लोककला में कोरोनाः भारत के कलाकार कैसे दे रहे समाज को संदेश
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Author, सुधा जी तिलक
पदनाम, बीबीसी के लिए
भारत के दिग्गज लोक कलाकारों ने पेंटिंग्स की एक सीरीज़ जारी की है. इन पेंटिंग्स के ज़रिए वह कोरोना वायरस की महामारी के दौर में लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने और साफ़-सफ़ाई रखने का संदेश दे रहे हैं.
भारत में देशव्यापी लॉकडाउन को चलते एक महीने से भी ज़्यादा का वक़्त हो गया है. ऐसे में लॉकडाउन के दौरान क्या कामकाज किया जाए इस पर देश के आर्टिस्ट्स और लोक कलाकारों ने कुछ अलग तरह का उपाय निकाला है. इन्होंने देश की लोक संस्कृति के हिसाब से पारंपरिक अंदाज़ में पेंटिंग्स और चित्र बनाए हैं.
चित्रकारी से सामाजिक संदेश देने की कोशिश
दस्तकार की चेयरपर्सन लैला तैयबजी ने बीबीसी को बताया, 'हालांकि, कई लोगों को डर है कि कोविड-19 के असर से दस्तकारी करने वाले और आर्टिस्ट ख़त्म हो जाएंगे, लेकिन इनकी क्रिएटिविटी और टिके रहने की दृढ़ इच्छाशक्ति ही इन्हें बचा सकती है.' दस्तकार देश में क्राफ़्ट्स और दस्तकारी करने वाले लोगों की एक प्रमुख सोसाइटी है.
मार्च से ही दस्तकार के साथ काम कर रहे लोक कलाकार ऐसे आर्टवर्क तैयार करने में जुट गए जिनसे कोविड-19 से मुक़ाबला करने के तरीक़ों को आसानी से आम लोगों तक पहुंचाया जा सके. इन कलाकारों ने सामाजिक दूरी का पालन करने, फ़ेस मास्क पहनने, साबुन से अच्छी तरह से और बार-बार हाथ धोने और कई लोगों के एकसाथ ट्रैवल नहीं करने के संदेश को चित्रकारियों और पेंटिंग्स के ज़रिए देने का फ़ैसला किया. इन कलाकारों ने ऐसी पेंटिंग्स भी बनाईं जिनमें कोविड-19 का इलाज करने वाले हॉस्पिटलों के दृश्य दिखाए गए हैं.
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भारत के लोक कलाकार लंबे वक़्त से सामाजिक संदेश देने के लिए पारंपरिक कला का इस्तेमाल करते आ रहे हैं.
दस्तकार की प्रवक्ता रिया गुप्ता बताती हैं, 'पारंपरिक रूप से भारत में कई तरह की लोक कला बड़ी नक्काशियों या भित्तिचित्रों के रूप में बनाई जाती थीं और इनके ज़रिए सामाजिक संदेश दिए जाते थे. आर्टिस्ट गांव के चौराहों पर ऐसी नक्काशियां बनाते थे और दृश्यों के साथ आम लोगों में जागरूकता पैदा करते थे.'
मधुबनी कला के ज़रिए फ़ेस मास्क पहनने का मैसेज
अंबिका देवी बिहार के राशिदपुर गांव की एक आर्टिस्ट हैं. वह मधुबनी कला का इस्तेमाल कर रही हैं. मधुबनी एक आदिवासी कला का रूप है. इस कला का नाम बिहार के मधुबनी जिले पर रखा गया है.
इस कला में रंगों के प्राकृतिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. घरों की दीवारों पर मधुबनी चित्रकारी का चलन है. आधुनिक वक़्त में यह हैंडमेड पेपर पर भी बनाई जा रही है.
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इमेज कैप्शन, ये पेंटिंग भीलवाड़ा में लॉकडाउन में फंसे रहे प्रकाश जोशी ने बनाई है
मधुबनी पेंटिंग में एक भौगोलिक संदर्भ भी मिलता है क्योंकि यह एक ख़ास इलाक़े तक ही सीमित रही है. यहां सदियों से इस आर्ट को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित किया गया है. साथ ही इस कला के विषय और स्टाइल पहले जैसे ही बने हुए हैं.
अंबिका देवी की आर्ट में लोगों को फ़ेस मास्क पहने दिखाया गया है. साथ ही इनमें दिखाया गया है कि कैसे लोग गांव की हाट में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए ख़रीदारी कर रहे हैं.
फ़ाड़ चित्रकला से बताया सामाजिक दूरी कैसे रखें
फ़ाड़ चित्रकला राजस्थान की कला है और यह मध्यकाल के वक़्त से चली आ रही है.
इन्हें पारंपरिक रूप से कपड़े के बड़े पैनलों पर बनाया जाता है. इनमें त्योहारों की झलकियां और युद्ध के दृश्य देखने को मिलते हैं.
प्रकाश जोशी राजस्थान के भीलवाड़ा में रहने वाले एक फ़ाड आर्टिस्ट हैं. भीलवाड़ा कोविड-19 की भारत में शुरुआत के वक़्त एक हॉटस्पॉट रहा था.
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
जोशी की पेंटिंग्स में स्थानीय भाषा में संदेश दिए गए हैं. इनमें सामाजिक दूरी और फ़ेस मास्क पहने के संदेश चित्रों के माध्यम से आम लोगों को दिए गए हैं.
पट्टचित्र में फ़ेस मास्क पहने दिखे ऐतिहासिक पात्र
अपिंद्रा स्वैन उड़ीसा के रघुराजपुर में रहती हैं. वह पट्टचित्र पेंटर हैं.
इस कला का जन्म 5वीं शताब्दी में हुआ था. यह आर्ट अपने चटक रंगों और प्राकृतिक रंगों के जरिए बनाए गए चेहरों के लिए मशहूर है. अपिंद्रा की पेंटिंग्स में ऐतिहासिक पात्रों को फ़ेस मास्क पहने दिखाया गया है.
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
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दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
End of मैं और मेरा परिवार
कावड़ कला में दिखा कोविड मरीजों के इलाज का दृश्य
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कावड़ आर्ट 400 साल जितनी पुरानी है. यह ख़ूब सारे रंगों के ज़रिए कहानी सुनाने की एक विधा है. इस कला का जन्म राजस्थान में हुआ.
इस कला के आर्टिस्ट लकड़ियों के पैनल पर चित्र बनाते हैं. ये पेंटिंग्स एक स्टोरी बोर्ड जैसी होती हैं जिनमें कोई न कोई संदेश छिपा होता है.
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले के रहने वाले द्वारका प्रसाद ने एक कावड़ पैनल बनाया है. इसके ज़रिए कोविड-19 के मरीज़ों का अस्पताल में इलाज होते दिखाया गया है.
लघु चित्रकला में भक्ति में लीन दिखे फ़ेस मास्क पहने संत
तुलसीदस निंबार्क 17वीं सदी की राजस्थानी लघु चित्रकथा परंपरा के वाहक हैं.
निंबार्क ने लघु चित्रकथा के ज़रिए दिखाया है कि कैसे भगवान कृष्ण ईश्वर के भजन गा रहे एक संत के सामने बाग में नृत्य कर रहे हैं. चित्र में यह संत फ़ेस मास्क पहने हुए हैं. साथ ही इनके सामने एक हाथ धोने के लिक्ड सोप की एक बोतल भी रखी हुई है.
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.