फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने रिहाई से पहले पूर्व रॉ चीफ़ से क्या कहा था?- प्रेस रिव्यू

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला शुक्रवार को सात महीने की नज़रबंदी के बाद रिहा हुए थे. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एनलिसिस विंग के पूर्व प्रमुख एएस दुलत ने कहा है कि अगर सरकार ने पहल की तो फ़ारूक़ अब्दुल्ला से बात शुरू हो सकती है.
दुलत 1999 से 2000 तक रॉ प्रमुख रहे थे. फ़ारूक़ अब्दुल्ला से इनकी मुलाक़ात 12 फ़रवरी को हुई थी. अख़बार के अनुसार इस मुलाक़ात में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की अनुमति मिली हुई थी. दुलत ने द वायर से भी कहा है कि मीटिंग आईबी ने फिक्स कराई थी.
हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहली बार 27 फ़रवरी को एक रिपोर्ट छापी छापी थी कि केंद्र सरकार ने दुलत को अहम गोपनीय मिशन पर श्रीनगर भेजा है. अख़बार के अनुसार उन्हें फ़ारूक़ अब्दुल्ला से मिलने के लिए भेजा गया था.
इस बारे में जब सवाल किया गया तो दुलत ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, ''अगर आपको अधिकारियों या परिवार ने इस मुलाक़ात के बारे में कुछ कहा है तो उन्हें कुछ नहीं कहना है.''
मुलाक़ात के बारे में उन्होंने द वायर को बताया कि फ़ारूक़ अब्दुल्ला अपने बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के ख़िलाफ़ लगाए गए पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) को लेकर चिंतित थे.

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इंटरव्यू में दुलत ने कहा कि फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने का बुरा असर अगली पीढ़ी पर होने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि वो हमेशा से भारत के प्रति समर्पित रहे हैं और अपने बच्चों को भी इसी तरह बड़ा किया है लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनकी अगली पीढ़ी जब सवाल पूछेगी तो कैसे जवाब देंगे.
दुलत ने कहा, ''उनकी मुख्य चिंता थी कि कितने लोगों को बंद किया गया है और पीएसए को लेकर भी थोड़े परेशान दिखे, जो उमर अब्दुल्ला और महबूबा पर लगाया गया है. उन्होंने कहा कि वो दिल्ली आना चाहते हैं और संसद में इस बारे में बोलना चाहते हैं.''
दुलत ने बताया कि फ़ारूक़ अब्दुल्ला के साथ क़रीब एक घंटे तक चली मुलाक़ात के दौरान वो उनकी पत्नी और बेटी से भी मिले.
एक अन्य जानकारी देते हुए दुलत बताते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2015 के विधानसभा चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और अब्दुल्ला के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिशें की थी. फ़ारूक़ उस वक़्त लंदन में इलाज करा रहे थे. सरकार ने उन्हें मुलाक़ात के लिए बुलावा भेजा जो उमर अब्दुल्ला के पास गया.
कश्मीर के मौजूदा हालात पर दुलत कहते हैं कि श्रीनगर में स्थिति अब सामान्य है. उन्होंने कहा कि दुकानें खुली थीं और अमूमन हर जगह पर ट्रैफिक जाम दिखा. दुलत कहते हैं कि फ़ारूक़ अब्दुल्ला से मिलने के बारे में उनके शुरुआती दो प्रयासों पर सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं आयी. तीन दिन बाद सरकार से जुड़े एक शख़्स ने कहा कि ''अगर आप जाना चाहते हैं तो कौन रोक सकता है?''
दुलत कहते हैं कि कश्मीर के लोग अब भी अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने की वजह से सदमे में हैं. इसकी वजह से राज्य को विशेष दर्जा हासिल था. वो बताते हैं कि कश्मीर में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती के अलावा यह भी एक वजह है कि वहां के लोगों ने कोई बहुत बड़ा धरना प्रदर्शन नहीं किया.
उन्होंने यह भी कहा कि क़रीब 50 विदेशी नागरिक जिनमें पाकिस्तानी, अफ़ग़ानी, अरब और तुर्की के लोग हैं, सीमा पार करके क़रीब चार महीने पहले भारत में घुसे हैं और गायब हैं. यह चिंता का विषय है.
दुलत ने कहा कि वो सरकार से कहेंगे कि पाकिस्तान से बातचीत शुरू करे.

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शवों की अंत्येष्टि में कोई परेशानी नहीं
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि शव के अंतिम संस्कार करने से कोरोना वायरस नहीं फैलता है.
हिंदुस्तान में छपी ख़बर में एम्स के निदेशक डॉक्टर गुलेरिया के हवाले से बताया गया है कि शवों के माध्यम से कोरोना वायरस नहीं फैलता है, इसलिए कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के शव के अंतिम संस्कार को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए.
इससे पहले, दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद एक बुज़ुर्ग महिला की शुक्रवार को मौत हो गई थी.
महिला के परिजन अंतिम संस्कार करने के लिए निगम बोध घाट पहुंचे, जहां घाट समिति ने उन्हें अंतिम संस्कार नहीं करने दिया.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के दख़ल के बाद चिकित्सकों की निगरानी में महिला का अंतिम संस्कार किया गया.
इस तरह के मामलों में मृतक के अंतिम संस्कार के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय अब दिशा निर्देश तैयार कर रहा है.

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कोरोना वायरस के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार भारत में कोरोना वायरस के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं.
ख़बर में कहा गया है कि महाराष्ट्र में अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 31 मामलों का पता चला है.
इस मामले में केरल दूसरे नंबर पर है जहां 22 लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है.
भारत के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने इसे आपदा घोषित कर दिया है.
संक्रमण की बढ़ती आशंका के बीच राष्ट्रपति भवन में होने वाले पद्म पुरस्कार समारोह को स्थगित कर दिया गया है.

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डीआरडीओ में वैज्ञानिकों की कमी!
संसद की एक स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिकों की कमी है.
दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक, डीआरडीओ में वैज्ञानिकों की मौजूदा संख्या को बेहद अपर्याप्त बताते हुए कहा गया है कि बीते पांच साल 131 वैज्ञानिक डीआरडीओ छोड़ चुके हैं.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बजट में छह गुना इज़ाफ़ा होने के बावजूद डीआरडीओ उतने ही कर्मचारियों के काम चला रहा है जिसके साल 2001 में थे.
संसदीय समिति के मुताबिक, वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ाने की सिफ़ारिशें हो चुकी हैं, लेकिन मामला रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के पास लंबित है.

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पर्सनल व्हाट्सएप पर अभद्र संदेश भेजना जुर्म नहीं
बॉम्बे हाई कोर्ट ने औरंगाबाद बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पर्सनल व्हाट्सएप पर अभद्र संदेश भेजना जुर्म की श्रेणी में नहीं आता.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, कोर्ट ने माना है कि पर्सनल अकाउंट पर भेजे गए संदेश नितांत निजी हैं जिन्हें सिर्फ़ सेंडर और रिसीवर ही देख सकते हैं.
कोर्ट ने ये फ़ैसला पति-पत्नी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया जिसमें पति पर पत्नी को भद्दे व्हाट्सएप संदेश भेजने का आरोप था.
इस मामले में पत्नी ने पति पर एफ़आईआर दर्ज कराई थी. पति ने मामले को ख़ारिज करने के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.
हालांकि कोर्ट ने ये व्यवस्था भी दी कि पति की हरकत आईपीसी की धारा 509 के तहत दंडनीय है, जिसमें किसी महिला की अस्मिता को चोट पहुंचाने के इरादे के लिए सज़ा का प्रावधान है.

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