कोरोना महामारी के दौर में शराब की बिक्री कैसे बढ़ी - तस्वीरें

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3 मई को भारत में लॉकडाउन के दूसरे चरण का अंत हुआ और इसके बाद 4 मई से इसके तीसरे चरण की शुरुआत हुई. तीसरे चरण के पहले दिन शराब की दुकानें खुलीं और देशभर में शराब की दुकानों के सामने ख़रीददारों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं.
25 मार्च से भारत में लॉकडाउन लागू किया गया था जिसके बाद से पूरे भारत में शराब की बिक्री बंद हो गई थी.
राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं. कई जगह हालात इतने ख़राब हो गए कि कुछ जगह पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और शराब की दुकानों को बंद कर दिया गया.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इन हालात को लेकर दुखी और सख़्त नज़र आए. सोमवार शाम ख़बर आई कि दिल्ली सरकार ने शराब के दाम बढ़ा दिए हैं. और अब ये एमआरपी से 70 फीसदी महंगी मिलेगी. इसे स्पेशल कोरोना फीस का नाम दिया गया.
लेकिन मंगलवार यानी 5 मई को भी इसका कुछ असर होता दिखाई नहीं दिया. शराब की दुकानों में सामने भीड़ इकट्ठा होना कम नहीं हुई.
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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कंटेनमेंट ज़ोन के अलावा दूसरे इलाक़ों में 2200 शराब की दुकानें खोलने का ऐलान किया और कहा कि शराब की कीमतों में 16 पीसदी का इज़ाफ़ा किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि जो मास्क नहीं लगाएगा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करेगा उसे शराब नहीं दी जाएगी.
बंगलुरु में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार इमरान कुरैशी के अनुसार लॉकडाउन के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कर्नाटक सरकार भी शराब पर 5 से 15 फीसदी तक टैक्स लगाने पर विचार कर सकती है.
इससे पहले 2020-21 के लिए हुई बजट घोषणा में भी शराब पर छह फीसदी का अतिरिक्त कर लगाया गया था.
लेकिन, अधिक क़ामतों के बावजूद राज्य भर में शराब की दुकानों के आगे लाइन लगाने वालों की संख्या में कोई कमी नही हुई है. राज्य में मंगलवार को शराब की 197 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री हुई है. ये सोमवार के राजस्व में हुई 45 करोड़ रुपये की कमाई का चार गुना थी.
शराब की बढ़ती हुई बिक्री के देखते हुए सरकार अब राज्य के स्वामित्व वाले कॉर्पोरेशन के 450 आउटलेट को भी खुलने की अनुमति देने की योजना बना रही है.
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कोलकाता में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में कोरोना से मुक़ाबले के लिए पैसे जुटाने के लिए राज्य सरकार ने शराब पर 30 फीसदी अतिरिक्त बिक्री कर लगा दिया है.
वो कहते हैं कि यहां महज 10 घंटे में सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब बिकी है जो एक नया रिकार्ड है.
लॉकडाउन से पहले राज्य में अमूमन रोजाना औसतन 40 से 45 करोड़ की शराब बिकती रही है. अकेले मंगलवार को 65 करोड़ से ज्यादा की शराब बिकी है.
शराब की दुकानों पर भीड़ कम करने के लिए थोक बिक्रेता सरकारी वेस्ट बंगाल बेवरेज कार्पोर्शन ने ई-रिटेल और होम डिलीवरी के लिए भी एक नया पोर्टल भी बनाया है.

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रायपुर मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल बताते हैं छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के बाद खुली शराब दुकानों में भारी भीड़ के बाद मंगलवार को राज्य सरकार ने कई शराब दुकानों को बंद कर दिया है. हालांकि बुधवार को दुकानें खुल गई हैं लेकिन राज्य सरकार ने शराब बिक्री का समय घटा दिया है.
पहले सुबह आठ बजे से शाम सात बजे तक शराब बिक्री की जा रही थी.अब राज्य में शाम 4 बजे तक ही शराब की बिक्री हो पाएगी.
आबकारी विभाग के अनुसार राज्य में 11 घंटे में लोगों ने 35 करोड़ रुपये की शराब ख़रीदी.
इस बीच राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं ने मंगलवार को शराब दुकानों के सामने प्रदर्शन किया. कुछ जगह शराब खरीदने खड़े लोगों को भगाए जाने की भी खबर है.

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झारखंड में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार रवि प्रकाश बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन 3.0 की शुरुआत से पहले ही राज्य में कहीं पर भी शराब की दुकानें नहीं खोलने का निर्णय ले लिया था. यह बात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ही मीडिया को बताई थी.
तब उन्होंने कहा था कि क्योंकि दूसरे राज्यों में फँसे प्रवासी मज़दूरों की झारखंड वापसी शुरू हो चुकी है, लिहाज़ा वे यहाँ लॉकडाउन 3.0 के लिए गृह मंत्रालय द्वारा दी गई वे एडवाइज़री लागू नहीं होंगी, जिनमें ग्रीन और येलो ज़ोन में रियायत और सभी ज़ोन में शराब की दुकानें खोलने की बात थी.
इस कारण झारखंड की शराब दुकानें मार्च से ही बंद हैं.
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दरअसल, शराब और पेट्रोल ये दो ऐसे उत्पाद हैं जिन पर राज्य सरकारें अपनी ज़रूरत के हिसाब से टैक्स लगाकर सबसे ज़्यादा राजस्व वसूलती हैं.
माना जा रहा है कि राज्य सरकारों को हो रहे राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए ही लॉकडाउन के बावजूद शराब की दुकानें खोली गई हैं.
जिन राज्यों में शराब बिकती हैं वहां सरकार के कुल राजस्व का पंद्रह से पच्चीस फ़ीसदी हिस्सा शराब से ही आता है. यही वजह है कि लॉकडाउन के बावजूद राज्य सरकारों ने शराब बेचने में जल्दबाज़ी दिखाई है. यूपी, कर्नाटक और उत्तराखंड अपने कुल राजस्व का बीस फ़ीसदी से अधिक सिर्फ़ शराब की बिक्री से हासिल करते हैं.
हालांकि केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में सरकार कुल राजस्व का दस फ़ीसदी से कम शराब बिक्री से हासिल करती है क्योंकि यहां शराब पर टैक्स दूसरे प्रांतों के मुक़ाबले कम है.

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शराब को जीएसटी से बाहर रखा गया है. यानी राज्य अपने हिसाब से कर निर्धारित करते हैं. गुजरात और बिहार में शराब की बिक्री पर रोक है और इन राज्यों में सरकार को शराब से कोई राजस्व हासिल नहीं होता.
लेकिन शराब की दुकानें खुलने का कुछ कारोबारी विरोध भी कर रहे हैं. दूसरे कारोबार करने वाले लोगों का कहना है कि जब शराब की दुकानें खुल सकती हैं तो उनके कारोबार क्यों नहीं खुल सकते.
फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शराब की दुकानें खोले जाने का विरोध किया है.
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बीबीसी से कहा, "शराब की दुकानों को खोलना राज्य सरकारों के मानसिक दिवालियेपन और राजस्व प्राप्त करने के स्वार्थ का जीता जागता सबूत है."

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