कोरोना: क्या लॉकडाउन में 'डायमंड सिटी' ने अपनी चमक खो दी है?
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Author, हरिता कांडपाल
पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गुजराती सेवा
सूरत को गुजरात का 'डायमंड सिटी' कहा जाता है. हीरे के साथ-साथ यह शहर कपड़ा उद्योग के लिए भी मशहूर है.
गुजरात में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले अहमदबाद के बाद सूरत में ही है. यह देश के उन 20 शहरों में है जहां कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
केंद्र सरकार ने यहाँ की स्थिति का मुआयना करने के लिए एक टीम भेजने का फ़ैसला किया है.
कोरोना के इस संकट से जूझ रहे सूरत के सामने एक दूसरा संकट इसके हीरे और कपड़े उद्योग का ठप पड़ जाने का भी है.
इन दोनों ही उद्योगों से जुड़े लाखों मज़दूरों बदहाली के शिकार हो चुके हैं.
मज़दूर सड़कों पर निकल आए...
व्यापारियों और प्रशासकों का दावा है कि वो मज़दूरों की मदद कर रहे हैं.
लेकिन ऐसे कई उदाहरण पिछले दिनों सामने आए हैं जिनमें प्रवासी मजदूरों का असंतोष ज़ाहिर हुआ है.
22 मार्च को हुए जनता कर्फ़्यू और लॉकडाउन के तीसरे चरण के दौरान यह नाराज़गी देखने को मिली थी. सूरत में मज़दूर सड़कों पर निकल आए और पत्थरबाज़ी की.
सूरत के हीरा व्यावसाय लाखों लोगों को रोज़गार देता है. इसमें मुख्य तौर पर राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश से आए मज़दूर काम करते हैं.
गुजरात के जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन दिनेश नवाड़िया का कहना है कि हीरा उद्योगपतियों ने मार्च की तनख्वाह के साथ-साथ मज़दूरों को ढेर सारी खाने-पीने की चीज़ें दी हैं.
प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के बारे में बात करते हुए दिनेश नवाड़िया कहते हैं, "चूंकि गुजरात में 22 मार्च के जनता कर्फ़्यू से पहले ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन शुरू हो गया था इसलिए यहां कई कंपनियों में काम बंद कर दिया गया था."
उनका कहना है कि देश से हीरे का 95 फ़ीसदी निर्यात अमरीका, चीन, हांगकांग और यूरोपीय देशों में होता है. इनमें से अमरीका के साथ 40 फ़ीसदी, हांग कांग के साथ 38 फ़ीसदी, चीन के साथ चार से पांच फ़ीसदी और यूरोपीय देशों के साथ 15 फ़ीसदी व्यापार होता है.
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
सूरत और मुंबई
वो कहते हैं, "कोरोना वायरस के संक्रमण से चूंकि दुनिया भर के बाज़ार बंद पड़े हुए हैं इसलिए गुजरात के हीरा व्यापार पर इसका असर पड़ा है. वो कहते हैं कि जब तक सूरत रेड ज़ोन में है तब तक कोई काम यहां शुरू नहीं हो सकता है."
"राजकोट, जूनागढ़ और सौराष्ट्र के अमरेली और पालनपुर जैसे ज़िलों की छोटी इकाइयाँ भी तब तक काम नहीं करेंगी जब तक कि सूरत और मुंबई में डायमंड के चमकाने का काम शुरू नहीं हो जाता है."
हालांकि दिनेश नवाड़िया ने बीबीसी को बताया कि सूरत से हांग कांग निर्यात शुरू हो चुका है और कुछ इकाइयों में काम भी शुरू हो चुका है.
कुछ व्यावसायियों का कहना है कि चूंकि हीरा एक लग्ज़री आइटम है ना कि अनिवार्य ज़रूरत की चीज़ इसलिए अभी के अनिश्चितता भरे माहौल में लोग हीरा खरीदने के बारे में नहीं सोचेंगे.
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'मुश्किल वक्त आने वाला है'
दिनेश नवाड़िया बताते हैं कि "सूरत के हीरा मार्केट में सात लाख मज़दूर काम करते हैं जिसमें से अब तक क़रीब दो लाख मज़दूर अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं."
उनके मुताबिक़ अगर लॉकडाउन में राहत दी जाती है तब भी सूरत में सिर्फ 30-35 फ़ीसदी इकाइयां ही शुरू हो सकती है क्योंकि बाज़ार में न तो कोई मांग है और न ही सूरत में अब पर्याप्त मज़दूर बचे हैं.
उनका कहना है, "मज़दूरों को भी स्थिति का अंदाजा है और वो समझ रहे हैं कि आने वाला वक्त मुश्किल भरा होगा और हीरा व्यावसाय को फिर से खड़ा होने में वक्त लगेगा. वो अपने-अपने घर पहुँचने के लिए बेचैन हैं."
वो कहते हैं कि आने वाले वक्त में व्यापारियों को मज़दूरों को सैलरी देने में मुश्किलें खड़ी होंगी.
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कपड़ा उद्योग के मज़दूर
श्री राम कृष्ण एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और चेयरमैन गोविंद ढोलकिया ने बीबीसी से कहा, "हीरा उद्योग में काम करने वाले अधिकतर मज़दूर गुजरात के दूसरे प्रदेशों से आते हैं और सिर्फ 20 फ़ीसदी मज़दूर दूसरे राज्यों से आते हैं. हीरे के उद्योगपति और इस उद्योग में काम करने वाले कामगार एक परिवार की तरह हैं. वो कामगारों का पूरा ख़याल रखते हैं. सूरत में मज़दूरों के बीच जो असंतोष है वो मुख्य तौर पर कपड़ा उद्योग के मज़दूरों का है. सूरत में एक बड़ा कारोबार कपड़े के उद्योग का भी है."
उनका यह भी कहना है, "हीरा उद्योगपतियों ने मज़दूरों को मार्च की सैलरी दी है. कुछ ही ऐसी कंपनियां होंगी जिन्हें मजरों को सैलरी देने में कठिनाई आई होगी."
उन्होंने कहा कि कपड़ा उद्योग के 90 फ़ीसदी मजदूर दूसरे राज्यों से आते हैं और वो मुश्किल हालत में यहां रहते हैं.
गोविंद ढोलकिया की कंपनी में लगभग पांच हज़ार मज़दूर काम करते हैं.
वो कहते हैं, "यह एक अभूतपूर्व स्थिति है किसी को इसका अनुभव नहीं है. अगर सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा से पहले दो दिनों का समय मज़दूरों को घर जाने के लिए दिया होता तो हमें ये अंसतोष नहीं देखना पड़ता."
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इलाज की व्यवस्था
नाम ना छापने के शर्त पर एक दूसरी कंपनी के मालिक का कहना है कि सौराष्ट्र में मज़दूर अपने-अपने गांवों पहुंच कर खेती के काम में लग गए होते, अगर उनकी सूरत से जाने की व्यवस्था कर दी गई होती.
वो कहते हैं, "यह हर किसी के लिए मुश्किल वक्त है और हीरा उद्योग को आने वक्त में अपने काम करने के तरीके को बदलना होगा. मौजूदा वक्त में सरकार क्वारंटीन और इलाज की व्यवस्था कर रही है लेकिन आने वाले वक्त में जब उद्योग-धंधे खुलेंगे तब सारी ज़िम्मेदारी व्यापारियों को उठानी होंगी."
उन्होंने यह भी कहा कि सूरत का हीरा उद्योग लोगों की मदद के लिए सामने आया है.
दिनेश नवाडिया का दावा है कि मौजूदा मुश्किल दौर में कई स्वयंसेवी संगठनों ने आगे बढ़कर मदद की है. उनका कहना है कि उनकी काउंसिल ने मज़दूरों के लिए पांच करोड़ की मदद की है.
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.
राज्य या केंद्र शासित प्रदेश
कुल मामले
जो स्वस्थ हुए
मौतें
महाराष्ट्र
1351153
1049947
35751
आंध्र प्रदेश
681161
612300
5745
तमिलनाडु
586397
530708
9383
कर्नाटक
582458
469750
8641
उत्तराखंड
390875
331270
5652
गोवा
273098
240703
5272
पश्चिम बंगाल
250580
219844
4837
ओडिशा
212609
177585
866
तेलंगाना
189283
158690
1116
बिहार
180032
166188
892
केरल
179923
121264
698
असम
173629
142297
667
हरियाणा
134623
114576
3431
राजस्थान
130971
109472
1456
हिमाचल प्रदेश
125412
108411
1331
मध्य प्रदेश
124166
100012
2242
पंजाब
111375
90345
3284
छत्तीसगढ़
108458
74537
877
झारखंड
81417
68603
688
उत्तर प्रदेश
47502
36646
580
गुजरात
32396
27072
407
पुडुचेरी
26685
21156
515
जम्मू और कश्मीर
14457
10607
175
चंडीगढ़
11678
9325
153
मणिपुर
10477
7982
64
लद्दाख
4152
3064
58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह
3803
3582
53
दिल्ली
3015
2836
2
मिज़ोरम
1958
1459
0
स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
11: 30 IST को अपडेट किया गया
कपड़ा व्यावसाय पर क्या प्रभाव पड़ा है?
सूरत के कपड़ा उद्योग में लाखों मज़दूर काम करते हैं. इसमें से 80-90 फ़ीसदी मज़दूर प्रवासी हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि कपड़ा उद्योग अपना 35-40 फ़ीसदी कारोबार मार्च, अप्रैल और मई के महीने में करता है, क्योंकि इन महीनों के दौरान शादियों और त्यौहारों का मौसम होता है.
लेकिन इस साल इन महीनों में व्यापारियों को लॉकडाउन की वजह से भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है.
कपड़ा उद्योग की तीन शाखाएं होती हैं- बुनकर, प्रोसेसर और व्यापारी. ये एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते है. लेकिन अभी कपड़ा उद्योग का सारा काम काज ठप पड़ा हुआ है.
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दस लाख से ज़्यादा मज़दूर
दक्षिण गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतू भाई वखाड़िया का कहना है कि फिलहाल 325 टेक्सटाइल प्रोसेसिंग हाउस बंद है, पांच से छह लाख करघे जहाँ बुनाई का काम होता है, सब बंद पड़े हैं. कर्फ़्यू के कारण 60 से 65 हज़ार कपड़े की दुकानें सूरत में बंद हैं.
जीतू भाई कहते हैं कि पांच से छह लाख कारीगर बुनाई का काम करते हैं और दस लाख से ज़्यादा मज़दूर इस उद्योग में काम करते हैं.
सूरत के व्यापारियों का कहना है कि व्यापारियों को 20 मार्च के क़रीब सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करने को लेकर गाइडलाइन आने के बाद काम बंद कर देना था.
व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि लॉकडाउन खुलने के बाद भी कपड़ा उद्योग को पहले की बुलंदी तक पहुँचने में वक्त लगेगा.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
End of मैं और मेरा परिवार
एक तरफ समुद्र तो दूसरी तरफ खाई
कुछ व्यावसायियों का कहना है कि जनवरी, फरवरी और मार्च का भुगतान थोक बाज़ार में अब तक नहीं हुआ है जिस कारण काम शुरू करने के लिए उनके पास अब पैसा नहीं है.
जीतू भाई अनुमान लगाते हैं, "एक मिल को हर महीने औसतन एक करोड़ का नुकसान हो रहा है. सूरत के कपड़ा उद्योग को हर रोज़ तकरीबन 100-125 करोड़ का नुकसान हो रहा है."
वो कहते हैं, "हमारे सामने अभी आगे समुद्र पीछे खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है. सराकर ने मज़दूरों को सैलरी, खाना और दूसरी सुविधाएँ देने को कहा है लेकिन जब उद्योग-धंधे बंद पड़े हुए हैं और कमाई ठप पड़ी हुई है तो फिर हम कैसे पैसे देंगे?"
उनका कहना है कि सरकार ने मज़दूरों की समस्या को लेकर बात की है, बिजली बिल को लेकर भी छूट दी है लेकिन व्यापारियों को ब्याज भी चुकाना होता है.
वो कहते हैं "हमारे जैसे मिडल क्लास के व्यापारी के लिए कहाँ कोई राहत है?"
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कोरोना वायरस की महामारी
फ़ेडरेशन ऑफ़ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल कहते हैं, "जीएसटी की वजह से कपड़ा उद्योग पहले से ही संकट में था और अब इस कोरोना वायरस की महामारी ने पूरी दुनिया के बाज़ार को हिला कर रख दिया है."
उनका कहना है कि करोड़ों का सामान कपड़ा उद्योग के बुनकर, प्रोसेसर, ट्रांसपोर्टर और व्यापारियों के चेन के बीच फंस कर रह गया है.
उन्होंने बताया, "सूरत के कपड़ा बाज़ार में क़रीब 65,000 दुकानें खुली हैं. कपड़ा थोक बाज़ार में पांच से छह लाख मज़दूर काम करते हैं. ये मज़दूर अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं और अमूमन छोटे-छोटे कमरों में रहते हैं. जब से कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुआ और बाज़ार बंद हुआ तब से उनके लिए छोटे-छोटे कमरों में रहना मुश्किल हो गया है."
उनका कहना है कि "पड़ोसी राज्य के मज़दूर बस और गाड़ियां किराए पर लेकर अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए हैं. जो पैसे नहीं दे पाए वो पैदल ही चल दिए. उनकी इतनी जल्दी लौटने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं. आने वाले दिनों में सिर्फ 10-20 फीसदी उद्योग ही खुल पाएँगे."
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क्या कहते हैं अधिकारी?
मनोज अग्रवाल के मुताबिक़ उनकी फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूर झारखंड में अपने गांव लौट गए हैं. उनका कहना है कि कपड़ा उद्योग में काम करने वाले मज़दूरों मार्च में सैलरी दी गई थी और उन्हें अप्रैल के महीने में भी पैसा और खाने को दिया गया था.
मनोज अग्रवाल का कहना है कि अब भी सूरत में बड़ी संख्या में मज़दूर है जो घर जाना चाहते हैं.
लॉकडाउन के पहले चरण से ही सूरत में मज़दूरों के असंतोष की ख़बरें आनी शुरू हो गई थीं. सरकार को मज़दूरों को उनके घरे भेजने के लिए विशेष ट्रेन चलाने में एक महीने से ज़्यादा का वक्त लग गया.
सूरत में जब मज़दूरों को बसों का किराया खुद से देने के लिए कहा गया तो इसे लेकर भी विवाद हुआ. मज़दूरों ने खाना और पैसे नहीं देने की शिकायतें कीं और ना ही उन्हें यह बताया गया कि उन्हें कहाां से कैसे मदद मिलेगी.
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मज़दूरों का बवाल
नवसारी से बीजेपी के सांसद सीआर पाटिल ने बीबीसी को बताया कि सूरत में बड़ी संख्या में मज़दूर लॉकडाउन के दौरान आराम से रह रहे हैं.
उनका कहना है, "मुंबई के बाद सूरत एकमात्र शहर है जहाँ इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर रहते हैं."
सीआर पाटिल का दावा है कि कुछ लोगों ने मज़दूरों को बवाल काटने के लिए उकसाया था. जब उनसे पूछा गया कि मज़दूरों को किसने भड़काया था और क्या उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की गई, तब उनका जवाब था कि अभी कोरोना वायरस को नियंत्रित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
सूरत के माजुरा क्षेत्र से विधायक हर्ष सांघवी ने बीबीसी से कहा, "प्रवासी मज़दूर सूरत शहर के अभिन्न हिस्सा हैं. वो जिन परिस्थितियों में रहते हैं, उसमें सुधार की जरूरत है."
वो कहते हैं, "प्रवासी मज़दूरों की देखभाल का ज़िम्मा व्यापारियों का होना चाहिए. व्यापारी इन मज़दूरों की कड़ी मेहनत की बदौलत बहुत कमाते हैं. उन्हें इन मज़दूरों की मानवीय आधार पर मदद करनी चाहिए."
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सरकार की मदद का वादा
सीआर पाटिल और हर्ष संघवी का दावा है कि सूरत में एक भी मज़दूर भूखा नहीं सो रहा है क्योंकि स्वंयसेवी संगठनों ने उन्हें खाने-पीने की चीज़ें देकर उनकी मदद की है.
उन्होंने आने वाले वक्त में सूरत के उद्योग-धंधे को फिर से उठ खड़े होने के लिए सरकार की मदद का वादा भी किया है.
वो कहते हैं, "आने वाले दिनों में मज़दूरों के बिना काम नहीं शुरू होने वाला. इसलिए इस बात पर ज़ोर देना ठीक नहीं होगा कि जो वाकई में जरूरतमंद है, वो घर वापस लौट जाएं."
हालांकि हर्ष संघवी ने कहा कि सरकार लौट गए मज़दूरों को वापस लाने की योजना पर भी काम करेगी.
लेकिन तमाम दावों के बावजूद यह सवाल उठता है कि लाखों मज़दूर जिनके पास न काम है और न पैसे, उनका ख़याल कौन रखेगा?