कोरोना वायरस: बिकेगी नहीं तो शराब फैक्ट्रियां खोलने का फ़ैसला क्यों?

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- Author, प्रशांत चाहल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
लॉकडाउन के दौरान शराब की बिक्री शुरू होने के बाद पूर्वोत्तर राज्य असम से जिस तरह की तस्वीरें सामने आ रही हैं, उसने सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से चल रही बहस को और तेज़ कर दिया है.
सवाल उठ रहे हैं कि "क्या शराब की बिक्री इतनी ज़रूरी है? आख़िर सोशल डिस्टेन्सिंग का क्या होगा? लोग जहाँ ज़रूरी सामान की चिंता कर रहे हैं, वहीं सरकार लग्ज़री समझी जाने वाली शराब की बिक्री के बारे में सोच रही है!"
इस संदर्भ में हरियाणा सरकार के ‘आबकारी व कराधान विभाग’ के उस आदेश की भी ख़ासी चर्चा हो रही है जिसमें कहा गया कि ‘प्रदेश की सभी शराब निर्माता फ़ैक्ट्रियों में तत्काल प्रभाव से काम शुरू किया जाए.’
हरियाणा सरकार के इस फ़ैसले पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं. कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता और प्रदेश में मंत्री रहे रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि "सरकार को जिस समय प्रदेश के ढाई करोड़ लोगों की सलामती के बारे में सोचना चाहिए, वो शराब फ़ैक्ट्रियाँ चलती रहें, इसकी चिंता कर रहे हैं."
एक वीडियो कॉन्फ़्रेंस में सुरजेवाला ने कहा कि "जब सारा फ़ोकस कोविड-19 के ख़िलाफ़ चल रही जंग पर होना चाहिए, और हमें इस महामारी से लड़ रहे मेडिकल स्टाफ़ के बारे में सोचना चाहिए, तब हरियाणा सरकार इस जल्दबाज़ी में है कि कैसे करके शराब की फ़ैक्ट्रियाँ शुरू करवाई जायें."
लेकिन हरियाणा सरकार की दलील है कि यह फ़ैसला भी कोविड-19 के ख़िलाफ़ जारी जंग को ध्यान में रखकर लिया गया है.

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लॉकडाउन के बाद की तैयारी
प्रदेश के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने इस संबंध में बीबीसी से बात की. हरियाणा का आबकारी व कराधान विभाग दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में ही काम करता है.
उन्होंने बताया, “हरियाणा ना सिर्फ़ अपनी, बल्कि दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ की भी ईएनए यानी ‘एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहल’ की माँग की आपूर्ति करने का प्रयास कर रहा है. ईएनए सेनेटाइज़र बनाने में इस्तेमाल होता है जो शराब की फ़ैक्ट्रियों से निकलता है.”
“दूसरी हैं बीयर बनाने वाली कंपनियाँ जिनकी दलील थी कि उनके पास काफ़ी मात्रा में कैमिकल तैयार है जिसकी मदद से बीयर को बोतलों में पैक नहीं किया गया तो वो सड़कर ज़हरीले पदार्थ में तब्दील हो जाएगा. फिर उसे कहाँ फेंका जाए, यह पर्यावरण और हमारे लिए एक अलग चुनौती बन जाती.”
चौटाला ने कहा, “हरियाणा सरकार लॉकडाउन के बाद की परिस्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहती है. हम नहीं चाहते कि जब दुकानें खुलें तो वहाँ आपूर्ति ही ना की जा सके.”
उन्होंने स्पष्ट किया कि आबकारी विभाग का आदेश दुकानों पर शराब की बिक्री को लेकर नहीं है. यह आदेश सिर्फ़ फैक्ट्रियों में उत्पादन के लिए हैं.
चौटाला ने कहा कि “जनहित की योजनाओं के लिए प्रदेश को राजस्व की ज़रूरत होती है. ऐसे समय में जब राज्य परिवहन और ज़मीनों की रजिस्ट्रियों से होने वाली सरकार की आमदनी रुकी हुई है, तब शराब की बिक्री से प्रदेश को राजस्व एकत्र करने में काफ़ी मदद मिल सकती है. इन्हीं तीनों से हरियाणा को सर्वाधिक राजस्व की प्राप्ति होती है.“
चौटाला ने यह माना कि लॉकडाउन के दौरान नकली शराब की बिक्री उनकी सरकार के लिए एक चुनौती रही है और प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों में अब तक क़रीब 55 हज़ार नकली शराब की बोतलें ज़ब्त की जा चुकी हैं.

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हरियाणा के आबकारी व कराधान विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 में प्रदेश को 6700 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई थी जिसमें से 3600 करोड़ रुपये शराब की बिक्री से मिले थे.
प्रदेश की आबकारी व कराधान विभाग के अनुसार हरियाणा सरकार आगामी वित्त वर्ष में शराब की बिक्री के लक्ष्य को बढ़ाकर 3800 करोड़ करना चाहती है. इसके अनुसार हरियाणा में अगर एक दिन शराब की बिक्री ना हो, तो प्रदेश के राजस्व को मोटे तौर पर 10 करोड़ रुपये प्रति दिन का घाटा होता है.
असम में शराब की दुकानों के बाहर लंबी कतारें
पूर्वोत्तर राज्य असम और मेघालय में कुल 25 दिन के लॉकडाउन के बाद सोमवार को शराब की दुकानें खोली गईं.
असम में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार दिलीप कुमार शर्मा ने बताया कि ‘सरकार के निर्देश पर सोमवार सुबह 10 बजे जैसे ही शराब की दुकानें खुलीं, दुकानों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं.’
असम के आबकारी विभाग ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दी है. इस दौरान देसी शराब के ठेके भी खुले रहेंगे. हालांकि बार वाले रेस्टोरेंटों को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है.
असम सरकार में मंत्री परिमल शुक्ल वैद्य जो इस समय आबकारी विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्होंने बीबीसी को बताया कि "राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने जो दिशानिर्देश तय किये हैं, उन्हीं के आधार पर अनुमति दी गई है. अगर कोई भी इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते पाया गया तो हम उसका लाइसेंस रद्द कर देंगे."
पर लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानें खोलने को लेकर कहीं जल्दबाज़ी तो नहीं की गई? इस सवाल के जवाब में मंत्री परिमल शुक्ल ने कहा, "चाय बाग़ान और शराब की बिक्री, प्रदेश के राजस्व के दो बड़े स्रोत हैं. पर असम सरकार ने यह निर्णय केवल राजस्व संग्रह को ध्यान में रखते हुए नहीं लिया. इसके पीछे कई सामाजिक कारण भी हैं. पड़ोसी राज्य मेघालय में शराब की दुकानें खोली गई हैं और हमें इस बात की चिंता थी कि नशा करने वाले लोग शराब लाने वहाँ ना चले जायें क्योंकि अगर ऐसा होता है तो कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की आशंका और बढ़ जाएगी."
उन्होंने बताया, "जनता कर्फ़्यू से पहले ही राज्य में शराब की दुकानें बंद कर दी गई थीं. 25 दिन कंप्लीट लॉकडाउन रहा जिसकी वजह से सरकार को क़रीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है. हमारा आबकारी विभाग प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व संग्रह करता है. पिछले वित्त वर्ष में हमारे विभाग ने 3000 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया था."
असम के आबकारी विभाग द्वारा जारी किये गए आदेश में कहा गया है कि लाइसेंसधारी दुकानों को अपने स्टॉफ़ और ग्राहकों के बीच एक मीटर की दूरी बनाकर रखनी होगी. साथ ही थोक गोदाम, डिस्टिलरी, ब्रुअरीज़, बॉटलिंग प्लांट में कर्मचारियों की संख्या कम से कम होनी चाहिए ताकि सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन हो सके. वहीं दुकान के स्टॉफ़ को पैसे के लेनेदेन में सेनेटाइज़र का इस्तेमाल करने का आदेश दिया गया है.
शराब पर 30 फ़ीसद अतिरिक्त टैक्स
पश्चिम बंगाल सरकार ने भी कोरोना महामारी से मुक़ाबले के लिए शराब पर 30 फ़ीसद अतिरिक्त बिक्री कर लगाकर रकम जुटाने का फ़ैसला किया है.
इससे चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार को 4100 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है.
कोलकाता में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में हर वर्ष भारत निर्मित विदेशी शराब के 1.40 करोड़ केस बिकते हैं. ऐसे हर केस में नौ लीटर शराब होती है. इसके अलावा बीयर के 80 लाख केस बिकते हैं और हर केस में 650 मिली लीटर की 12 बोतलें होती हैं.
राज्य में पश्चिम बंगाल स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन यानी बेवको ही शराब की थोक विक्रेता है.
अब लॉकडाउन के दौरान शराब की बिक्री ठप होने की वजह से सरकार को रोज़ क़रीब 30-35 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है.

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प्रदेश सरकार के 30 फ़ीसद अतिरिक्त बिक्री कर के फ़ैसले को देखते हुए फ़िलहाल दो बातें साफ़ दिख रही हैं. एक तो ये कि सरकार जल्द से जल्द शराब की बिक्री शुरू करना चाहती है ताकि वित्तीय घाटा और ना बढ़े. और दूसरी बात ये कि प्रदेश में अब शराब की क़ीमत पहले से काफ़ी बढ़ जाएगी.
पुराने स्टॉक में रखी हुई बोतलों पर भी नई क़ीमत के स्टीकर लगाने की तैयारी चल रही है. हालांकि शराब विक्रेताओं ने इस पर आपत्ति जताई है.
कोलकाता के एक शराब विक्रेता ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “पहले ही हम 5-6 फ़ीसदी मुनाफ़े पर काम करते थे. क़ीमतें बढ़ने का मतलब है कि पहले जितना माल लेने के लिए हमें तीस फ़ीसद ज़्यादा पूंजी लगानी होगी. इससे मुनाफ़ा और कम हो जाएगा.”
शराब विक्रेताओं की दलील है कि क़ीमतें अचानक बढ़ जाने की वजह से पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी बढ़ने का भी अंदेशा रहेगा.
पश्चिम बंगाल में पड़ोसी राज्यों की तुलना में शराब पहले से ही महंगी है. और नए आदेश के बाद क़ीमतें और बढ़ने वाली हैं.
लेकिन प्रदेश के आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दलील दी कि लॉकडाउन के दौरान लोग तीन गुनी क़ीमत पर चोरी-छिपे शराब खरीद रहे हैं. ऐसे में कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए ऐसे लोग 30 फ़ीसद अतिरिक्त रकम ख़र्च कर ही सकते हैं.
लॉकडाउन के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से आ रहीं शराब की तस्करी की ख़बरें स्थानीय मीडिया में खूब छप रही हैं.
पिछले दो सप्ताह में पश्चिम बंगाल पुलिस ने कई जगह से चैकिंग के दौरान भारी मात्रा में शराब बरामद की है.
बीते सप्ताह ही नदिया ज़िले में एक एंबुलेंस से शराब की सैकड़ों बोतलें ज़ब्त की गई थीं और इस संबंध में तीन लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया था.



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