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मस्जिद में अज़ान के बाद हमले के वायरल वीडियो की पूरी कहानी- फ़ैक्ट चेक
- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी फ़ैक्ट चेक
तब्लीग़ी जमात के धार्मिक आयोजन के कारण कोविड-19 के आंकड़ों में आई बढ़त के साथ ही सोशल मीडिया पर मुसलमानों के साथ भेदभाव और हिंसा का वीडियो सामने लागातार सामने आ रहे है.
कई झूठ-पुराने वीडियो के ज़रिए लागातार ये नरेटिव फैलाया जा रहा है कि मुसलमान ‘थूक के ज़रिए’ कोरोना फैला रहे हैं. कई जगहों पर मुसलमान रेहड़ी वालों से फ़ल-सब्जियां ना ख़रीदने की अपील की जा रही है. कुछ वीडियो ऐसे भी सामने आए हैं जहां मुसलमानों के साथ मारपीट भी की गई.
इस नफ़रत की जड़ दिनोंदिन गहरी होती जा रही है और अब इसी कड़ी में एक ऐसा ही नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
दावा किया जा रहा है कि गोरखपुर के सिकरीगंज इलाक़े में एक मस्जिद में अज़ान होने के कारण कुछ लोगों ने हमला कर दिया. 1 मिनट 50 सेकेंड के वीडियो में मस्जिद के भीतर मुसलमानों की धार्मिक पुस्तक क़ुरान फ़र्श पर फेंके हुए हैं. इसके बाद कैमरे पर एक लड़का ये बता रहा है कि कुछ लोगों ने अज़ान के बाद मस्जिद में घुसकर मार पीट की.
क्या है पूरा मामला
बीबीसी ने इस वीडियो के पीछे की पूरी कहानी जानने की कोशिश की.
चूंकि वीडियो की लोकेशन गोरखपुर का सिकरीगंज इलाक़ा बताया जा रहा है इसलिए हमने सिकरीगंज और गोरखपुर के कुछ स्थानीय पत्रकारों से संपर्क किया. यहां हमें इस बात की जानकारी मिली की इस तरह की एक घटना बनकटा गांव में हुई है.
इसके बाद हम वीडियो में नज़र आ रहे शख़्स तक पहुंचे जिसका नाम सोनू है.
सोनू ने बीबीसी को बताया, ‘’रविवार दोपहर 1.25 बजे ज़ोहर की नमाज़ के लिए अज़ान पढ़ी गई. जैसे ही अज़ान ख़त्म हुई और आदेशानुसार दो लोग नमाज़ पढ़ने बैठे तभी तीन लोग आकर हमें गालियां देने लगे. कहने लगे अजान क्यों पढ़ रहे हो तुम लोगों को ये करना मना है. ये कहते हुए वे मस्जिद के भीतर घुस गए और क़ुरान फाड़ कर नीचे फेंकने लगे. झगड़ा बढ़ा तो ये लोग यहां से चले गए और पाँच मिनट के भीतर 25 लोगों की भीड़ आई जिनके हाथों में डंडे थे. उन लोगों ने मुझे मारा, मेरे भाइयों को मारा. मेरे पिता जी थोड़ा आगे आए बचाने के लिए तो उनको बहुत मारा इन लोगों ने.‘’
सुलह का रास्ता क्यों?
इस मारपीट में सोनू के 65 साल के पिता अज़मत अली को गंभीर चोट आई है उनके दाहिने पैर में फ्रैक्चर और तीन जगह से सिर फट गया है.
लेकिन इस मामले में सोनू और उनके परिवार ने हमला करने वालों के साथ आपस में सुलह कर ली है. इस घटना के बाद उन्होंने एफ़आईआर ना करके सुलह का रास्ता क्यों चुना?
इस सवाल के जवाब में सोनू बताते हैं, ‘’इस गांव में कुल 100 के आसपास मुसलमानों के घर हैं, लेकिन ज्यादातर मुसलमान परिवार गांव के उत्तर की दिशा में रहते हैं और दक्षिण की ओर सिर्फ़ चार परिवार ही मुसलमानों के हैं. बाकी हम पूरी तरह ठाकुरों से घिरे हैं. अगर हम सुलह ना करते और कल हमारे साथ कुछ होता तो बाकी हमारी बिरादरी के लोग और पुलिस तो बाद में आएगी जो होगा वो हमें ही भुगतना पड़ेगा. ‘’
‘’बिना सुलह के तो रह पाना ही मुश्किल है.’’
इन दोनों पक्षों में सुलह पुलिस और गांव के प्रधान के सामने हुआ है.
जब हमने पुलिस प्रशासन से बात की तो उन्होंने इसे एक छोटी घटना क़रार देते हुए ज़्यादा तूल ना देने की बात कही.
सिकरीगंज के एसओ जटाशंकर ने बीबीसी को बताया कि ये झगड़ा हुआ अज़ान को लेकर जिसमें एक व्यक्ति मुस्लिम पक्ष का घायल है. कोई एफ़आईआर नहीं हुई है. सब ठीक है हम लोग जाकर देखकर आए हैं. 17-18 साल के लड़कों को लगा की मस्जिद में लोग भीड़ लगाएंगे इसलिए उन्होंने झगड़ा किया.
पुलिस के इस दावे के उलट सोनू ने हमें बताया कि मारपीट की शुरू करने वाले तीन लोगों में से एक 35 साल का है और दो की उम्र लगभग 25 साल है.
हालांकि इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है क्योंकि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से सुलह कर ली है.
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