कोरोना: कर्नाटक में सीआरपीएफ़ जवान और पुलिस कॉन्स्टेबल भिड़े

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए

कर्नाटक में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है. तस्वीर कर्नाटक के बेलगावी ज़िले के एक पुलिस स्टेशन की है जिसके दरवाज़े पर बाएं हाथ में हथकड़ी लगा एक शख्स बैठा है, ख़ास बात यह है कि ये शख्स सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स यानी सीआरपीएफ़ का कॉन्स्टेबल है.

राज्य के एक सांसद ने कर्नाटक के डीजीपी को टैग करते हुए ट्वीट भी किया है, उम्मीद जताई है कि यह मामला सच नहीं हो.

लेकिन वास्तविकता यह है कि कॉन्स्टेबल को न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले हथकड़ी में जकड़ा गया था. उन्हें राज्य पुलिस के कॉन्स्टेबलों के साथ अभद्रता करने और लॉकडाउन के सभी प्रावधानों के उल्लंघन करने के मामले में हिरासत में लिया गया है. लेकिन सत्यता का पता लगाने पर पूरा मामला वैसा नहीं रह जाता है जैसा कि सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है.

पहले सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर एक नज़र डाल लेते हैं. यह घटना 23 अप्रैल को सादालगा के एक्सम्बा गांव में हुई थी.

@Soumyadipta हैंडल के ट्वीट से यह मामला सामने आया है जिसके मुताबिक़ सादे कपड़े में सीआरपीएफ़ जवान सचिन सावंत की बेलगावी पुलिस के दो कॉन्स्टेबलों (बिना यूनिफार्म) से झड़प हो गई.

ट्वीट के थ्रेड में घटना का वीडियो भी है जिसमें एक भारी क़द काठी का पुलिस वाला सावंत की पैंट पकड़े हुए नज़र आता है, उसके कुछ ही देर बाद बिना वर्दी वाला एक दूसरा पुलिसकर्मी सीआरपीएफ़ जवान पर लाठियां चलाता हुआ दिखता है.

ट्विटर पर तस्वीर वायरल

सौम्याअदिप्ता ने बीजेपी के राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर और कर्नाटक पुलिस के डीजीपी को टैग करते हुए लिखा है, "सीआरपीएफ़ कमांडो के साथ अभद्रता का वीडियो. देखिए किस तरह से जब यह कमांडो एक दूसरे पुलिसकर्मी से बात कर रहा है तो दूसरा उनके पैंट को खींच रहा है. वह लगातार उनके पैंट को खींचता रहा है. कब तक कोबरा कमांडो सचिन सावंत अपना संयम रख पाते. फिर उन पर लाठी से हमला किया गया."

इसके बाद सावंत की वह तस्वीर है जिसमें उनके बाएं हाथ में हथकड़ी लगी है और वे पुलिस स्टेशन के बाहर फ़र्श पर बैठे हैं.

दूसरी ओर, ज़िला पुलिस ने जो वीडिया जारी किया है उसमें साफ़ दिखता है कि सावंत ने बहस के दौरान एक पुलिस कॉन्स्टेबल का कॉलर पकड़ लिया था.

वह कॉन्स्टेबल सावंत को कॉलर छोड़ने के लिए कह रहा है. उस वीडियो में भी भारी क़दकाठी वाला पुलिस कॉन्स्टेबल सावंत के पैंट को खींच रहा है और बाद में सावंत पर लाठी चलता दिखता है.

बेलगावी ज़िले के पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण निमबार्गी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "सोशल मीडिया पर आधा सच बताया जा रहा है. सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि मास्क नहीं पहनने के चलते सीआरपीएफ़ कॉन्स्टेबल पर मामला दर्ज किया गया है. यह झूठ है."

कैसे शुरू हुई बहस?

निमबर्गी के मुताबिक़ गांव में लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, धारा 144 का अनुपालन हो रहा है या नहीं, लोग मास्क पहन रहे हैं, इसे देखने के लिए दोनों कॉन्स्टेबल राउंड पर निकले हुए थे.

लक्ष्मण निमबर्गी ने बताया, "जब दोनों एक्सम्बा गांव पहुंचे तो एक पेड़ के नीचे छह सात लोगों को बैठकर बातचीत करते देखा. जब लोगों ने इन्हें देखा तो सब भाग निकले. एक आदमी वहां बैठा रहा. कॉन्स्टेबल ने उनसे मास्क पहनने और घर के अंदर रहने के बारे में कहा."

"तब उस शख्स ने कॉन्स्टेबलों से कहा कि वह भी पुलिसकर्मी है और सेंट्रल पुलिस में है. उन्होंने कॉन्स्टेबल को स्टेट पुलिस का बताया. यहां से बहस की शुरुआत हुई. सोशल मीडिया पर जो वीडियो चल रहा है उसमें नहीं दिखता है कि सीआरपीएफ़ कॉन्स्टेबल ने पुलिस कॉन्स्टेबल का कॉलर पकड़ लिया. जब उन्होंने कॉलर नहीं छोड़ा तब दूसरे कॉन्स्टेबल ने उनके पैंट को पकड़कर खींचना शुरू किया और लाठी का इस्तेमाल किया."

इस बहस के दौरान एक महिला भी आती है और सीआरपीएफ़ कॉन्स्टेबल को पुलिस कॉन्स्टेबल का कॉलर छोड़ने के लिए कहती है. इसके बाद सावंत पुलिस कॉन्स्टेबल के पेट पर लात मारते दिखते हैं.

जिला पुलिस अधीक्षक के मुताबिक़ स्टेट कॉन्स्टेबल के पेट पर सीआरपीएफ़ कॉन्स्टेबल के पांव के निशान की तस्वीर भी है. निमबर्गी ने बताया, "जब युवा कॉन्स्टेबल के पेट पर लात मारी गई, इसके बाद ही दूसरे कॉन्स्टेबल ने सावंत को लाठी से मारा."

इस तरह बांधकर क्यों रखा गया?

बेलगावी के ज़िला पुलिस अधीक्षक ने यह स्वीकार किया है कि सावंत को हथकड़ी में बांधा गया और पुलिस स्टेशन के बाहर बिठाया गया था. उन्होंने बताया, "पुलिस स्टेशन में सीआरपीएफ़ कॉन्स्टेबल लगातार चिल्ला रहे थे. इस वक्त पुलिस स्टेशन में बेहद कम स्टॉफ़ होते हैं. दो महिला कॉन्स्टेबल थीं उस वक्त, लॉकडाउन के चलते बाक़ी सब राउंड पर गए हुए थे."

"हमारे कॉन्स्टेबल उन्हें महिला स्टाफ़ के बीच स्टेशन में नहीं रखना चाहते थे. उन्हें डर था कि वह स्टेशन के अंदर कुछ कर सकता है. इसलिए उसे बांधा गया था."

लॉकडाउन घोषित किए जाने के वक़्त से अवकाश पर चल रहे सावंत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 353 (ड्यूटी करते वक्त सरकारी कर्मचारी को रोकना या उसके अभद्रता करना), धारा 323 (जानबूझकर किसी को स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), धारा 504 (शांति भंग करन के लिए जानबूझकर अपमानित करना) और एपिडेमिक डिजीज एक्ट (भारतीय दंड संहिता की धारा 188) की धाररा तीन के तहत मामला दर्ज किया गया.

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