कोरोना वायरस: प्रवासी मज़दूरों के लिए क्या कर रही है मोदी सरकार- नज़रिया

    • Author, अमिताभ सिन्हा
    • पदनाम, प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी

कोरोना वायरस एक ऐसी आपदा है जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. अब तक अकल्पनीय आर्थिक नुक़सान हो चुका है और लाखों लोगों की मौत हो चुकी है.

लाखों परिवार बिखर गए हैं. बच्चे अनाथ हो गए हैं. ये एक ऐसी अभूतपूर्व स्थिति है जिसके चलते पूरी दुनिया जहां की तहां ठहर कर रह गई है.

ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. अब से कुछ समय पहले जो सब कुछ हम देख रहे हैं, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन जो सामने है उसे झुठलाया नहीं जा सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने भी अपने सामने आई इस चुनौती का डटकर सामना किया है और लगातार कर रही है.

केंद्र सरकार के क़दम कितने असरदार

केंद्र सरकार इस आपदा की शुरुआत से ही पूरी ताक़त से लड़ रही है. और इसका असर देश और दुनिया भर की जनता को दिख रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी के समयानुकूल क़दमों की वजह से 1 अरब 30 करोड़ लोगों के देश में ठीक होने वालों का प्रतिशत तीस फ़ीसदी से ज़्यादा है. इसे लेकर पूरे विश्व में भारत की सराहना की जा रही है.

हाँ, ये सही है कि इस बीमारी से अभी भी काफ़ी लोग संक्रमित हैं. और कई अमूल्य जीवन नष्ट हो गए हैं जो कि बेहद दुर्भाग्यशाली हैं.

मगर यहां ये ध्यान देने की बात है कि विकसित देशों जहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इतनी मज़बूत हैं, वहां पर कितना बुरा हाल है. लेकिन भारत सरकार अपने सीमित साधनों के बल पर अपनी जंग लड़ रही है और कुछ हद तक यहां पर स्थिति विदेशों जितनी बुरी नहीं है.

श्रमिकों के लिए क्या कर रही है सरकार?

विपक्षी दलों की ओर से श्रमिकों की मौत और उनके दुखों के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. तकनीकी आधार पर ये बिलकुल भी सही नहीं है. केंद्र सरकार अपने स्तर पर इस संकट से उबरने की हर संभव कोशिश कर रही है. लेकिन इसे राज्य सरकारों की ओर से अपेक्षा के मुताबिक़ समर्थन नहीं मिल रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संदेश में पाँच बार कहा है कि जो जहां है वहीं रहे और किसी क़ीमत पर बाहर न निकले.

इसके कुछ समय बाद ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से आह्नवान किया कि वे राज्यों में श्रमिक भाई-बहनों का ख्याल रखें.

इसके अगले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक लाख सत्तर हज़ार करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की.

इसके बाद सभी प्रवासी मज़दूरों को पाँच किलो राशन और एक किलो दाल लगातार मुफ़्त देने की घोषणा हुई.

केंद्र सरकार ने इसके लिए 6195 करोड़ रुपये अलग-अलग राज्यों के पीडीएस सिस्टम में डाला.

श्रमिक भाइयों को सड़कों पर पैदल चलने की त्रासदी से बचाने के लिए हमारी सरकार ने सभी राज्यों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे जिस रेलवे स्टेशन पर चाहें मात्र तीन घंटे के नोटिस पर ट्रेन मंगवा सकते हैं.

रेल मंत्रालय की ओर से इस बारे में स्पष्ट सूचना दी गई. रेल मंत्रालय ऐसी रेल गाड़ियों में जाने वाले श्रमिकों के खाने पीने की व्यवस्था भी कर रहा है.

यही नहीं, केंद्र सरकार तत्काल मदद करने के प्रयास करने के साथ-साथ दूरगामी संकट भी दूर करने की दिशा में काम कर रही है.

आर्थिक मदद के प्रयास

केंद्र सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के घर पहुंचने पर उनके लिए मनरेगा में संभावनाएं पैदा करने की योजना बनाई है.

क्योंकि मनरेगा में प्रवासी मज़दूरों को काम नहीं मिलता है.

लेकिन मनरेगा में अब शहरों से लौटे इन श्रमिकों को काम मिल सकेगा. इसके लिए केंद्र सरकार ने ज़रूरी धन को आवंटित कर दिया है.

वहीं, रेहड़ी लगाने वालों के भविष्य को लेकर भी सरकार काफ़ी सजग और संवेदनशील है.

इस देश में कम से कम 50 लाख लोग रेहड़ी लगाकर अपनी जीविका चलाते हैं. सरकार ने इस वर्ग के लिए पाँच हज़ार करोड़ रुपये का आवंटन किया है.

सरकार इतनी तेज़ी से काम कर रही है कि घोषणा होने के तत्काल बाद पैसे का आवंटन हो रहा है. कल और परसों जो घोषणाएं हुईं हैं उनमें से कई के लिए आर्थिक कोष का आवंटन हो चुका है. राज्यों को पैसा भेजा जा चुका है. इस पैसे से राज्य सरकारों को श्रमिकों को तीन महीने तक मुफ़्त राशन देना है.

सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की खाने-पीने से जुड़ी दिक्क़तें दूर करने के लिए वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम शुरू की है. इसे अमल में लाने के लिए तीन महीनों का समय दिया गया है. लेकिन इस दौरान मुफ़्त राशन देने की व्यवस्था तीन महीने तक के लिए की गई है. ख़ास बात ये है कि केंद्र सरकार इसके लिए खुद ख़र्च कर रही है जो कि आज तक नहीं हुआ है.

अब कई लोग ये भी कह रहे हैं कि सरकार प्रवासी मज़दूरों की मदद के लिए उस तरह आगे क्यों नहीं आ रही है जिस तरह प्राकृतिक आपदा के समय सरकार द्रुत गति से काम करती है.

इस सवाल का जवाब सिर्फ़ एक है कि सरकार ने इस आपदा से निपटने में किसी भी हथियार को छिपा कर नहीं रखा है. और सरकार इतनी बड़े देश की विशाल आबादी को बचाने में दिन रात लगी हुई है.

(बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश के साथ बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)