लॉकडाउन के छह दिनों में गई 20 लोगों की जान

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    • Author, शादाब नज़्मी
    • पदनाम, बीबीसी, विज़ुअल जर्नलिज़म टीम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है. दुकानों से लेकर सभी तरह की गतिविधियों पर रोक लगने के कारण प्रवासी मजदूरों के लिए अपने रोज़ाना के ख़र्चों को निकालना बेहद मुश्किल हो गया है.

उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे कई राज्यों के मज़दूर देश के अलग-अलग हिस्सों में कमाने-खाने के मकसद से जाते हैं. लेकिन सबकुछ बंद हो जाने से तकलीफ़देह हालात में प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस लौट रहे हैं.

कामकाज और कमाई बंद होने के चलते इनके पास अपने घरों के लिए वापस लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. सरकारी बसें, ट्रेनें सब बंद हैं. निजी गाड़ियां चल नहीं रही हैं. ऐसे में पिछले कुछ दिनों से देशभर से परेशान करने वाली ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जिनमें प्रवासी मजदूर सैंकड़ों किमी पैदल चलकर अपने घरों को जा रहे हैं.

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केवल पुरुष ही नहीं महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी इस तकलीफ़देह सफर को करते दिखाई दे रहे हैं.

लॉकडाउन के ऐलान के बाद से सड़क हादसों में इन प्रवासी मजदूरों के मारे जाने की भी ख़बरें आ रही हैं.

भारत में सड़क हादसों में वैसे तो औसतन रोजाना 17 लोग मारे जाते हैं लेकिन जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ है, तब से इन दुर्घटनाओं में बड़े तौर पर प्रवासी मजदूर ही मर रहे हैं क्योंकि देश के हाइवे और सड़कों पर आम नागरिकों की कोई आवाजाही नहीं हो रही है.

लॉकडाउन का ऐलान इस वजह से किया गया है ताकि देश में कोरोना वायरस के सामुदायिक फैलाव को रोका जा सके.

पीएम मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों में रहें और सामाजिक दूरी को कायम रखें.

हालांकि, सब लोग इसका पालन नहीं कर पा रहे हैं.

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प्रवासी मजदूरों में भगदड़ मची हुई है. वे बस अड्डों पर बड़ी भीड़ के रूप में दिखाई दे रहे हैं. ये मजदूर किसी भी हालत में बड़े शहरों से निकलकर गांवों और कस्बों में अपने घरों पर वापस जाना चाहते हैं.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 29 मार्च 2020 तक कोरोना वायरस के चलते देश में कुल 25 लोगों की मौत हो चुकी थी.

दूसरी ओर, लॉकडाउन के चलते रोड एक्सीडेंट्स और मेडिकल इमर्जेंसी से अब तक 20 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है.

बीबीसी के मीडिया रिपोर्ट्स पर कराए गए एक विश्लेषण के मुताबिक, लॉकडाउन के ऐलान के बाद से सड़क हादसों के 4 मामले सामने आए हैं. बहुत ज्यादा पैदल चलने की वजह से मेडिकल इमर्जेंसी के 2 मामले देखे गए हैं और अन्य प्रकार की घटनाओं का एक मामला सामने आया है.

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सड़क हादसे

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 27 मार्च को हैदराबाद के पेड्डा गोलकोंडा के पास हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में तेलंगाना के प्रवासी मजदूर थे और इनमें दो बच्चे भी शामिल थे. ये लोग कर्नाटक में अपने घरों को वापस जा रहे थे. ये एक खुले ट्रक में यात्रा कर रहे थे. इस ट्रक को पीछे से आ रही एक लॉरी ने टक्कर मार दी.

तेलंगाना की सरकार के लॉकडाउन के ऐलान के बाद से ही तमाम प्रवासी मजदूर अपनी-अपनी जगहों पर फंस गए हैं.

दो अलग मामलों में, गुजरात के 6 प्रवासी मजदूरों के मारे जाने की ख़बर आई है.

28 मार्च को महाराष्ट्र से गुजरात में अपने घरों की ओर वापस लौट रहे चार प्रवासी मजदूरों को तेज़ रफ्तार से आ रहे एक टेंपो ने कुचल दिया. इन चारों लोगों की मौत हो गई. यह सड़क हादसा मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर पारोल गांव के पास हुआ.

उसी दिन, गुजरात के वलसाड ज़िले में दो महिला मजदूरों की भी मौत हो गई. ये महिलाएं एक रेलवे पुल को पार कर रही थीं, तभी एक मालगाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी.

पुलिस के मुताबिक, 'महिलाएं श्रमिक थीं और लॉकडाउन के चलते उन्हें अपने गांव वापस लौटना पड़ रहा था.'

एएनआई की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 29 मार्च की सुबह कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर 4 लोगों को एक गाड़ी ने कुचल दिया. बताया जा रहा है कि मरने वाले सभी लोग इस हाइवे पर पैदल जा रहे थे.

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मेडिकल इमर्जेंसी

26 मार्च को 39 साल के एक शख्स की मौत मध्य प्रदेश के मुरैना में अपने घर जाते वक्त रास्ते में हो गई. रणवीर सिंह दिल्ली में बतौर फूड डिलीवरी बॉय का काम करते थे. वह दिल्ली से मुरैना में अपने घर के लिए पैदल ही चल पड़े थे.

दिल्ली से मुरैना की दूरी करीब 300 किमी है. बीच रास्ते में आगरा में वह गिर पड़े और उनकी मौत हो गई.

27 मार्च को गुजरात के सूरत में 62 साल के गंगाराम की मौत हो गई. गंगाराम एक हॉस्पिटल से अपने घर की ओर पैदल जा रहे थे जो कि करीब 8 किमी दूर था. उन्हें घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला और उन्हें पैदल जाने का फैसला करना पड़ा.

पंडेसारा में अपने घर के पास सड़क पर वह बेहोश होकर गिर गए. उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

हर घटना की कम से कम दो मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए पुष्टि की गई है.

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