लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद एंट्री परमिट बिना असम में प्रवेश नहीं

- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
असम सरकार के मुताबिक़ 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के बाद देश के अन्य राज्यों में पढ़ाई और काम करने गए क़रीब 10 हज़ार लोग वापस नहीं आ पाए हैं.
देश भर में अचानक लागू किए गए लॉकडाउन के कारण ये लोग अब भी अलग-अलग राज्यों में फंसे हुए हैं. ऐसे में जब 15 अप्रैल की सुबह 21 दिन का लॉकडाउन ख़त्म होगा तो क्या ये लोग अपने प्रदेश लौट पाएंगें?
इसी सवाल के जवाब में असम सरकार के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा, "अगर 14 अप्रैल या फिर 20 अप्रैल को लॉकडाउन खुलता है और असम के बाहर रुके असमिया युवक-युवतियां एक साथ राज्य में लौटते हैं तो उन सभी को 14 दिनों के क्वारंटाइन पर भेजना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि सरकार के पास इतनी तादाद में क्वारंटाइन करने की व्यवस्था फ़िलहाल नहीं है."
वे कहते हैं, "ऐसा माना जा रहा है कि लॉकडाउन खुलते ही दूसरे राज्यों से आने वाली बसें, रेल और हवाई जहाज सेवा शुरू हो जाएंगी और सभी लोग एक साथ अपने घर आना चाहेंगे.
"अगर यह भीड़ ट्रेन से आती है तो इन्हें रोकना संभव नहीं होगा. इसलिए राज्य सरकार आठ अप्रैल को एक वेबसाइट लॉन्च करेगी जिसमें बाहर से यहां आने वाले सभी लोगों को अपनी पूरी जानकारी के साथ पंजीकृत करना होगा तभी राज्य में प्रवेश की अनुमति मिलेगी. बाहर से आने वाले सभी लोगों को 14 दिन के क्वारंटाइन पर रखा जाएगा."
संक्रमण बढ़ने की आशंका और ख़तरे को देखते हुए ही असम सरकार प्रदेश में प्रवेश करने के लिए अस्थायी तौर पर एंट्री परमिट व्यवस्था लागू करना चाहती है.

इमेज स्रोत, KULENDU KALITA
क्या है ये एंट्री परमिट व्यवस्था?
स्वास्थ्य मंत्री सरमा कहते हैं, "यह व्यवस्था एक तरह से इनर लाइन परमिट के तर्ज पर ही की जाएगी, लेकिन यह अस्थायी उद्देश्य के लिए है, ऐसा राजनीतिक तौर पर नहीं किया जा रहा है. वेबसाइट लांच करने के बाद पहले हम यह पता लगाएंगे कि लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद कितने लोग असम आना चाहते हैं. उसी संख्या के आधार पर हम एंट्री परमिट जारी करेंगे. उदाहरण के तौर पर अगर 50 हज़ार लोग असम लौटने की जानकारी देते हैं तो हम हर दो दिन के अंतराल में 5 हज़ार लोगों को आने की अनुमति देंगे."
वे कहते हैं, "असम सरकार और हमारे नागरिकों को कोई परेशानी न हो इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है. बाहर से आने वाले लोगों के लिए उनकी भौगोलिक लोकेशन के आधार पर क्वारंटाइन सेंटर बनाए जाएंगे. असम में प्रवेश करने के लिए एंट्री परमिट सबको लेना होगा फिर चाहे वो असम का स्थायी नागरिक ही क्यों न हो."
इनर लाइन परमिट नहीं है ये एंट्री परमिट
पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारत के अन्य हिस्सों से प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट अर्थात आईएलपी लेना पड़ता है. दरअसल, इनर लाइन परमिट एक यात्रा दस्तावेज़ होता है, जिसे भारत सरकार अपने नागरिकों के लिए जारी करती है ताकि वो किसी संरक्षित क्षेत्र में निर्धारित अवधि के लिए यात्रा कर सकें.
मौजूदा समय में पूर्वोत्तर के नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर में प्रवेश करने के लिए आईएलपी की आवश्यकता होती है. इनमें से मणिपुर राज्य में पिछले साल दिसंबर में आईएलपी सिस्टम लागू किया गया था.
बाहर फंसे लोग इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद चार असम भवन और एक असम हाउस के साथ निरंतर संपर्क में है और इसके लिए जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के आयुक्त- सचिव के कार्यालय में एक डाटा सेंटर का गठन किया गया है.
जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के आयुक्त- सचिव एम अंगामुथु का कहना है कि उनका विभाग असम के बाहर क़रीब 10 हज़ार लोगों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहा है. इसके अलावा मुंबई, चेन्नई और वेल्लोर में कैंसर तथा अन्य बीमारियों का इलाज करवा रहे मरीज़ों को मेडकल सहायता दी जा रही है.

असम सरकार के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के अनुसार कर्नाटक में असम के छात्रों समेत कुल 1050 लोगों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था की गई है. वही महाराष्ट्र में करीब 1760 परिवारों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है. मुबंई में 250 से कैंसर मरीजों को सभी तरह से मदद दी जा रही है.
तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मजदूरी करने गए असम के सैकड़ों लोगों की वहां की सरकार के साथ मिलकर ठहरने और खाने की व्यवस्था की गई है.
2000 अमरीकी डॉलर की मदद
इस बीच असम सरकार ने विदेशों में फंसे असम के प्रत्येक नागरिक को भी 2000 अमरीकी डॉलर एकमुश्त सहायता के तौर पर देने की व्यवस्था की है.
इस बात की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री सरमा ने कहा, "यह सहायता हम उन लोगों को दे रहें है जो पिछले 30 दिनों में विदेश यात्रा पर गए थे और लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए हैं. हमने एक ईमेल आईडी जारी की है, जिसके तहत विदेशों में फंसे लोगों से उनकी यात्रा से संबंधित जानकारी और पासपोर्ट पर लगी मुहर मांगी थी. असम सरकार ने अबतक पहली किश्त के तौर पर 21 लोगों की मदद करते हुए क़रीब 16 लाख रुपये उनके बैंक खाते में डाल दिए हैं."

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