अधिक शेल्टर होम में से 250 का इस्तेमाल कोरोना वायरस क्वारंटीन सेंटर्स के रूप में किया जा रहा है.

दोनों देशों में जिन तटीय इलाक़ों में ये तूफ़ान पहुंचेगा वहां के स्कूलों और अन्य इमारतों को अस्थायी शेल्टर होम में तब्दील करने के लिए कहा गया है.

भारत में सुंदरबन द्वीप के नज़दीक से 50,000 लोगों को निकाला गया है.

1999 में बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवाती तूफ़ान के बाद यह शक्तिशाली चक्रवाती तूफ़ान है. 1999 में ओडिशा तट पर आए तूफ़ान में 9,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

भारत के मौसम विभाग ने इलाक़े के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है और मछुआरों को सलाह दी है कि वो अगले 24 घंटों के लिए दक्षिण बंगाल की खाड़ी में न जाएं और 18 से 20 मई तक उत्तर बंगाल की खाड़ी में न जाएं.

मौसम विभाग का कहना है कि ऐसी आशंका है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से यह तूफ़ान गुज़रेगा और पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट से 20 मई की दोपहर को गुज़रेगा, तब 'यह बहुत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान होगा.'

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