कोरोना वायरस: रेड, ऑरेंज ज़ोन से क्या बदलेगा

मशीनों से सैनेटाइज़ेशन

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    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में कोरोनावायरस के मामले

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

दिल्ली में कोरोना वायरस के मद्देनज़र 'रेड ज़ोन और ऑरेंज ज़ोन' बनाकर, वहां बड़े पैमाने पर सैनेटाइज़ेशन का काम शुरू कर दिया गया है.

इस सैनेटाइज़ेशन के काम को दिल्ली जल बोर्ड कर रहा है, जिसके चेयरमैन आम आदमी पार्टी के एमएलए राघव चड्ढा हैं. उनके मुताबिक जापानी तकनीक वाली 10 मशीनों से सैनेटाइज़ेशन का काम किया जा रहा है. ये मशीनें एक घंटे में 20 हज़ार स्क्वायर मीटर तक सैनेटाइज़ करने में सक्षम हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को प्रेस वार्ता कर बताया था कि दिल्ली में कोरोना मामलों की संख्या के हिसाब से इलाक़ों को रेड ज़ोन और ऑरेंज ज़ोन में बांटा गया है.

उन्होंने कहा, "जहां कोरोना के बहुत सारे मामले मिल रहे हैं, उन्हें कन्टेनमेंट ज़ोन घोषित किया जा रहा है. ये हमारे रेड ज़ोन हैं. इसके अलावा विशेषज्ञ जिन इलाक़ों की पहचान हाई रिस्क ज़ोन के तौर पर करेंगे, उन्हें हम ऑरेंज ज़ोन घोषित कर रहे हैं."

दिल्ली में 43 इलाक़ों को कन्टेनमेंट ज़ोन बना दिया गया है, यानी ये इलाक़े रेड ज़ोन में आ गए हैं.

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ऑरेंज ज़ोन के बारे में राघव चड्ढा ने बीबीसी हिंदी को बताया, "विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे इलाक़ों के बारे में दिल्ली सरकार को बताया है जो अभी रेड ज़ोन नहीं हैं, लेकिन आने वाले वक्त में बन सकते हैं. प्री-रेड ज़ोन स्टेज को एक्सपर्ट ऑरेंज ज़ोन कहते हैं. वो ऐसे इलाक़ों की लिस्ट हमें देते हैं."

राघव चड्ढा कहते हैं कि इलाक़ों को ज़ोन में बांटा जाना बहुत ज़रूरी है, " संसाधन सीमित हैं. इसलिए ज़रूरी है कि पूरी दिल्ली के हर गली-मोहल्ले के बजाए पहले संसाधनों को उन इलाक़ों में उतारा जाए, जहां वास्तव में बीमारी है या फैल रही है."

बाक़ी राज्यों ने भी अपनाया ज़ोन फॉर्मूला

रविवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य को ज़ोन के आधार पर छह भागों में बांटा जाएगा.

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान कहा, "कोरोना वायरस के ख़तरे को देखते हुए राज्य को छह ज़ोन में बांटा जाएगा. जिसमें एक रेड ज़ोन, चार ऑरेंज ज़ोन और एक ग्रीन ज़ोन होगा. ये लॉकडाउन का एक्ज़िट प्लान होगा."

मुंबई में ठाणे नगर निगम के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि कोरोना के मामलों के हिसाब से शहर को रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में बांटा जाएगा.

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ठाणे नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि जिन इलाक़ों में कोविड-19 का एक भी मामला सामने नहीं आया है, वो ग्रीन ज़ोन का हिस्सा होंगे. इनके बॉर्डर सील कर दिए जाएंगे. ग्रीन ज़ोन के अंदर लोग आ जा सकेंगे, लेकिन बाहर से लोगों को अंदर आने की इजाजत नहीं होगी ताकि इंफेक्शन की किसी भी संभावना को रोका जा सके.

सिर्फ कुछ शहरों और राज्यों को ही ज़ोन में नहीं बांटा जा रहा है, बल्कि पूरे देश को ही तीन ज़ोन में बांटने की बात चल रही है.

पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन बढ़ाने पर सहमति बनी तो देश को कोविड-19 मामलों के आधार पर रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में बांटा जा सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शनिवार को मुख्यमंत्रियों की चार घंटे लंबी चली कॉन्फ्रेंस की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने पीटीआई को पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि मौजूदा 21 दिन के लॉकडाउन को बढ़ाने पर लगभग सर्व-सम्मति बनी थी, जो 30 अप्रैल तक चल सकता है. और इस दौरान केंद्र सरकार देश को तीन ज़ोन में बांट देगी - रेड, ऑरेंज और ग्रीन. और ये कोरोना वायरस के मामलों के आधार पर तय किया जाएगा.

भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं और राज्य सरकारें पूरे देश में लॉकडाउन बढ़ाने का सुझाव दे रही हैं. इस बीच केंद्र सरकार स्थिति से निपटने के लिए मज़बूत योजना पर काम कर रही है.

योजना के तहत सरकार एक आंशिक लॉकडाउन लागू कर सकती है, जिसमें अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कुछ लघु उद्योगों को काम करने की इजाज़त दी जा सकती है.

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ज़ोन से क्या बदलेगा?

रेड ज़ोन - न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक रेड ज़ोन में कोई गतिविधि नहीं होगी. ये वो ज़िले होंगे, जहां बहुत से मामले सामने आए हैं या जिन इलाक़ों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया है.

ऑरेंज ज़ोन - ये वो इलाक़े होंगे, जहां पिछले दिनों कुछ मामले सामने आए थे और पॉज़िटिव मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. यहां कुछ गतिविधियां होंगी- जैसे कुछ कृषि उत्पादों की कटाई की अनुमति दी जाएगी.

ग्रीन ज़ोन - ग्रीन ज़ोन वो ज़िले होंगे, जहां अबतक कोविड-19 का कोई मामला सामने नहीं आया है. पीटीआई के मुताबिक यहां कुछ और छूट दी जाएगी. ग्रीन ज़ोन में पड़ने वाले कुछ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को काम शुरू करने की इजाज़त दी जाएगी. इन उद्योगों को अपने कर्मचारियों की रहने की व्यवस्था वहीं करनी होगी और इसमें सोशल डिसटेंसिंग का ख़ास ख़्याल रखना होगा.

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ज़ोन का कॉन्सेप्ट

दो अप्रैल को सरकार ने आरोग्य सेतू ऐप लॉन्च किया था. इस ऐप में भी कलर कोडिंग की बात की गई है.

देश को इन रंगों के ज़ोन में बांटा जाना इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि भारत सरकार द्वारा कोविड-19 की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए बनाए गए आरोग्य सेतू ऐप में भी इन रंगों की काफ़ी अहमियत है.

ऐप आपके रिस्क लेवल को ग्रीन या ऑरेंज कलर कोड में दिखाता है. ऐप ये भी बताता है कि आपको इसके बाद क्या करना है.

अगर आप ग्रीन ज़ोन में हैं तो एक मैसेज दिखता है कि 'आप सेफ हैं'. अगर आप ऑरेंज में हैं तो लिखा दिखेगा कि "आप हाई रिक्स में हैं."

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सरकार क्यों ज़ोन बनाना चाहती है

केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों ही इस वक्त असमंजस की स्थिति में हैं. उनके सामने दो विकल्प हैं. एक तरफ जनता की सेहत, जो कहती है कि इस वक्त कोरोना की मार से बचने के लिए लॉकडाउन आगे बढ़ाना बहुत ज़रूरी है. दूसरी तरफ है अर्थव्यवस्था, जो इस वक्त संकट में है. जो डिमांड के मुताबिक स्पलाई को पूरा करने की चुनौती से जूझ रही है.

लॉकडाउन की वजह से कई फैक्टियों को बंद करना पड़ा है. कारोबार घाटे में चले गए हैं. नौकरियां जाने का ख़तरा पैदा हो गया है और लोगों की आय रुक गई है. इन सब का भी हल निकालना सरकार के लिए इस वक्त उतना ही ज़रूरी है.

ज़ोन बनाने की चुनौतियां क्या?

लेकिन क्या देश को रेड, ऑरेंज या ग्रीन ज़ोन में बांट देने से इन समस्याओं के हल हो जाएंगे? क्या कोरोना वायरस इस बॉउंड्री को समझेगा?

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के चेयरमैन डॉ एस पी बयोत्रा कहते हैं, "इलाक़ों को ज़ोन में बांटना अभी बहुत जल्दबाज़ी का कदम है. इसके लिए कम से कम और दो हफ्ते का इंतज़ार करना चाहिए. ताकि सबकुछ सेटल हो जाए. घनी आबादी वाले देश में फिलहाल ज़ोनों की लकीरें खिंचना बहुत मुश्किल है."

डॉक्टरों का कहना है कि कुछ संक्रमित लोग एसिम्टोमेटिक होते हैं यानी उनमें कोई लक्षण दिखता ही नहीं. अगर किसी तय ज़ोन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट या लोगों का आना-जाना शुरू कर दिया जाएगा तो इससे लोगों का एक्सपोजर बढ़ जाएगा.

डॉ बयोत्रा कहते हैं, "इस तरह अगर इलाक़ों को ज़ोन में बांटा गया, तो फिलहाल उलटा भी पड़ सकता है. इसलिए इस मामले में कम से कम दो हफ्ते का इंतज़ार करना चाहिए. अगर सोच ये है कि पिछले कुछ दिनों में स्थिति में आए सुधार को देखते हुए ज़ोन बनाए जा सकते हैं तो मुझे लगता है कि अभी ज़ोन बांटने का काम नहीं करना चाहिए."

विशेषज्ञों का मानना है कि दो हफ्ते बाद भी रेड ज़ोन और ऑरेंज ज़ोन बनाए जाने पर विचार हो सकता है. लेकिन ग्रीन ज़ोन तो कोविड-19 पूरी तरह ख़त्म होने तक बनाना ही नहीं चाहिए.

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