कमलनाथ के लिए सोमवार, शुभ-मंगल या ज्यादा सावधान

कमलनाथ-सिंधिया

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, भोपाल से

जगहों के नाम, नंबरों से पहचाने जाने वाले भोपाल शहर में पांच नंबर, 10 नंबर, 11 नंबर.... जैसे नाम पहले से हैं, लेकिन अब कुछ नए नंबर जैसे 108 और 107 पिछले चंद दिनों से बार-बार सुनने में आ रहे हैं.

और इन पर जोड़-घटाव भी जारी है... कांग्रेस के 108 कैसे? जो दर्जन भर विधायक कर्नाटक के बंगलुरु में हैं वो आवेंगे क्या?

और सवाल ये भी पूछे जा रहे हैं कि 'महाराज' (ज्योतिरादित्य सिंधिया) को तो राज्यसभा की टिकट मिल गई और शायद मंत्रालय भी मिल जाए, लेकिन उन 22 का क्या जो पंद्रह साल की बीजेपी की लंबी पारी के बाद सत्ता में आए तो, लेकिन 15 माह में ही 'अब किधर' वाली हालत में फंसे हैं.

"फ्लोर टेस्ट होने के बाद जो परिस्थितियां बनेंगी, उसके आधार पर उन 22 कांग्रेस विधायकों के बारे में बीजेपी तय करेगी," - बीबीसी के इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने ये बात कही.

इन 22 में से छह जो मंत्री थे, उनके इस्तीफ़े मध्य प्रदेश विधानसभा स्पीकर ने स्वीकार कर लिए है.

वैसे चर्चा, बीजेपी नेताओं के भीतर भी कुछ इस तरह की सुनने में आती है कि फ़्लोर टेस्ट में कांग्रेस को पटखनी देने के बाद राज्य में ख़ाली हुई सीटों पर उप-चुनाव हों और उनमें इन 22 में से अगर 10 भी जीत हासिल कर लेते हैं तो बीजेपी की सरकार पूरी मज़बूत हो जाएगी.

ख़ैर, फिलहाल तो सोमवार से जिस दिन मध्य प्रदेश का विधानसभा का बजट सत्र शुरु हो रहा है, 'शक्ति परीक्षण' का ज़िक्र कार्यसूची में नहीं है.

शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखे पत्र में राज्यपाल लालजी टंडन ने अपने अभिभाषण के फ़ौरन बाद बहुमत परीक्षण के लिए कहा था.

राजनीतिक विश्लेषक राजेश चतुर्वेदी कहते हैं कि सदन में क्या होगा इसका फ़ैसला लेने का हक़ स्पीकर को है.

छोड़िए Facebook पोस्ट

सामग्री् उपलब्ध नहीं है

सोशल नेटवर्क पर और देखिएबाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट Facebook समाप्त

सदन शायद पहले दिन मिलने के बाद ही स्थगित हो जाएगा, इसके संकेत पहले ही आने लगे थे जब कमलनाथ सरकार में वित्त मंत्री तरूण भनोट ने कहा था कि "प्रिवेंशन इज़ बैटर दैन क्योर". उन्हें अब स्वास्थ्य मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी मिल गया है.

उनका कहना था, "हमारे लिए ये राजनीतिक मुद्द नहीं है, सभी की सुरक्षा आवश्यक है."

समाचार एजेंसी पीटीआई ने राज्य के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के हवाले से कहा है कि "जो विधायक जयपुर, बंगलुरू और हरियाणा से आ रहे हैं, कोरोना वायरस के लिए उनकी जांच की जानी चाहिए."

ये अलग बात है कि सुबह जयपुर से भोपाल लाए गए कांग्रेस विधायक एयरपोर्ट से सीधे होटल चले गए और उनकी जांच बाद में शुरु हुई.

वीडियो कैप्शन, मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट, उसके बाद बाक़ी सब - विष्णु दत्त शर्मा
वीडियो कैप्शन, कमलनाथ सरकार अधर में लटकी है. उनके 19 विधायक हफ्ते भर से बेंगलुरू के एक रिजॉर्ट में हैं.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले सूबे की राजनीति को करोना वायरस ग्रसित बताया था.

इस बीच नोटिस जारी हुआ है कि सदन में मंत्रियों, विधायकों, कर्मचारियों और मीडियाकर्मियों के अलावा किसी की एंट्री नहीं होगी और सभी को मास्क लगाकर भीतर जाना है, हर द्वार पर सैनिटाइज़र रखे होंगे.

बीजेपी में जगह-जगह मज़ाक़ चल रहा है- "कमलनाथ जी करो-ना, जी डरो-ना" यानी शक्ति परीक्षण करो ना उससे डरो ना.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि "मैं किसी भी शक्ति परीक्षण के लिए तैयार हूं बशर्ते सभी विधायक स्वतंत्र हों और उसके लिए मौजूद हों."

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने अपने विधायक को व्हिप जारी करके कहा है कि वो कमलनाथ सरकार के समर्थन में अपना मत दें. बीजेपी ने भी अपनी ओर से विधायकों को व्हिप जारी किया है.

विपक्षी ख़ेमे में बैठकों और मंथनों का दौर जारी है. शिवराज सिंह चौहान के दिल्ली दौरे के अलावा, भोपाल में पार्टी कार्यालय और बड़े नेताओं के यहां मंत्रणाएं होती रहीं.

शिवराज सिंह चौहान

इमेज स्रोत, Getty Images

पार्टी में एक कमल के मुरझाने और दूसरे के खिलने की सूरत में मुख्यमंत्री कौन..... इस पर भी धीमे स्वरों में बातें जारी हैं. शिवराज सिंह के दिल्ली दौरे को इस नज़र से भी देखा जा रहा है.

वैसे जो और नाम चर्चा में हैं, उनमें नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्तम मिश्र और थावरचंद गहलोत के नाम लिए जा रहे हैं.

दिग्विजय सिंह

इमेज स्रोत, Getty Images

इधर कांग्रेस ख़ेमे में पार्टी महासचिव और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बराबर मुख्यमंत्री निवास पर मौजूद रहे, वहां औरों से साथ नामी वकील और कांग्रेस सदस्य विवेक तन्खा भी बने हुए हैं.

हालांकि कमलनाथ के कुछ क़रीबी लोगों में दिग्विजय सिंह से 'नाराज़गी' की बात कही जा रही है.

कहा जा रहा कि इतने विधायकों के सूबे से फुर्र हो जाने और उसकी कांग्रेस में कानों-कान ख़बर ना होना, मुख्यमंत्री के 'बड़े भाई' पर अधिक भरोसे का नतीजा था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)