कोरोना वायरस: आरबीआई का ईएमआई वाला पैकेज कितना पर्याप्त

आरबीआई

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    • Author, अभिनव
    • पदनाम, बैंकिंग एक्सपर्ट, बीबीसी हिंदी के लिए

अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के बुरे असर को कम करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक(आरबीआई) ने 27 मार्च को कुछ उपायों की घोषणा की थी. इसे 'कोविड-19 रेगुलेटरी पैकेज' नाम दिया गया.

आरबीआई के मुताबिक़, कोविड-19 के फैलने के कारण लॉकडाउन की वजह से कई लोगों को क़र्ज़ चुकाने में परेशानी हो रही है.

कारोबारियों को भी अपने धंधे रुकने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इन्हीं चीज़ों को ध्यान में रखते हुए यह पैकेज लाया गया.

लॉकडाउन से थम गया अर्थव्यवस्था का पहिया

यह पैकेज देश में कोरोना की शुरुआत के वक़्त में ही पेश कर दिया गया. तब देश में लॉकडाउन को लागू किए महज़ चार दिन ही हुए थे और तब इसे अगले 17 दिन और लागू रहना था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक यानी 21 दिन के लॉकडाउन का एलान किया था.

14 अप्रैल को लॉकडाउन ख़त्म होने पर इसे 3 मई तक के लिए और बढ़ा दिया गया. इस दौरान देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में भी इज़ाफ़ा हुआ है.

साथ ही इस महामारी से मरने वालों की तादाद भी बढ़कर हज़ार के क़रीब पहुंच गई है.

इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस का संक्रमण महाराष्ट्र और गुजरात में अब सामुदायिक स्तर पर पहुंच चुका है.

इस पूरे हालात का बुरा असर लोगों की आवीजिका पर पड़ा है. इस बात का फ़िलहाल कोई अंदाज़ा नहीं है कि यह वायरस कब ख़त्म होगा. ऐसे में यह बता पाना बेहद मुश्किल है कि अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका पर इसका असर कितना बड़ा होगा.

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या 27 मार्च को आरबीआई का लाया गया राहत पैकेज पर्याप्त है या देश के केंद्रीय बैंक को अपने पैकेज को और बड़ा बनाना होगा?

तो चलिए सबसे पहले आम भाषा में इस पैकेज को समझते हैं.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास

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आरबीआई के कोविड-19 राहत पैकेज में क्या है?

मान लीजिए कि आप एक रेस्टोरेंट चला रहे हैं. ऐसे में इसमें दो तरह के ख़र्चे होंगे.

पहला. घटने-बढ़ने वाले ख़र्चे. मसलन, आपके रेस्टोरेंट की बिक्री और सब्ज़ियों और दूसरे सामानों की मात्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से ख़र्च में होने वाली घटी-बढ़ी.

दूसरा. तयशुदा ख़र्चे. ये ऐसे ख़र्च होते हैं जो आपको करने ही होते हैं चाहे धंधा चले या ना चले. इनमें दुकान का किराया, कर्मचारियों की तनख़्वाह, बैंकों से फ़िक्स्ड एसेट्स के लिए लिए गए टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल लोन पर चुकाई जाने वाली ईएमआई (इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट या मासिक किस्त) और दूसरे ख़र्च शामिल होते हैं.

तयशुदा ख़र्च निकालने की मुश्किल

अब कोविड-19 के फैलने और लॉकडाउन के चलते पूरा धंधा बैठ गया है. इससे आपकी कमाई रुक गई है. लेकिन, आपको अपने तयशुदा ख़र्च तो करने ही पड़ेंगे.

ऐसे में आपको अपनी जमापूंजी या आकस्मिक फ़ंड से पैसे निकालकर ख़र्च करने पड़ेंगे.

अगर आपके पास पहले से महज़ इतनी जमापूंजी है कि आप अगले 20-30 दिन का ही ख़र्च निकाल पाएं और साथ ही चूंकि किसी को भी यह पता नहीं है कि ऐसे हालात कब तक जारी रहेंगे तब आपको यह सोचना पड़ेगा कि आप किस तरह से अपने ख़र्चों को कम कर सकते हैं.

अपनी दुकान का किराया आपको देना ही पड़ेगा. साथ ही अपनी क्रेडिट रेटिंग या क्रेडिट स्कोर को बढ़िया बनाए रखने के लिए आपको बैंक के ब्याज़ और ईएमआई का भी भुगतान करना पड़ेगा.

ऐसा नहीं करने पर आपको आगे चलकर बैंकों से पैसा उधार लेने में मुश्किल हो सकती है.

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

इस तरह से ख़र्च करने की पहली मार आपके कर्मचारियों पर पड़ती है. आपको या तो उनकी सेलरी रोकनी पड़ती है, या इसमें कटौती करनी पड़ सकती है, या फिर सबसे बुरे हालात में आपको अपने कर्मचारियों को नौकरी से भी हटाना पड़ सकता है.

कुछ इसी तरह की चीज़ों को ध्यान में रखते हुए 27 मार्च को आरबीआई ने अपने रेगुलेटरी पैकेज में ये उपाय किए.

पहला प्रावधानः इसमें आपको तीन महीने तक अपनी ईएमआई (मूलधन और ब्याज़) चुकाने से मोरेटोरियम यानी छूट दी गई है.

दूसरा प्रावधानः इसमें यह छूट दी गई है कि आप अपने वर्किंग कैपिटल पर चुकाया जाने वाला ब्याज़ 3 महीने तक टाल सकते हैं.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस: सरकारें इतना पैसा कैसे खर्च कर पा रही हैं?

आप एकसाथ इन दोनों ही प्रावधानों का फ़ायदा उठा सकते हैं. साथ ही अच्छी चीज़ यह है कि इस दौरान आपको अपने क्रेडिट स्कोर को लेकर घबराने की ज़रूरत नहीं है.

तीसरा प्रावधानः इसमें बैंकों को यह इजाज़त दी गई है कि वे वर्किंग कैपिटल फ़ाइनेंस की शर्तों को आसान बनाएं ताकि मौजूदा हालात के हिसाब से आपकी वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतों का आकलन हो सके और उस हिसाब से आपको पैसा मुहैया कराया जा सके.

मान लीजिए आपकी वर्किंग कैपिटल लिमिट 10 लाख रुपए है और ऐसे में मौजूदा हालात में बैंक इसका फिर से आकलन कर आपको एक लाख रुपए की अतिरिक्त मदद दे सकता है.

इस पैसे का इस्तेमाल आप अपने तयशुदा ख़र्चों की ज़रूरतें पूरी करने में कर सकते हैं. आप अपनी दुकान का किराया देना जारी रख सकते हैं और अपने कर्मचारियों को भी निकालने का फ़ैसला करने से बच सकते हैं. साथ ही आपको अपनी जमापूंजी के घटने या ख़त्म होने की भी कोई फ़िक्र नहीं होगी.

इस तरह से इस पैकेज का मक़सद काम-धंधों को बचाने पर है. साथ ही यह कोशिश भी की गई है कि लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे.

वीडियो कैप्शन, किस तरह से कोरोना वायरस से निबट रहे हैं दूसरे देश?

बैंकों के लिए इसमें क्या है?

भारत में बैंक आरबीआई की निगरानी और रेगुलेशन में काम करते हैं. आरबीआई प्रूडेंशियल फ़्रेमवर्क के मुताबिक़, क़र्ज लेने वाले को बैंक के पैसे चुकाने में होने वाली किसी भी दिक़्क़त के चलते लोन एग्रीमेंट के नियम और शर्तों में होने वाला कोई भी बदलाव अकाउंट की रीस्ट्रक्चरिंग मानी जाएगी.

रीस्ट्रक्चिंग वाले खातों के लिए बैंकों को अतिरिक्त प्रावधान करने होते हैं. इस वजह से बैंकों के मुनाफ़े और टियर 1 कैपिटल में कमी आती है. जब ऐसा होता है तो बैंकों के पास क़र्ज़ देने के लिए भी कम पैसे बचते हैं.

ऐसे में किसी भी लोन के लिए पैसे चुकाने की शर्तों में छूट देना, मसलन ईएमआई को टालना या कुछ वक़्त तक न चुकाने की छूट देना या इसके फिर से कैलकुलेशन करने जैसे फ़ैसले के लिए बैंक को आरबीआई की इजाज़त लेनी पड़ती है.

एनपीए से बचने का रास्ता

कारोबार में मुश्किल से बैंकों के लोन न चुकाए जाने का जोखिम बढ़ता है. लोन के एनपीए होने का भी ख़तरा बढ़ जाता है.

इस राहत पैकेज का मक़सद यह है कि कारोबार जारी रहें. इसका मक़सद कारोबारियों को इस मुश्किल वक़्त में मदद देना है ताकि उनके काम-धंधे टिके रहें.

साथ ही लोन भी बैड कैटेगरी में जाने से बच जाएं और बैंकिंग सेक्टर को एनपीए की एक और लहर का सामना न करना पड़े.

मुश्किल वक़्त में बड़े उपाय की ज़रूरत

शुरुआत में 21 दिन के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से ही कामकाज पूरी तरह से थम गया.

तब से हालात लगातार बिगड़ ही रहे हैं. इसके बाद लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए और बढ़ा दिया गया है.

हमें यह नहीं पता कि 3 मई के बाद यह लॉकडाउन हटाया जाएगा या इसमें आंशिक रूप से छूट दी जाएगी या इसे आगे और बढ़ा दिया जाएगा.

यहां तक कि अगर लॉकडाउन को हटाया भी जाता है तो भी हालात सामान्य होने में महीनों लग सकते हैं.

आदमी

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किस्त चुकाने की छूट बढ़ाई जाए

ऐसे में कारोबारों के सामने अभी अनिश्चितता का संकट मंडरा रहा है. एक तबके की ओर से यह भी मांग की जा रही है कि ईएमआई और इंटरेस्ट को चुकाने से छह महीने की छूट दी जाए.

मौजूदा हालात को देखते हुए आरबीआई को इस मांग पर ग़ौर करना चाहिए.

किस्त चुकाने से छूट से न केवल कारोबारों को ख़ुद को टिकाए रखने में मदद करेगी, बल्कि इससे बैंकों को भी अपने एनपीए पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

ब्याज़ माफ़ किया जाए

कुछ तबकों से यह भी मांग आ रही है कि ब्याज़ की माफ़ी दी जाए. इनकी मांग है कि ईएमआई में छूट की अवधि के दौरान इकट्ठा होने वाला ब्याज़ सरकार को चुकाना चाहिए.

आरबीआई के राहत पैकेज के मुताबिक़, ईएमआई चुकाने से छूट की अवधि ख़त्म होते ही ब्याज़ को एकमुश्त बैंक में जमा कराना होगा.

कारोबारों के लिए यह मुश्किल भरा होगा क्योंकि शायद वे तत्काल यह पैसा चुकाने की हैसियत में नहीं होंगे.

लेकिन, पूरा ब्याज़ माफ़ करना कोई हल नहीं है. सरकार को दूसरे विकल्पों पर विचार करना होगा.

ब्याज़ में कोई भी छूट ग़लत दिशा में उठाया गया क़दम होगा और इससे एक ग़लत परंपरा पड़ सकती है.

इसकी बजाय आरबीआई 6 किस्तों में बैंकों को यह ब्याज़ वसूलने की इजाज़त दे सकता है. साथ ही इस तरह का कोई भी रीपेमेंट ब्याज़ मुक्त होना चाहिए.

महिला

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सबको फ़ायदा मिलना सही?

रेगुलेटरी पैकेज को ख़ासतौर पर ऐसे क़र्ज़ लेने वाले लोगों के लिए बनाया गया है जो कि कोविड-19 से प्रभावित हुए हैं.

ऐसे लोगों को राहत देना इसका मक़सद है जो कि कोरोना वायरस की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ने का शिकार हुए हैं.

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि सभी तरह के क़र्ज़ लेने वालों को इसका फ़ायदा देना क्या एक सही फ़ैसला है. मसलन, सरकारी कर्मचारियों की आमदनी पर इस महामारी का कोई असर नहीं है, लेकिन उन्हें भी इसका फ़ायदा मिलेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी कंपनियों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों की छंटनी न करें.

ऐसे में बड़ी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को क्या पर्सनल लोन, ऑटो लोन, होम लोन में ईएमआई चुकाने में छूट नहीं देना एक अच्छा आइडिया हो सकता था. इस प्रक्रिया में बाद में डिफ़ॉल्टरों का डेटा इकट्ठा किया जा सकता था.

328 कंपनियां पहले ही इस पैकेज का फ़ायदा उठा चुकी हैं. ऐसे में क्या यह उनकी ड्यूटी नहीं बनती है कि वे प्रधानमंत्री की अपील पर काम करें.

पुरुष

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ईएमआई चुकाते रहना फ़ायदे का सौदा

आख़िर में, ऐसे लोगों को एक सलाह जिनकी आमदनी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है. ऐसे लोगों को अपनी ईएमआई चुकाना जारी रखना चाहिए.

ईएमआई चुकाने से छूट का फ़ायदा उठाना आपको महंगा साबित हो सकता है क्योंकि इंटरेस्ट पर आपको ज़्यादा पैसे चुकाने होंगे.

मिसाल के तौर पर, अगर आपकी ईएमआई 50,000 रुपये है और आपने 9 फ़ीसदी सालाना की दर पर क़र्ज़ लिया है तो 3 महीने तक ईएमआई टालने पर आपको बतौर ब्याज़ 2,260 रुपये ज़्यादा चुकाने होंगे.

अगर आप क्रेडिट कार्ड के पेमेंट को टालते हैं तो आपकी जेब पर और ज़्यादा बोझ पड़ने वाला है क्योंकि बैंक मंथली बेसिस पर 1.5 फ़ीसदी से 3 फ़ीसदी ब्याज़ वसूलते हैं.

ऐसे में अगर आप पैसे चुकाने की स्थिति में हैं तो ईएमआई टालने का फ़ैसला न करना ही आपके लिए फ़ायदे का सौदा है.

डेटा विस्तार से

अधिक डेटा देखने के लिए तालिका स्क्रॉल करें

*प्रति 1 लाख आबादी पर हुई मौतें

अमरीका 10,12,833 308.6 8,70,30,788
ब्राजील 6,72,033 318.4 3,25,35,923
भारत 5,25,242 38.4 4,35,31,650
रसियन फेडरेशन 3,73,595 258.8 1,81,73,480
मैक्सिको 3,25,793 255.4 60,93,835
पेरू 2,13,579 657.0 36,40,061
ब्रिटेन 1,77,890 266.2 2,22,32,377
इटली 1,68,604 279.6 1,88,05,756
इंडोनेशिया 1,56,758 57.9 60,95,351
फ्रांस 1,46,406 218.3 3,05,84,880
ईरान 1,41,404 170.5 72,40,564
जर्मनी 1,41,397 170.1 2,85,42,484
कोलंबिया 1,40,070 278.3 61,75,181
अर्जेंटीना 1,29,109 287.3 93,94,326
पोलैंड 1,16,435 306.6 60,16,526
यूक्रेन 1,12,459 253.4 50,40,518
स्पेन 1,08,111 229.6 1,28,18,184
दक्षिण अफ्रीका 1,01,812 173.9 39,95,291
तुर्की 99,057 118.7 1,51,80,444
रोमानिया 65,755 339.7 29,27,187
फिलीपिंस 60,602 56.1 37,09,386
चिली 58,617 309.3 40,30,267
हंगरी 46,647 477.5 19,28,125
वियतनाम 43,088 44.7 1,07,49,324
कनाडा 42,001 111.7 39,58,155
चेक गणराज्य 40,324 377.9 39,36,870
बुल्गारिया 37,260 534.1 11,74,216
मलेशिया 35,784 112.0 45,75,809
इक्वेडोर 35,745 205.7 9,13,798
बेल्जियम 31,952 278.2 42,65,296
जापान 31,328 24.8 94,05,007
थाईलैंड 30,736 44.1 45,34,017
पाकिस्तान 30,403 14.0 15,39,275
ग्रीस 30,327 283.0 37,29,199
बांग्लादेश 29,174 17.9 19,80,974
ट्यूनीशिया 28,691 245.3 10,52,180
इराक 25,247 64.2 23,59,755
मिस्र 24,723 24.6 5,15,645
दक्षिण कोरिया 24,576 47.5 1,84,13,997
पुर्तगाल 24,149 235.2 51,71,236
नीदरलैंड्स 22,383 129.1 82,03,898
बोलिविया 21,958 190.7 9,31,955
स्लोवाकिया 20,147 369.4 25,51,116
ऑस्ट्रिया 20,068 226.1 44,99,570
बर्मा 19,434 36.0 6,13,659
स्वीडन 19,124 185.9 25,19,199
कजाखस्तान 19,018 102.7 13,96,584
पराग्वे 18,994 269.6 6,60,841
ग्वाटेमाला 18,616 112.1 9,21,146
जॉर्जिया 16,841 452.7 16,60,429
श्रीलंका 16,522 75.8 6,64,181
सर्बिया 16,132 232.3 20,33,180
मोरक्को 16,120 44.2 12,26,246
क्रोएशिया 16,082 395.4 11,51,523
बोस्निया और हर्जेगोविना 15,807 478.9 3,79,041
चीन 14,633 1.0 21,44,566
जॉर्डन 14,068 139.3 17,00,526
स्विट्जरलैंड 13,833 161.3 37,59,730
नेपाल 11,952 41.8 9,79,835
मोल्डोवा 11,567 435.2 5,20,321
इसराइल 10,984 121.3 43,91,275
होंडूरास 10,906 111.9 4,27,718
लेबनान 10,469 152.7 11,16,798
ऑस्ट्रेलिया 10,085 39.8 82,91,399
अजरबैजान 9,717 96.9 7,93,388
एफवाईआर मेसिडोनिया 9,327 447.7 3,14,501
सऊदी अरब 9,211 26.9 7,97,374
लिथुआनिया 9,175 329.2 11,62,184
अर्मीनिया 8,629 291.7 4,23,417
क्यूबा 8,529 75.3 11,06,167
कोस्टा रिका 8,525 168.9 9,04,934
पनामा 8,373 197.2 9,25,254
अफ़ग़ानिस्तान 7,725 20.3 1,82,793
इथियोपिया 7,542 6.7 4,89,502
आयरलैंड 7,499 151.8 16,00,614
उरुग्वे 7,331 211.8 9,57,629
चाइनीज ताइपे 7,025 29.5 38,93,643
बेलारूस 6,978 73.7 9,82,867
अल्जीरिया 6,875 16.0 2,66,173
स्लोवेनिया 6,655 318.7 10,41,426
डेनमार्क 6,487 111.5 31,77,491
लीबिया 6,430 94.9 5,02,189
लातविया 5,860 306.4 8,37,182
वेनेजुएला 5,735 20.1 5,27,074
फलस्तीन 5,662 120.8 6,62,490
कीनिया 5,656 10.8 3,34,551
जिम्बाब्वे 5,558 38.0 2,55,726
सूडान 4,952 11.6 62,696
फिनलैंड 4,875 88.3 11,45,610
ओमान 4,628 93.0 3,90,244
डोमिनिकन रिपब्लिक 4,383 40.8 6,11,581
अल सल्वाडोर 4,150 64.3 1,69,646
नामीबिया 4,065 163.0 1,69,247
त्रिनिडाड एंड टोबैगो 4,013 287.7 1,67,495
जाम्बिया 4,007 22.4 3,26,259
यूगांडा 3,621 8.2 1,67,979
अल्बानिया 3,502 122.7 2,82,690
नॉर्वे 3,337 62.4 14,48,679
सीरिया 3,150 18.5 55,934
नाइजीरिया 3,144 1.6 2,57,637
जमैका 3,144 106.6 1,43,347
कोसोवो 3,140 175.0 2,29,841
कंबोडिया 3,056 18.5 1,36,296
किर्गिजस्तान 2,991 46.3 2,01,101
बोत्सवाना 2,750 119.4 3,22,769
मॉन्टेनिग्रो 2,729 438.6 2,41,190
मलावी 2,646 14.2 86,600
एस्टोनिया 2,591 195.3 5,80,114
कुवैत 2,555 60.7 6,44,451
संयुक्त अरब अमीरात 2,319 23.7 9,52,960
मोजाम्बिक 2,212 7.3 2,28,226
मंगोलिया 2,179 67.6 9,28,981
यमन 2,149 7.4 11,832
सेनेगल 1,968 12.1 86,382
कमारू 1,931 7.5 1,20,068
अंगोला 1,900 6.0 1,01,320
उजबेकिस्तान 1,637 4.9 2,41,196
न्यूजीलैंड 1,534 31.2 13,74,535
बहरीन 1,495 91.1 6,31,562
रवांडा 1,460 11.6 1,31,270
घाना 1,452 4.8 1,66,546
सिंगापुर 1,419 24.9 14,73,180
स्वाजीलैंड 1,416 123.3 73,148
मेडागास्कर 1,401 5.2 65,787
डीआर कांगो 1,375 1.6 91,393
सूरीनाम 1,369 235.5 80,864
सोमालिया 1,361 8.8 26,803
गुयाना 1,256 160.5 67,657
लक्जेमबर्ग 1,094 176.5 2,65,323
साइप्रस 1,075 89.7 5,15,596
मॉरीशस 1,004 79.3 2,31,036
मौरिटानिया 984 21.7 60,368
मार्टिनिक 965 257.0 1,95,912
ग्वाडेलोप 955 238.7 1,68,714
फिजी 866 97.3 65,889
तंजानिया 841 1.4 35,768
हेटी 837 7.4 31,677
बहामा 820 210.5 36,101
रियूनियन आइलैंड 812 91.3 4,22,769
आइवरी कोस्ट 805 3.1 83,679
लाओ पीपुल्स डेम रिपब्लिक 757 10.6 2,10,313
माल्टा 748 148.8 1,05,407
माली 737 3.7 31,176
लेसोथो 699 32.9 33,938
बेलिज 680 174.2 64,371
कतर 679 24.0 3,85,163
पापुआ न्यू गिनी 662 7.5 44,728
फ्रेंच पोलिनेशिया 649 232.4 73,386
बारबाडोस 477 166.2 84,919
गिनी 443 3.5 37,123
केप वर्डे 405 73.6 61,105
फ़्रेंच गयाना 401 137.9 86,911
बुर्किना फासो 387 1.9 21,044
कांगो 385 7.2 24,128
सेंट लूसिया 383 209.5 27,094
गाम्बिया 365 15.5 12,002
न्यू कैलेडोनिया 313 108.8 64,337
नीजेर 310 1.3 9,031
मालदीव 306 57.6 1,82,720
गैबन 305 14.0 47,939
लाइबेरिया 294 6.0 7,497
नीदरलैंड्स एंटिल्स 278 176.5 44,545
टोगो 275 3.4 37,482
निकारागुआ 242 3.7 14,690
ग्रेनाडा 232 207.1 18,376
ब्रुनई दारुसलाम 225 51.9 1,67,669
अरुबा 222 208.8 41,000
चैड 193 1.2 7,426
जिबूटी 189 19.4 15,690
मेयोट 187 70.3 37,958
इक्वेटोरियल गिनी 183 13.5 16,114
आइसलैंड 179 49.5 1,95,259
चैनल आयलैंड 179 103.9 80,990
गिनी-बिसाऊ 171 8.9 8,369
सेलेल्स 167 171.1 44,847
बेनिन 163 1.4 27,216
कोमोरोस 160 18.8 8,161
अंडौरा 153 198.3 44,177
सोलोमन आइलैंड 153 22.8 21,544
एंटिगा एंड बरबूडा 141 145.2 8,665
बरमूडा 140 219.0 16,162
दक्षिण सूडान 138 1.2 17,722
टिमूर-लेस्टे 133 10.3 22,959
ताजकिस्तान 125 1.3 17,786
सियरा लियोन 125 1.6 7,704
सैन मरीनो 115 339.6 18,236
सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडिन्स 114 103.1 9,058
सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक 113 2.4 14,649
आइल ऑफ़ मैन 108 127.7 36,463
जिब्राल्टर 104 308.6 19,633
इरिट्रिया 103 2.9 9,805
नीदरलैंड्स एंटिल्स 87 213.6 10,601
लिचटेन्सटाइन 85 223.6 17,935
साओ टोम एंड प्रिंसिप 74 34.4 6,064
डोमोनिका 68 94.7 14,852
Saint Martin (French part) 63 165.8 10,952
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स 63 209.8 6,941
मोनैको 59 151.4 13,100
सेंट किट्स एंड नेविस 43 81.4 6,157
बुरुंडी 38 0.3 42,731
बोनेयर, सेंट इयूस्टेटियस एंड साबा 37 142.4 10,405
टर्क एंड कैकस आइलैंड्स 36 94.3 6,219
केमैन आइलैंड्स 29 44.7 27,594
समोआ 29 14.7 14,995
फरोर आइलैंड्स 28 57.5 34,658
भूटान 21 2.8 59,824
ग्रीनलैंड 21 37.3 11,971
वनुआतू 14 4.7 11,389
किरिबाटी 13 11.1 3,236
डायमंड प्रिंसेज़ क्रूज़ शिप 13 712
टोंगा 12 11.5 12,301
एंग्विला 9 60.5 3,476
मॉन्टसेराट 8 160.3 1,020
वालिस एंड फ़्यूट्यूना द्वीप 7 61.2 454
पलाऊ 6 33.3 5,237
सेंट बारथेल्मी 6 60.9 4,697
एमएस ज़ानदाम क्रूज़ शिप 2 9
कुक आइलैंड्स 1 5.7 5,774
सेंट पियर एंड मिक़लों 1 17.2 2,779
फॉकलैंड 0 0.0 1,815
माइक्रोनेशिया 0 0.0 38
वैटिकन 0 0.0 29
मार्शल आइलैंड्स 0 0.0 18
अंटार्कटिका 0 11
सेंट हेलेना 0 0.0 4

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** नए मरीज़ों के लिए पिछला डेटा तीन दिन का रोलिंग औसत है. मामलों की संख्या में तेज़ी से आ रहे बदलाव के कारण इस तारीख़ के लिए औसत निकालना संभव नहीं है.

स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

जब आखिरी बार आंकड़े अपडेट किए गए: 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

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