महिला दिवस: पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल से क्या कहना चाहेंगी ये महिलाएं?

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- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ मार्च यानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स प्रेरणादायक महिलाओं को समर्पित करने की बात कही थी.
उन्होंने ट्वीट करके कहा था ''इस महिला दिवस पर मैं अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स उन महिलाओं को समर्पित कर दूंगा, जिनकी जिंदगी और जिनका काम हम सभी को प्रेरित करता है. इससे ये महिलाएं लाखों लोगों का हौसला बढ़ाने में मदद कर सकेंगी. अगर आप भी ऐसी महिला हैं या दूसरों के लिए प्रेरणा बनने वाली महिलाओं के बारे में जानती हैं तो उनकी कहानी #SheInspiresUs पर साझा करें.''
बीबीसी ने देश की कुछ महिलाओं से बात की और उनसे पूछा कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कोई बात रखनी हो तो वो क्या होगी और वो प्रधानमंत्री मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट्स के ज़रिए क्या संदेश देना चाहेंगी ?

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ज़ैनब और फ़ातिमा
ज़ैनब और फ़ातिमा तब चर्चा में आई थीं जब शाहीन बाग में सुप्रीम कोर्ट की ओर से मध्यस्थता के लिए वार्ताकार आए थे. इन दोनों लड़कियों ने उस वक़्त बहुत मुखर होकर वार्ताकारों के सामने अपनी राय रखी थी.
पीएम नरेंद्र मोदी से ज़ैनब और फ़ातिमा का कहना है, ''दया और करुणा ऐसे आदर्श हैं जो धर्मों के बीच भेदभाव नहीं करते हैं. तो चलिए हम सब और ज़्यादा मिल-जुलकर रहें. सबका साथ, सबका विकास!''''हमारे प्रधानमंत्री ट्रिपल तलाक के मामले में मुस्लिम महिलाओं के लिए मसीहा की तरह सामने आए थे. अब शाहीन बाग की महिलाएं सड़कों पर हैं, और मसीहा का इंतज़ार कर रही हैं, ताकि वो उनकी नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर से जुड़ी चिंताओं का हल करें.''''आर्थिक मंदी का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर होता है. नोटबंदी और जीएसटी का प्रयोग पूरी तरह नाकाम रहा. लोगों को कपड़ों से पहचानने की बजाय, चलिए सब साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को सुधारने, भ्रष्टाचार को रोकने, रोज़गार के अवसर पैदा करने और महंगाई पर लगाम लगाने की दिशा में काम करें. क्योंकि दिल्ली हिंसा के मामले में कपड़ों ने दंगाइयों को पहचानने में मदद नहीं की.''

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मैथिली ठाकुर
19 साल की मैथिली ठाकुर क्लासिकल प्लेबैक सिंगर हैं.
मैथिली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहना चाहती हैं, ''दिल्ली में हाल के दिनों में जिस तरह का तनावपूर्ण माहौल रहा है, उसे देखते हुए अगर मुझे मौका मिला तो मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट से संदेश देना चाहूंगी कि सभी लोग शांति बनाए रखें और एक दूसरे की इज़्ज़त करें.''
''कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई है, इसके लिए मैं लोगों से अमन की अपील करते हुए ट्वीट करना चाहूंगी, ताकि उसे पढ़कर सभी लोग शांत हो जाएं और जो भी गलत चीज़ें हो रही हैं वो ठीक हो जाएं.''
''दूसरा संदेश ये होगा कि अभी भी महिलाएं अपने फ़ैसले ख़ुद नहीं ले पाती. हालांकि पिछले कुछ वक़्त में ये स्थितियां बदली हैं. अब कई करियर ऑप्शन हैं. जिसे कई बार हमारे परिजन नहीं समझ पाते हैं. उन्हें कई बार लगता है कि लड़कियों के लिए टीचर, डॉक्टर या इंजीनियर जैसे पेशे ठीक हैं. इस मिथ को तोड़ना चाहूंगी क्योंकि कला के क्षेत्र में या ऐसे ही कई दूसरे क्षेत्रों में भी कई विकल्प हैं, जिन्हें लड़कियां चुनना चाहती हैं.''

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तृप्ति देसाई
तृप्ति देसाई एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने का मुद्दा उठाया था.
तृप्ति देसाई कहती हैं, ''महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को अपने सोशल मीडिया अकाउंट समर्पित कर दिए, इसका मैं स्वागत करती हूं. मैं प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहूंगी कि वो तीन तलाक के लिए आगे आए. लेकिन बीजेपी, सबरीमला मंदिर में आंदोलन का विरोध क्यों कर रही है. वहां भी महिलाओं को समानता का अधिकार मिलना चाहिए. इसमें प्रधानमंत्री मोदी आगे क्यों नहीं आए?''
''दूसरी बात ये कि निर्भया पर अत्याचार को सात साल हो चुके हैं. अब उनके दोषियों को तो फांसी हो रही है, लेकिन लाखों निर्भया हैं, जिन्हें न्याय नहीं मिल रहा है. इसलिए मैं चाहती हूं कि सभी पीड़िताओं को छह महीने के अंदर न्याय का प्रावधान किया जाए. इसके लिए केंद्र सरकार कब कानून बनाएगी?''
''सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान तो चला रही है, लेकिन सिर्फ ये काफी नहीं है. लड़कियों को समानता का अधिकार घर से ही मिलना चाहिए. लड़का-लड़की में भेदभाव नहीं होना चाहिए. इसलिए मोदी सरकार को अपना अभियान बदलना चाहिए. नया अभियान होना चाहिए - बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और अपने बेटे को भी समझाओ.''

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उषा चौमड़
उषा चौमड़ अब सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइज़ेशन के साथ काम करती हैं. उन्हें पद्मश्री पुरस्कार भी मिल चुका है.
उषा चौमड़ कहती हैं, ''मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं, क्योंकि वो ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने महात्मा गांधी के बाद शौच और सफाई की बात की. मैंने मैला ढोया, लेकिन मैं इस काम से बाहर निकल गई. अब अपने समाज की दूसरी औरतों को मैला ढोते हुए देखती हूं तो अच्छा नहीं लगता. मैं नहीं चाहती कि मैंने जो अपमान सहा, वो कोई भी महिला सहे. सभी को अच्छी ज़िंदगी जीने का हक है.''
''इसलिए मैं उन महिलाओं से कहना चाहती हूं कि वो इस काम से बाहर निकले और कोई ऐसा काम सीखें जिससे वो सम्मान की ज़िंदगी जी सकें. ऐसा कुछ भी नहीं है जो महिलाएं नहीं कर सकतीं. आज महिलाएं हवाई जहाज तक उड़ा रही हैं. सरकार को इस समुदाय के लोगों के लिए रोज़गार मुहैया कराना चाहिए. उन्हें काम मिलेगा तो वो मैला ढोने का काम करने को मजबूर नहीं होंगी. कोई नहीं चाहता ऐसा काम करना.''
''मेरी शादी दस साल की उम्र में हो गई थी, मैं नहीं चाहती कि किसी भी लड़की के साथ ऐसा हो. चाहती हूं कि लड़कियां पढ़ें लिखें और आगे बढ़ें.''

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प्रधानमंत्री के करोड़ों फॉलोवर्स
इस वक्त ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल @narendramodi को 5 करोड़ 33 लाख से भी ज़्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं.
फ़ेसबुक पर पीएम मोदी के एकाउंट को चार करोड़ 47 लाख से भी ज़्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं जबकि उनके इंस्टाग्राम एकाउंट को तीन करोड़ 52 लाख लोग फ़ॉलो करते हैं.
पीएम मोदी की लोकप्रियता यूट्यूब पर भी कम नहीं है. चार करोड़ 54 लाख लोगों ने पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब किया है.
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