भारत में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जीत के सौ फ़ाइटर

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- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"मैं भारत के उन बदकिस्मत लोगों में से एक था, जिन्हें सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण हुआ था. अब मैं बिल्कुल ठीक हूं. 14 दिन तक इलाज चला. अब मैं घर वापस लौट चुका हूं. अब मैं दूसरे लोगों को संदेश देना चाहता हूं कि वो कोई लक्षण दिखने पर घबराएं ना. डॉक्टर के पास जाएं, उनपर भरोसा करें और सकारात्मक सोच रखें."
ये कहना है उत्तर प्रदेश के आगरा में रहने वाले अमित कपूर का.
जब वो अपने भाई के साथ इटली से लौटे, तो दो मार्च को उनके परिवार के सभी 11 सदस्यों का कोरोना वायरस का टेस्ट हुआ, जिसमें से परिवार के छह सदस्य कोरोना संक्रमित पाए गए. जिनमें 73 वर्षीय उनके पिता, 62 वर्षीय मां, 44 वर्षीय भाई, 37 वर्षीय भाभी, उनका 16 साल का बेटा और 38 वर्षीय खुद अमित कपूर शामिल थे.
अमित के मुताबिक टेस्ट पॉज़िटिव आने के बाद पूरा परिवार घबराया हुआ था. उन्हें सिर्फ यही लग रहा था कि उनके ही साथ ये क्यों हुआ और सबलोग बहुत डरे हुए थे.

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पंद्रह दिन अस्पताल में रहे...
अमित कपूर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इसके बाद हमें दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया. सभी छह लोगों को अलग-अलग कमरे में रखा गया था. हम लोग एक-दूसरे से मिल नहीं सकते थे. वहां हमारा इलाज हुआ. डॉक्टर्स ने मोरल सपोर्ट भी दिया. हमें पॉज़िटिविटी दी."
"शुरू में हम बहुत घबराए हुए थे कि ये सब हमारे साथ ही क्यों हुआ, समझ नहीं आता था कि आगे क्या होगा. शरीर में खुजली भी होती थी तो लगता था कि कोरोना वायरस की वजह से हो रही है. लेकिन तीन चार दिन बाद हम सेटल हो गए और रिकवर होने लगे. पंद्रह दिन अस्पताल में रहे. दो बार टेस्ट हुए. दोनों में नेगेटिव आया. अब परिवार के सभी लोग ठीक हो गए हैं और घर आ चुके हैं."
अमित के परिवार के छह सदस्यों समेत भारत में अब तक 100 लोग कोरोना की चपेट से बाहर निकल चुके हैं और ठीक हो चुके हैं.
15 लोगों का टेस्ट नेगेटिव
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ठीक हुए लोगों में से महाराष्ट्र के 25 लोग हैं, केरल के 19 हैं, हरियाणा के 17 हैं, उत्तर प्रदेश के 11, दिल्ली के 6, कर्नाटक के 5, तमिलनाडु के 4, राजस्थान के तीन, उत्तराखंड के 2, गुजरात का एक, तेलंगाना का एक, पंजाब का एक, लद्दाख के तीन, जम्मू-कश्मीर का एक और आंध्र प्रदेश का एक मरीज़ शामिल है.
राजस्थान सरकार में एडिशनल डायरेक्टर (रूरल हेल्थ) डॉक्टर रवि शर्मा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि राजस्थान में अब तक 15 मरीज़ ठीक हो चुके हैं.
इलाज की प्रक्रिया के बारे में डॉक्टर रवि शर्मा ने बताया, "संदिग्ध मरीज़ों का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आने पर उन्हें कोरोना के लिए डेडिकेटेड आइसोलेशन वॉर्ड में रखा गया था. यहां प्रोटोकॉल के मुताबिक उनकी देखभाल की गई और साथ-साथ में मानसिक तौर पर बूस्ट-अप करने के लिए उनकी काउंसलिंग करते रहे."
"वक्त पर खाना और बाकी चीज़ें देते रहे. आइसोलेशन के पूरे प्रोटोकॉल फॉलो कराते रहे. इसके बाद रिपीट सैंपल - तीसरे, छठे और नौवें दिन सैंपल लिए. जिस दिन सैंपल नेगेटिव आता था, उसके 24 घंटे बाद दूसरा सैंपल लिया. वो भी नेगेटिव आया. पहला सैंपल नेगेटिव आते ही हम मरीज़ को बाकी पॉज़िटव मरीज़ों से अलग कर देते हैं."
"हालांकि अभी तक इन लोगों को घर नहीं भेजा गया है. इन लोगों के लगातार दो सैंपल नेगेटिव आ चुके हैं. तीसरे और फाइनल सैंपल के लिए हमने इन्हें रोका हुआ है. इसके बाद हम इन्हें घर जाने देंगे."

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'सकारात्मक सोच और डॉक्टर्स पर भरोसा'
राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस से सबसे पहले सामने आए संक्रमित मामलों में 45 साल के रोहित दत्ता भी थे. अब वो ठीक हो चुके हैं. बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने बताया कि इटली से लौटने के बाद 29 फरवरी को उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 14 मार्च को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया.
रोहित दत्ता के मुताबिक, "मुझे खांसी काफी ज़्यादा थी. डॉक्टर्स ने बुखार दो तीन दिनों में ही कंट्रोल कर लिया था. फिर खांसी भी धीरे-धीरे जाने लगी. कोरोना होने के बाद थोड़ा डर तो लगा था, लेकिन मुझे पता था कि डॉक्टर मेरी मदद कर रहे हैं. दिल्ली में मैं पहला मरीज़ था, इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय भी नज़र बनाए हुए था."
"मुझे महसूस होने लगा था कि मैं ठीक हो रहा हूं. इलाज के दौरान डॉक्टर्स की मैंने हर बात मानी. कोई बहस नहीं की, ना कुछ पूछा. बस उनसपर भरोसा किया. मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि सकारात्मक सोच रखे, क्योंकि जंग तो सकारात्मक होकर ही लड़ी जाती है. और अपने डॉक्टर्स पर भरोसा रखें."
'हर 100 में से करीब 80 लोग हो जाते हैं ठीक'
कोरोना से जूझ रहे इटली के 14 पर्यटकों का हरियाणा के गुरुग्राम में संक्रमण के बाद इलाज कर उन्हें ठीक करने वाली डॉक्टर सुशीला कटारिया कहती हैं कि लोगों को घबराने की ज़रूरत नहीं है, किसी को कोरोना वायरस हो गया है तो वो ये ना समझे कि ये डेथ वायरस है और इससे जान जाना तय है.
उनके मुताबिक, "100 में से 80 कोरोना के मरीज़ खुद ही सिमटोमैटिक ट्रीटमेंट से ठीक हो जाते हैं. बचे हुए 100 में से 20 प्रतिशत लोगों को अस्पताल में केयर की ज़रूरत होती है. उसमें से आधे मरीज़ नॉर्मल वॉर्ड केयर से ठीक हो जाते हैं. सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों को इंटेंसिव केयर की ज़रूरत पड़ती है. इनमें से पांच लोगों को वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ सकती है. अगर ठीक से ख्याल ना रखा जाए तो, 100 में से दो या तीन प्रतिशत लोगों की जान भी जा सकती है."
डॉ सुशीला कटारिया कहती हैं कि आज हम ऐसे मोड़ पर खड़े हैं कि हमारी थोड़ी सी सावधानी हमारी ज़िंदगी को बचा सकती है. वहीं थोड़ी-सी असावधानी इस बीमारी को बढ़ा सकती है और हो सकता है कि बहुत ज़्यादा मरीज़ अस्पतालों में अचानक से आ जाएं और भारत का हेल्थ केयर सिस्टम इसे संभाल ना पाए.
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भारत समेत दुनियाभर के कई देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इस बीच कई लोग ऐसे भी हैं जो इलाज के बाद ठीक हो रहे हैं. दुनियाभर में अबतक डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग ठीक हो गए हैं. सिर्फ इटली में शनिवार को 24 घंटे में 925 लोग ठीक हुए.

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