CAA: कन्हैया कुमार ने कहा- देश को दंगाइयों से आज़ादी चाहिए

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

पटना के गांधी मैदान में विभिन्न संगठनों की ओर से आयोजित 'संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ महारैली' को संबोधित करते हुए सीपीआई नेता कन्हैया कुमार ने केंद्र सरकार पर 'नफ़रत का व्यवसाय' करने और 'गांधी की जगह गोडसे को चुनने' का आरोप लगाया.

उन्होंने दिल्ली में हुई हिंसा का ज़िक्र करते हुए कहा कि 1947 में मिली आज़ादी के बाद अब 'देश को दंगाइयों से आज़ादी चाहिए.'

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ आयोजित इस महारैली में भारी भीड़ जुटी.

अलग-अलग दलों और मंचों के नेताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस रैली में शिरकत की.

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे स्थानों को देखने के लिए मानचित्र पर टैप करें

कन्हैया कुमार ने नागरिकता संशोधन क़ानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के विरोध में पूरे बिहार की यात्रा की थी. 'जन-गण-मन' नाम की इस यात्रा का समापन भी गुरुवार को ही हुआ है.

सुबह दस बजे से शुरू रैली में कन्हैया कुमार का भाषण शाम पौने चार बजे शुरू हुआ. जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, लोग आज़ादी के नारे लगाने लगे.

कन्हैया ने अपने भाषण की शुरुआत में देश में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के लिए सभी लोगों से दो मिनट का मौन रखवाया. उनके संबोधन से पहले फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म 'हम देखेंगे' गाई गई.

कन्हैया कुमार ने कहा, "आज चंद्रशेखर की शहादत का दिन है. जिन्हें आज़ादी से नफ़रत है, वे हमारे ख़िलाफ़ हैं. यह एक व्यक्ति की रैली नहीं है. लोग कहते थे कि विधानसभा चुनाव के कारण यह रैली हो रही है. देश बचेगा, तब न चुनाव होगा!"

कन्हैया कुमार ने नागरिकता संशोधन क़ानून का समर्थन करने के नाम पर नफ़रत का कारोबार करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "सरकार एजेंडा फेंकती है. उसका एक एजेंडा यह है कि सीएए के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. जब कोई क़ानून पास हो गया तो उसके समर्थन में प्रदर्शन करने का मतलब क्या है? जो लोग क़ानून का विरोध कर रहे हैं, उनका प्रदर्शन करना बनता है. फिर इनका विरोध क्यों?"

कन्हैया कुमार ने कहा कि वह किसी शख़्स को नागरिकता दिए जाने के ख़िलाफ़ नहीं हैं बल्कि 'नागरिकता के नाम पर हो रहे नफ़रत के व्यवसाय' के ख़िलाफ़ हैं.

उनके भाषण के अन्य मुख्य अंश आगे हैं-

  • इस देश में गांधी ज़िंदाबाद करने वालों को जेल में और गोडसे ज़िंदाबाद कहने वालों को संसद में बैठा दिया गया है.
  • हमारे जवानों के हाथ में आप रॉड थमाना चाहते हैं और अपने बेटे को बीसीसीआई का बॉस बना रहे हैं. ऐसे तड़ीपार को पहचान कर उन्हें बाहर करने का वक़्त है.
  • हम नेता बनने के लिए यह रैली नहीं कर रहे. हम चाहते हैं कि जूता सिलने वाले का बच्चा भी बीसीसीआई का पदाधिकारी बने. वह गर्व से कहे कि मैं तड़ीपार और दंगाई का बेटा नहीं हूँ.
  • इस देश में रहने वाले मुसलमानों ने जिन्ना को नहीं, महात्मा गांधी को चुना था.
  • आज गांधी दिल्ली में होते तो उसका उत्तर पूर्वी इलाक़ा जल नहीं रहा होता. इस देश की सरकार ने गोडसे को चुन लिया है, जनता तय करे कि उसने गांधी को चुनना है या गोडसे को.
  • आज की तारीख़ में गाँधी की महानता और आंबेडकर की समानता की ज़रूरत है.
  • कपिल मिश्रा के ऊपर देशद्रोह का मुक़दमा नहीं किया गया लेकिन कोई विद्यार्थी सवाल पूछेगा तो उसपर देशद्रोह का मुक़दमा कर दिया जाएगा. आठ-दस साल की बच्चियों पर देशद्रोह का मुक़दमा कर दिया गया.
  • अंग्रेज़ों ने डिवाइड एंड रूल की नीति अपनाई थी, भाजपा सरकार डेविएट एंड रूल की नीति अपना रही है.
  • यह आग बुझेगी. आपका नाम आग लगाने वाले लोगों में और हमारा नाम आग बुझाने वालों में शामिल होगा.
  • मुझपर नौ बार हमला हुआ. हम नहीं भागे. देख लो, हमारी यात्रा पूरी हुई है.
  • आज अगर देश का बच्चा-बच्चा आज़ादी के नारे लगा रहा है तो समझ लीजिए कि सन 47 की आज़ादी के बाद अब देश को दंगाइयों से आज़ादी चाहिए.
  • एक तरफ़ गांधी को मानने वाले लोग हैं, दूसरी तरफ़ ट्रंप के तलवे चाटने वाले लोग हैं. यह देश सर्व संप्रभु देश है. हम इस आज़ादी को बचाकर रहेंगे.
  • मोबाइल ने हमें ताक़त दी है लेकिन ये लोग उसी मोबाइल का इस्तेमाल कर कन्हैया और कामरान को लड़ा रहे हैं.
  • कहाँ जा रहा है बजट, कहाँ ख़र्च हो रहा है हमारा पैसा? जब पूरा देश एनआरसी में उलझा था, तब इन्होंने एलआईसी को बेच दिया और अब बैंकों को बेचने की तैयारी है.
  • आप अपने कॉरपोरेट दोस्तों के साथ गलबहियां करना बंद कीजिए, इस देश के बैंक मुनाफ़े में आ जाएँगे.
  • नफ़रत से नफ़रत को नहीं हरा सकते. नफ़रत को हराने के लिए मोहब्बत की ज़रूरत पड़ती है. आप सावधान हो जाइए. जिन्ना ने सावरकर की हिंदू महासभा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. वे गांधी के दोस्त नहीं थे.
  • आप धर्म के नाम पर सियासत करने वाले लोगों से सावधान रहिए. इस धरती पर हम धर्म के नाम पर दंगा-फ़साद नहीं होने देंगे.
  • बिहार मांगे रोज़गार, नहीं चाहिए एनपीआर. हम एनपीआर और रोज़गार दोनों की लड़ाई एक साथ लड़ेंगे.
  • हम लोग धारा के विपरीत खड़े हैं. जात और धर्म का नेता बनना आसान होता है, हम लोगों को जात धर्म की इस लड़ाई में नहीं पड़ना है.

राष्ट्रगान गाने के दौरान कन्हैया आख़िर में दो पंक्तियां भूल गए जिससे रैली में आए लोग थोड़ा चौंक गए. उन्होंने अपने भाषण के आख़िर में सभी से संविधान की प्रस्तावना का पाठ करवाया.

कन्हैया की यात्रा

सीपीआई नेता कन्हैया कुमार ने 30 जनवरी यानी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बिहार के पश्चिम चंपारण से 'जन गण मन यात्रा' शुरू की थी.

यह यात्रा नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता सूची (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या सूची (NPR) के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज कराने के लिए निकाली गई थी.

'जन गण मन यात्रा' के बारे में कन्हैया ने ट्विटर पर बताया था कि वह बिहार के सभी 38 ज़िलों से होते हुए क़रीब 4,000 किमी की यात्रा करके पटना पहुंचेंगे.

हालांकि, यात्रा के दौरान गोपालगंज और छपरा ज़िले में कन्हैया के क़ाफ़िले पर पथराव की घटनाएं भी सामने आईं.

इस साल के आख़िर में बिहार में विधानसभा चुनाव संभावित हैं. ऐसे में कन्हैया की यात्रा के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं.

अन्य नेता क्या बोले

अब तक गांधी मैदान में जुटे लोगों को संबोधित कर चुके वक्ताओं ने बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ धर्मनिरपेक्ष दलों का मोर्चा बनाने की वकालत की है. महारैली को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा कि ''केंद्र की सत्ता पर क़ाबिज़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोगली ज़ुबान बोल रही है.''उन्होंने कहा, "सन 1948 में बापू को गोलियाँ मारी गईं. अब यह सरकार हमारे मुल्क को गोलियाँ मार रही है. इसका विरोध होना चाहिए. यह करना ही पड़ेगा क्योंकि देश को बाँटने वाली ताक़तों को हम कैसे आगे बढ़ने दे सकते हैं. ये लोग मुल्क के ज़ेहन में ज़हर घोल रहे हैं. गोली मारने के नारे लगवा रहे हैं. हमें ख़ुद को आज़ादी के लायक़ करना होगा."

इसी महारैली में चर्चित सोशल एक्टिविस्ट मेधा पाटकर ने कहा कि कल रात शाहीन बाग़ और जाफ़राबाद में रहते हुए मैं यह महसूस कर रही थी कि शायद यह अपराध होगा. उन्होंने कहा, "दिल्ली के तख़्त को धक्का देना है तो यह पटना के गांधी मैदान से ही संभव है. मुझे विश्वास है कि बिहार से फिर एक आंदोलन उभरेगा. शाहीन बाग़ और जाफ़राबाद में सरकार जो हिंसा फैला रही है, उसके ख़िलाफ़ आपका संकल्प गद्दी हिला देगा. हमें अपनी जाति और मज़हब के नाम पर चलने वाली वोट बैंक की राजनीति की गुंडागर्दी को बाज़ू में रखकर आगे बढ़ना होगा."इससे पहले आज सुबह से ही पटना की विभिन्न सड़कों पर सैकड़ों लोगों के अलग-अलग जत्थे गांधी मैदान की तरफ़ आने लगे थे. अधिकतर लोगों ने अपने हाथों में तिरंगा ले रखा था. रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं की भी भागीदारी रही.

महारैली को पूर्व आइएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि आज इस अत्याचार और हिंसा के ख़िलाफ़ खड़े होने की ज़रूरत है.उन्होंने कहा, "पहले नागरिक सरकार को चुनते थे, अब सरकार नागरिक को चुनने की क़वायद कर रही है. एनआरसी और एनपीआर इस देश के हर नागरिक के ख़िलाफ़ है, यह हिंदू या मुसलमान के ख़िलाफ़ नहीं है. हमें पता है कि सरकार कैसे काम करती है. सरकार कहती है कि काग़ज़ दिखाओ. जिनके पास काग़ज़ नहीं है, क्या वे इस देश के नागरिक नहीं हैं?"

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