कोरोना वायरस: ऑनलाइन शराब बिक्री के फ़ायदे और नुक़सान क्या-क्या हैं
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Author, सूर्यांशी पांडे
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
25 मार्च से क़ैद हुई ज़िंदगियां आज शराब के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगने से भी कतरा नहीं रहीं.
लॉकडाउन के तीसरे चरण में जैसे ही केंद्र सरकार ने शराब की बिक्री पर से प्रतिबंध हटाया गया, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से लेकर छोटे शहरों में भी शराब खरीदने के लिए एक-दो कलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिली. उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले में तो भारी बारिश के बीच भी लोग कतार में जमे रहे.
लोगों की लंबी कतारें एक ओर राज्य सरकारों के लिए कोरोना संक्रमण के आंकड़ों के बढ़ने का कारण बन सकती है, तो दूसरी ओर यही कतारें राज्य की अर्थव्यस्था को फिर से दुरुस्त करने का एकमात्र साधन भी लग रही हैं.
हालांकि लॉकडाउन के पहले चरण (25 मार्च-14 अप्रैल) में असम, मेघालय, पश्रिम बंगाल, केरल और पंजाब ने कड़े दिशा-निर्देशों के साथ कुछ शराब की दुकानें खोली थीं क्योंकि तब केंद्र सरकार ने शराब की बिक्री पर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की थी. बाद में केंद्र सरकार ने इन राज्यों को ऐसा करने से मना किया.
15 अप्रैल को केंद्र ने स्पष्ट रूप से गाइडलाइन जारी कर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध भी लगा दिया था जिसको अब लॉकडाउन के तीसरे चरण में हटा दिया गया है.
बिहार, गुजरात, नागालैंड, मिज़ोरम और केंद्र शासित लक्षद्वीप; इन राज्यों को छोड़कर जहां शराब बैन है, अन्य राज्यों के लिए शराब पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी कमाई का मज़बूत स्रोत है.
आरबीआई के राज्य वित्त पर किए गए शोध की (2019-20) रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्य सरकारों के ख़ुद के कर राजस्व का 10-15 प्रतिशत हिस्सा शराब पर लगे एक्साइज़ ड्यूटी से आता है.
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चार मई से प्रतिबंध हटने के बाद कर्नाटक ने क़रीब 70 करोड़ रुपये कमाए तो उत्तर प्रदेश ने 100 करोड़ रुपये तक की कमाई की.
संट्रेल एक्साइज़ (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) विभाग में एडिशनल कमिश्नर के पद पर काम कर रहे एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि शराब से जुड़े कर का लाभ भी राज्य सरकारों को ही मिलता है और इसमें केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करती.
विदेशी शराब के आयात पर लगने वाला कस्टम टैक्स केंद्र सरकार के खाते में जाता है और उसकी बिक्री पर लगने वाला टैक्स का फ़ायदा राज्य सरकार को होता है. वो यह भी बताते हैं कि शराब पर जीएसटी न लगने की वजह से राज्य सरकार मुनाफ़ा अच्छा कमा लेती है.
ऐसे में सवाल यह है कि जब शराब बेचनी ही है तो कोरोना काल में भीड़ से बचने के लिए ऑनलाइन सेवा का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल क्या राज्यों में किया जा सकता है?
छत्तीसगढ़ ने पांच मई को ग्रीन ज़ोन में शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलिवरी शुरू की. पंजाब ने अपनी ऑनलाइन सेवा तो जारी नहीं की लेकिन ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में होम डिलीवरी पर विचार कर रहा है. लेकिन यह फ़ॉर्मूला कितना कारगर है?
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ऑनलाइन शराब की बिक्री पर क़ानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार शराब की बिक्री से जुड़े क़ानून राज्य सरकार बना सकती है.
दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वक़ील रूप चंद तिवारी के अनुसार हर राज्य सरकार ने अपने अनुसार ऑनलाइन शराब की बिक्री के नियम बनाए हैं, कहीं यह प्रतिबंधित है तो कहीं इस विकल्प का एक्ट में ज़िक्र ही नहीं है.
अगर शराब पीने की उम्र की भी बात करें तो वह भी हर राज्य में अलग-अलग है; जैसे दिल्ली में 25 साल, गोवा, कर्नाटक में 18 साल तो केरल में 23 साल है.
वो बताते हैं “चूंकि भारत इस वक़्त कोरोना वायरस से आई वैश्विक आपदा से निपट रहा है, इसके कारण आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट 1897 के तहत लोगों को आपदा से बचाने के लिए नियमों या क़ानून में बदलाव किया जा सकता है. जैसे छत्तीसगढ़ ने किया, वैसे अन्य राज्य भी कर सकते हैं.”
रूप चंद बताते हैं कि फ़िलहाल दिल्ली एक्साइज़ एक्ट, 2009 के अनुसार शराब की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध है. दिल्ली सरकार एपिडेमिक डिसीज़ एक्ट 1897 और दिल्ली एपीडेमिक डिसीज़ कोविड-19 रेगुलेशन, 2020 का इस्तेमाल कर कुछ समय के लिए ऑनलाइन बिक्री शुरू कर सकती है.
वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के ही वक़ील देवांशु खन्ना का मानना है कि कोरोना आपदा के चलते अध्यादेश पारित कर राज्य सरकारें शराब की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर सकती हैं लेकिन इसको सतर्कता से लागू करना होगा ताकि इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर कोई इसकी तस्करी न करे.
वो बताते हैं कि हाल ही में केरल के एक नागरिक ने केरल हाईकोर्ट में शराब की होम डिलिवरी के लिए याचिका दायर दी की थी जिसको कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा था कि सरकार इस पर निर्यण ले सकती है, कोर्ट नहीं.
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शराब के ठेकेदारों की क्या है राय?
दिल्ली के एक शराब दुकानदार ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि सरकारी और प्राइवेट दुकानों को मिलाकर दिल्ली में 700 से ज़्यादा शराब की दुकानें हैं और इस वक़्त केवल 75-100 दुकानें ही खोली गई हैं.
डिमांड ज़्यादा है लेकिन सप्लाई सिर्फ़ कुछ ही दुकानें कर रही है. इससे यह दिक़्क़त हो सकती है कि अगर इन दुकानों में स्टॉक की कमी हुई तो भीड़ दुकानदारों पर हावी भी हो सकती है.
उन्होंने यह भी कहा कि “दिल्ली सरकार ने केवल एल-6 और एल-8 लाइसेंस वाली दुकानें ही खोली हैं जो सरकार द्वारा चलाई जाती हैं. इन दुकानों में स्टॉक भी ज़्यादा नहीं होता.”
वो कहते हैं “ऑनलाइन सेवा शुरू करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. रिटेल विक्रेता से स्टॉक लेकर ऑनलाइन बेचा जा सकता है.”
उत्तर प्रदेश के एक्साइज विभाग में कार्यरत एक अधिकारी ने पहचान ज़ाहिर न करने शर्त पर बीबीसी को बताया कि उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन शराब की बिक्री जैसी कोई सेवा नहीं है. यहां पर लाइसेंस वाली रीटेल दुकानों पर बिक्री जारी है.
पश्रिम बंगाल में रिटेल की दुकानों के ज़रिए होम डिलीवरी की जा रही है लेकिन ऑनलाइन शराब की बिक्री के अपने कई नुक़सान भी हैं.
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ऑनलाइन शराब की बिक्री के नुक़सान
दिल्ली हाईकोर्ट के वक़ील रूप चंद बताते हैं कि ऑनलाइन सेवा में उम्र का आकलन करना मुश्किल हो सकता है.
चूंकि ऑनलाइन सिस्टम में ऐसे प्रावधान नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि शराब का ऑर्डर देने वाला उम्र में छोटा है या फिर शराब पीने की क़ानूनी उम्र तक पहुंच गया है.
कर्नाटक के एक मामले का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं, साल 2015 में तमिलनाडु के चेन्नई शहर से एक ऑनलाइन शराब विक्रेता कंपनी, ‘हिप बार’ ने अपनी शुरुआत की. इसके बाद 2017 में उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में अपनी सेवा शुरू की थी. लेकिन साल 2019 में कर्नाटक सरकार ने अपने राज्य में ‘हिप बार’ की सेवा को यह कहकर रद्द कर दिया था कि ऑनलाइन शराब की बिक्री में उम्र का पता नहीं चल पाता और यह ख़तरनाक है.
हिप बार के मालिक प्रसन्ना नटराजन ने दलील दी थी कि आधार कार्ड आधारित प्रक्रिया पर काम किया जा सकता है जिससे उम्र का पता चल सके.
इसके साथ-साथ वह यह भी बताते हैं कि क्योंकि हर राज्य सरकार के शराब की बिक्री के अपने नियम है इससे ऑनलाइन लाइसेंस मिलना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है.
सबसे अहम बात यह है कि लोग इसका ग़लत इस्तेमाल कर शराब की तस्करी के लिए भी कर सकते हैं. राज्य सरकार को जितना कर राजस्व मिलता है उसका ठीक से आकलन भी नहीं हो पाएगा.
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ऑनलाइन शराब की बिक्री सेबढ़ सकता है कोरोना संक्रमण?
जहां ऑनलाइन सेवा या शराब की होम डिलीवरी को कुछ समय के लिए शुरू कर, भीड़ को नियंत्रित करके कुछ राज्य कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इससे शराब पीने वालों के स्वाथ्य पर क्या असर पड़ेगा?
क्या शराब पीने से कोरोना का संक्रमण का ख़तरा पीने वाले पर बढ़ सकता है? ऑनलाइन सेवा शुरू होने से शराब का सेवन ज़्यादा होगा क्योंकि लोग घर बैठे-बैठे शराब का ऑर्डर दे पाएंगे.
विश्व स्वाथ्य संगठन की 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन अल्कोहॉल एंड हेल्थ' के मुताबिक़ भारत में क़रीब 32 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं जिसमें से आधे से ज़्यादा लोग ख़तरनाक स्तर पर शराब पीते हैं यानी की ज़रूरत से ज़्यादा पीते हैं. ऐसे में शराब का सेवन कई बीमारियों को जन्म दे सकता है.
शराब पीने से बीमारी होने का ख़तरा बढ़ जाता है जिसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है.
विश्व स्वाथ्य संगठन ने जागरुक करने के लिए गाइडलाइंस जारी करते हुए बताया कि भले ही शराब पीने से सीधे कोविड-19 होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता पर शराब असर डालती है इसलिए इसका सेवन करने से बचना ही चाहिए.
एएनआई की ख़बर के अनुसार तमिलनाडु के मदुरै ज़िले में औरतों का एक गुट बाहर निकल कर राज्य सरकार के शराब के ठेके खोलने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरा. उनके मुताबिक़ शराब के सेवन के बाद उनके पति घरेलू हिंसा करते हैं.
केंद्रीय एक्साइज़ विभाग में कार्यरत अधिकारी कहते हैं कई राज्यों द्वारा शराब की बिक्री पर बढ़ाए टैक्स के ज़रिए पैसा तो कमाया जा सकता है लेकिन साथ ही शायद बिक्री पर नियंत्रण भी हो सके.
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बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.