कोरोना: एक बिल पर 95,000 की शराब ख़रीदने वालों का क्या हुआ?

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिन्दी के लिए

लॉकडाउन में क़रीब 41 दिन के सूखे के बाद कर्नाटक सरकार ने प्रदेश में शराब की बिक्री तो शुरू कर दी है जिससे राज्य की मोटी आमदनी भी शुरू हो गई है, पर एक विचित्र समस्या का अधिकारियों को सामना करना पड़ रहा है.

ये समस्या है 'लालच' की. बहुत से शराब विक्रेता निर्धारित सीमा का ध्यान रखे बिना अंधाधुंध शराब बिक्री कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने शराब की ख़रीद से संबंधित नियमों को ध्यान में रखे बिना ना सिर्फ़ शराब ख़रीदी है, बल्कि उसका दिखावा भी कर रहे हैं.

कर्नाटक में अब तक तीन ऐसे मामले सामने आये हैं, जब ख़रीदारों ने शराब ख़रीदने से संबंधित पाबंदियों की धज्जियाँ उड़ा दीं.

दक्षिण बेंगलुरु के एक शराब स्टोर का बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. 52,841 रुपये के इस बिल पर कुल 17 चीज़ें ख़रीदी गई हैं जो सिर्फ़ एक ही व्यक्ति ने ख़रीदी हैं लेकिन सवाल इस बिल की क़ीमत पर नहीं उठाये जा रहे, सवाल उठ रहा है शराब की मात्रा पर.

नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति 2.3 लीटर से ज़्यादा देसी शराब और 18.2 लीटर से ज़्यादा बियर नहीं ख़रीद सकता लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस बिल पर 128 लीटर शराब ख़रीदी गई है.

95 हज़ार से ज़्यादा की शराब

इस बिल के सोशल मीडिया पर आने के कुछ देर बाद आबकारी विभाग के अफ़सरों की नज़र बेंगलुरु के ही एक और बिल पर पड़ी, जिसकी क़ीमत 95,347 रुपये है.

नाम ना छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि वो एफ़आईआर के आधार पर इस मामले की छानबीन कर रहे हैं.

लॉकडाउन के दौरान कर्नाटक सरकार ने शराब की दुकानें खोलने का निर्णय लिया है और सोमवार को जब पहले दिन शराब की दुकानें खुलीं तो राज्य में क़रीब 45 करोड़ की बिक्री हुई थी लेकिन अगले दिन और अधिक दुकानें खुलने और आबकारी शुल्क में छह प्रतिशत की बढ़त के बाद राज्य को शराब की बिक्री से होने वाली आय बढ़कर 197 करोड़ तक पहुँच गई.

सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2020-21 में इस अतिरिक्त शुल्क की वजह से कर्नाटक सरकार को 22,700 करोड़ रुपये की आमदनी होगी जो 2019-20 की तुलना में क़रीब 8.5 प्रतिशत ज़्यादा है.

यह देखते हुए कि हज़ारों लोग शराब की दुकानों के बाहर, बिना सोशल डिस्टेन्सिंग का ध्यान रखे खड़े हैं, कर्नाटक सरकार ने भी आंध्र प्रदेश और दिल्ली की तरह शराब की क़ीमतें बढ़ाने का फ़ैसला लिया है.

कर्नाटक सरकार शराब पर 10-20 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का विचार कर रही है जिससे कि लॉकडाउन के दौरान घटी आबकारी विभाग की आमदनी की भरपाई की जा सके.

कर्नाटक सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि लॉकडाउन में बीते 41 दिनों में सरकार को हर दिन 65 करोड़ रुपये के आबकारी शुल्क का नुक़सान हुआ है.

'ग़रीबों का ख़याल रखा जाएगा'

कर्नाटक सरकार में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आई एस एन प्रसाद ने बीबीसी को बताया, "हम कल से आबकारी शुल्क 10 से 11 प्रतिशत तक बढ़ाने जा रहे हैं. इसकी वजह से एक ग़रीब व्यक्ति को अपने क्वार्टर की ख़रीद पर सिर्फ़ पाँच रुपये ज़्यादा देने होंगे."

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि सरकार शराब की क़ीमतों को आंध्र प्रदेश और दिल्ली की तरह नहीं बढ़ाना चाहती, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि आने वाले दिनों में ग़रीबों को किस प्रकार की आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

कर्नाटक सरकार को हर महीने औसतन 15,000 करोड़ रुपये की आमदनी होती है जिसमें वाहनों के पंजीकरण पर लगने वाला टैक्स, स्टांप और रजिस्ट्रेशन, कमर्शियल टैक्स वगैरह से होने वाली आय शामिल है.

इस \अधिकारी ने यह भी कहा, "हमें सरकार को हुए घाटे को कम करने के रास्ते तलाशने होंगे क्योंकि कोविड-19 से अर्थव्यवस्था को पहुँचे नुकसान की भरपाई करने में हमें कुछ समय लगेगा."

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