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कोरोना वायरस: ऑनलाइन शराब बिक्री के फ़ायदे और नुक़सान क्या-क्या हैं
- Author, सूर्यांशी पांडे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
25 मार्च से क़ैद हुई ज़िंदगियां आज शराब के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगने से भी कतरा नहीं रहीं.
लॉकडाउन के तीसरे चरण में जैसे ही केंद्र सरकार ने शराब की बिक्री पर से प्रतिबंध हटाया गया, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से लेकर छोटे शहरों में भी शराब खरीदने के लिए एक-दो कलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिली. उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले में तो भारी बारिश के बीच भी लोग कतार में जमे रहे.
लोगों की लंबी कतारें एक ओर राज्य सरकारों के लिए कोरोना संक्रमण के आंकड़ों के बढ़ने का कारण बन सकती है, तो दूसरी ओर यही कतारें राज्य की अर्थव्यस्था को फिर से दुरुस्त करने का एकमात्र साधन भी लग रही हैं.
हालांकि लॉकडाउन के पहले चरण (25 मार्च-14 अप्रैल) में असम, मेघालय, पश्रिम बंगाल, केरल और पंजाब ने कड़े दिशा-निर्देशों के साथ कुछ शराब की दुकानें खोली थीं क्योंकि तब केंद्र सरकार ने शराब की बिक्री पर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की थी. बाद में केंद्र सरकार ने इन राज्यों को ऐसा करने से मना किया.
15 अप्रैल को केंद्र ने स्पष्ट रूप से गाइडलाइन जारी कर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध भी लगा दिया था जिसको अब लॉकडाउन के तीसरे चरण में हटा दिया गया है.
बिहार, गुजरात, नागालैंड, मिज़ोरम और केंद्र शासित लक्षद्वीप; इन राज्यों को छोड़कर जहां शराब बैन है, अन्य राज्यों के लिए शराब पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी कमाई का मज़बूत स्रोत है.
आरबीआई के राज्य वित्त पर किए गए शोध की (2019-20) रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्य सरकारों के ख़ुद के कर राजस्व का 10-15 प्रतिशत हिस्सा शराब पर लगे एक्साइज़ ड्यूटी से आता है.
चार मई से प्रतिबंध हटने के बाद कर्नाटक ने क़रीब 70 करोड़ रुपये कमाए तो उत्तर प्रदेश ने 100 करोड़ रुपये तक की कमाई की.
संट्रेल एक्साइज़ (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) विभाग में एडिशनल कमिश्नर के पद पर काम कर रहे एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि शराब से जुड़े कर का लाभ भी राज्य सरकारों को ही मिलता है और इसमें केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करती.
विदेशी शराब के आयात पर लगने वाला कस्टम टैक्स केंद्र सरकार के खाते में जाता है और उसकी बिक्री पर लगने वाला टैक्स का फ़ायदा राज्य सरकार को होता है. वो यह भी बताते हैं कि शराब पर जीएसटी न लगने की वजह से राज्य सरकार मुनाफ़ा अच्छा कमा लेती है.
ऐसे में सवाल यह है कि जब शराब बेचनी ही है तो कोरोना काल में भीड़ से बचने के लिए ऑनलाइन सेवा का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल क्या राज्यों में किया जा सकता है?
छत्तीसगढ़ ने पांच मई को ग्रीन ज़ोन में शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलिवरी शुरू की. पंजाब ने अपनी ऑनलाइन सेवा तो जारी नहीं की लेकिन ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में होम डिलीवरी पर विचार कर रहा है. लेकिन यह फ़ॉर्मूला कितना कारगर है?
ऑनलाइन शराब की बिक्री पर क़ानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार शराब की बिक्री से जुड़े क़ानून राज्य सरकार बना सकती है.
दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वक़ील रूप चंद तिवारी के अनुसार हर राज्य सरकार ने अपने अनुसार ऑनलाइन शराब की बिक्री के नियम बनाए हैं, कहीं यह प्रतिबंधित है तो कहीं इस विकल्प का एक्ट में ज़िक्र ही नहीं है.
अगर शराब पीने की उम्र की भी बात करें तो वह भी हर राज्य में अलग-अलग है; जैसे दिल्ली में 25 साल, गोवा, कर्नाटक में 18 साल तो केरल में 23 साल है.
वो बताते हैं “चूंकि भारत इस वक़्त कोरोना वायरस से आई वैश्विक आपदा से निपट रहा है, इसके कारण आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट 1897 के तहत लोगों को आपदा से बचाने के लिए नियमों या क़ानून में बदलाव किया जा सकता है. जैसे छत्तीसगढ़ ने किया, वैसे अन्य राज्य भी कर सकते हैं.”
रूप चंद बताते हैं कि फ़िलहाल दिल्ली एक्साइज़ एक्ट, 2009 के अनुसार शराब की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध है. दिल्ली सरकार एपिडेमिक डिसीज़ एक्ट 1897 और दिल्ली एपीडेमिक डिसीज़ कोविड-19 रेगुलेशन, 2020 का इस्तेमाल कर कुछ समय के लिए ऑनलाइन बिक्री शुरू कर सकती है.
वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के ही वक़ील देवांशु खन्ना का मानना है कि कोरोना आपदा के चलते अध्यादेश पारित कर राज्य सरकारें शराब की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर सकती हैं लेकिन इसको सतर्कता से लागू करना होगा ताकि इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर कोई इसकी तस्करी न करे.
वो बताते हैं कि हाल ही में केरल के एक नागरिक ने केरल हाईकोर्ट में शराब की होम डिलिवरी के लिए याचिका दायर दी की थी जिसको कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा था कि सरकार इस पर निर्यण ले सकती है, कोर्ट नहीं.
शराब के ठेकेदारों की क्या है राय?
दिल्ली के एक शराब दुकानदार ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि सरकारी और प्राइवेट दुकानों को मिलाकर दिल्ली में 700 से ज़्यादा शराब की दुकानें हैं और इस वक़्त केवल 75-100 दुकानें ही खोली गई हैं.
डिमांड ज़्यादा है लेकिन सप्लाई सिर्फ़ कुछ ही दुकानें कर रही है. इससे यह दिक़्क़त हो सकती है कि अगर इन दुकानों में स्टॉक की कमी हुई तो भीड़ दुकानदारों पर हावी भी हो सकती है.
उन्होंने यह भी कहा कि “दिल्ली सरकार ने केवल एल-6 और एल-8 लाइसेंस वाली दुकानें ही खोली हैं जो सरकार द्वारा चलाई जाती हैं. इन दुकानों में स्टॉक भी ज़्यादा नहीं होता.”
वो कहते हैं “ऑनलाइन सेवा शुरू करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. रिटेल विक्रेता से स्टॉक लेकर ऑनलाइन बेचा जा सकता है.”
उत्तर प्रदेश के एक्साइज विभाग में कार्यरत एक अधिकारी ने पहचान ज़ाहिर न करने शर्त पर बीबीसी को बताया कि उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन शराब की बिक्री जैसी कोई सेवा नहीं है. यहां पर लाइसेंस वाली रीटेल दुकानों पर बिक्री जारी है.
पश्रिम बंगाल में रिटेल की दुकानों के ज़रिए होम डिलीवरी की जा रही है लेकिन ऑनलाइन शराब की बिक्री के अपने कई नुक़सान भी हैं.
ऑनलाइन शराब की बिक्री के नुक़सान
दिल्ली हाईकोर्ट के वक़ील रूप चंद बताते हैं कि ऑनलाइन सेवा में उम्र का आकलन करना मुश्किल हो सकता है.
चूंकि ऑनलाइन सिस्टम में ऐसे प्रावधान नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि शराब का ऑर्डर देने वाला उम्र में छोटा है या फिर शराब पीने की क़ानूनी उम्र तक पहुंच गया है.
कर्नाटक के एक मामले का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं, साल 2015 में तमिलनाडु के चेन्नई शहर से एक ऑनलाइन शराब विक्रेता कंपनी, ‘हिप बार’ ने अपनी शुरुआत की. इसके बाद 2017 में उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में अपनी सेवा शुरू की थी. लेकिन साल 2019 में कर्नाटक सरकार ने अपने राज्य में ‘हिप बार’ की सेवा को यह कहकर रद्द कर दिया था कि ऑनलाइन शराब की बिक्री में उम्र का पता नहीं चल पाता और यह ख़तरनाक है.
हिप बार के मालिक प्रसन्ना नटराजन ने दलील दी थी कि आधार कार्ड आधारित प्रक्रिया पर काम किया जा सकता है जिससे उम्र का पता चल सके.
इसके साथ-साथ वह यह भी बताते हैं कि क्योंकि हर राज्य सरकार के शराब की बिक्री के अपने नियम है इससे ऑनलाइन लाइसेंस मिलना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है.
सबसे अहम बात यह है कि लोग इसका ग़लत इस्तेमाल कर शराब की तस्करी के लिए भी कर सकते हैं. राज्य सरकार को जितना कर राजस्व मिलता है उसका ठीक से आकलन भी नहीं हो पाएगा.
ऑनलाइन शराब की बिक्री सेबढ़ सकता है कोरोना संक्रमण?
जहां ऑनलाइन सेवा या शराब की होम डिलीवरी को कुछ समय के लिए शुरू कर, भीड़ को नियंत्रित करके कुछ राज्य कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इससे शराब पीने वालों के स्वाथ्य पर क्या असर पड़ेगा?
क्या शराब पीने से कोरोना का संक्रमण का ख़तरा पीने वाले पर बढ़ सकता है? ऑनलाइन सेवा शुरू होने से शराब का सेवन ज़्यादा होगा क्योंकि लोग घर बैठे-बैठे शराब का ऑर्डर दे पाएंगे.
विश्व स्वाथ्य संगठन की 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन अल्कोहॉल एंड हेल्थ' के मुताबिक़ भारत में क़रीब 32 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं जिसमें से आधे से ज़्यादा लोग ख़तरनाक स्तर पर शराब पीते हैं यानी की ज़रूरत से ज़्यादा पीते हैं. ऐसे में शराब का सेवन कई बीमारियों को जन्म दे सकता है.
शराब पीने से बीमारी होने का ख़तरा बढ़ जाता है जिसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है.
विश्व स्वाथ्य संगठन ने जागरुक करने के लिए गाइडलाइंस जारी करते हुए बताया कि भले ही शराब पीने से सीधे कोविड-19 होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता पर शराब असर डालती है इसलिए इसका सेवन करने से बचना ही चाहिए.
एएनआई की ख़बर के अनुसार तमिलनाडु के मदुरै ज़िले में औरतों का एक गुट बाहर निकल कर राज्य सरकार के शराब के ठेके खोलने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरा. उनके मुताबिक़ शराब के सेवन के बाद उनके पति घरेलू हिंसा करते हैं.
केंद्रीय एक्साइज़ विभाग में कार्यरत अधिकारी कहते हैं कई राज्यों द्वारा शराब की बिक्री पर बढ़ाए टैक्स के ज़रिए पैसा तो कमाया जा सकता है लेकिन साथ ही शायद बिक्री पर नियंत्रण भी हो सके.
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