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कन्हैया कुमार ने बताया क्या वो वाकई पीएम मोदी के लिए चुनौती हैं
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
हाल ही में इंटनेशनल न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें नरेंद्र मोदी के एक निकटतम सहयोगी के हवाले से लिखा गया था कि भारत में अपने प्रतिद्वंदी के तौर पर मोदी सरकार इस वक्त जेएनयू के पूर्व छात्र नेता और पिछले लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से लेफ्ट के उम्मीदवार कन्हैया कुमार को सबसे बड़ा ख़तरा मान रही है.
नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए कन्हैया कितनी बड़ी चुनौती बन गए हैं और उनसे सरकार कितना डर रही है, उसे प्रधानमंत्री के सहयोगी के हवाले से ही रिपोर्ट में इस तरह कहा गया है "केंद्र सरकार की बारीक नज़र न केवल कन्हैया के व्यक्तिगत और सार्वजनिक क्रियाकलापों पर है बल्कि उनके बैंक अकाउंट और उनके ख़र्च पर भी है."
कन्हैया इन दिनों बिहार में एक यात्रा कर रहे हैं. यह यात्रा संसद में पास हो चुके नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए), नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) और नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन (NRC) के विरोध में हो रही है. उनकी कई सभाओं में भारी भीड़ जुट रही है.
27 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में प्रस्तावित "देश बचाओ-नागरिकता बचाओ" नाम से एक बड़ी रैली होने वाली है. इसकी तैयारी के लिए कन्हैया कुमार रैली कर रहे हैं.
कन्हैया का विरोध भी
ऐसा भी नहीं कि यात्रा में कन्हैया को केवल समर्थन ही मिल रहा है! एक सच यह भी है कि अभी तक जिन ज़िलों से यात्रा गुजरी है, हर जगह कन्हैया का विरोध भी हुआ है.
विरोध करने वाले भाजपा और दूसरे हिन्दूवादी संगठनों के लोग होते हैं. जिस रास्ते कन्हैया का काफ़िला जाता है वो वहीं पर खड़े रहते हैं. काफ़िले को रोककर काला झंडा दिखाते हैं. "कन्हैया गो बैक", "कन्हैया कुमार गद्दार है" के नारे लगाते हैं.
दरभंगा में ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के मैदान में कन्हैया की सभा होने के बाद एबीवीपी के छात्र नेताओं ने उस मंच को गंगाजल से धोया और कहा कि "कन्हैया कुमार जैसे देशद्रोही के आने से मंच अपवित्र हो गया था. हमने अब उसे शुद्ध कर दिया है."
बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में जब रॉयटर्स की रिपोर्ट के बारे में उनसे पूछा गया तो कन्हैया कुमार ने कहा, "ये मुझे बहुत ज़रूरी नहीं लगता क्योंकि मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं, बड़े आदमी हैं, मैं इस देश का एक साधारण नागरिक हूं. मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री एक नागरिक के तौर पर हमको इतना अटेंशन देंगे."
कन्हैया कहते हैं, "मान लीजिए कि वे नज़र रख ही रहे हैं तो ये ख़ुशी की बात है कि सरकार अपने नागरिकों को देख रही है, उनकी निगरानी कर रही है. ठीक है इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन मुझे लगता है कि ये कम है. अगर सरकार निगरानी और खयाल रखना चाहती है तो इस देश के हर नागरिक पर उतनी ही नज़र रखे जितनी कन्हैया कुमार पर रखती है."
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कन्हैया की सभाओं में भीड़ जुट रही है. कन्हैया और उनके साथियों को इसकी भी उम्मीद है कि ये भीड़ 27 फरवरी को पटना भी पहुंचेगी. लेकिन उसके बाद क्या होगा?
क्या हैं मांगें
कन्हैया कहते हैं, "हम लोगों की मांग बहुत स्पष्ट है. हम कह रहे हैं कि देश में बेकारी 45 साल में सबसे ज़्यादा है. किसानों की आत्महत्या की दर सबसे ज़्यादा है, महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है, सरकारी संपत्तियां और उपक्रम बेचे जा रहे हैं, छोटे उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं और इस देश के नौजवनानों को एक गैर ज़रूरी मुद्दे में उलझाया जा रहा है. हमारा मानना है कि एनआरसी के मुद्दे को इसलिए उछाला जा रहा है ताकि एलआईसी बिक जाए और उसपर कोई सवाल न खड़ा हो."
कन्हैया के मुताबिक़ इस लड़ाई में CAA-NRC देश विभाजनकारी क़ानून हैं. वे कहते हैं, "देश को भड़काओ और देश को भटकाओ की नीति के तहत ऐसा किया जा रहा है. जो लोग हमारी सभाओं में आ रहे हैं उनका स्पष्ट मत है कि CAA और NRC जैसा क़ानून भारत में नहीं होना चाहिए क्योंकि ये संविधान की मूलभावना के ख़िलाफ़ हैं. इसलिए हमारी बिहार सरकार से स्पष्ट मांग है कि विधानसभा में एक रिजोल्यूशन पास किया जाए जैसे दूसरे राज्यों ने किया है. हम उम्मीद करते हैं कि सरकार हमारी सिफ़ारिश मानेगी और बिहार में CAA, NRC और NPR नहीं होगा."
यात्रा के दौरान हुए हमलों और विरोध को लेकर कन्हैया का कहना था, "ये बात सबलोगों को समझनी चाहिए कि देश के नौजवानों को किस तरह से धार्मिक उन्माद में गुमराह किया जा रहा है. एक दूसरे से लड़ाया जा रहा है. उनके हाथ में लाठी, डंडे, पत्थर थमाए जा रहे हैं. और देश के जो नेता हैं उन्होंने अपने बेटे को बीसीसीआई का सेक्रटेरी बना दिया है. यही बात हम लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं. स्वाभाविक है जो बात इतने सालों से फैलाई गई है वो केवल एक यात्रा से ख़त्म नहीं होगी."
कन्हैया कहते हैं, "लेकिन हमारी यात्रा का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है. हम किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है, किसी समुदाय के ख़िलाफ़ नहीं हैं, हम संविधान के पक्ष में हैं. इसलिए हमारा नारा है, "हमारा देश, हमारा संविधान, बापूधाम से गांधी मैदान."
कन्हैया ने कहा, "वे (विरोधी) लोग भी कहते हैं कि हम देश बचाना चाहते हैं तो क्या देश कन्हैया कुमार को काला झंडा दिखाने या गाली देने से बचेगा! हम नफ़रत को नफ़रत से नहीं मोहब्बत से हराएंगे."
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह CAA को लेकर पहले ही बयान दे चुके हैं कि सरकार इस पर एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाली है. ऐसे में पटना में रैली करके कन्हैया सरकार पर कितना दबाव बना पाएंगे?
कन्हैया कहते हैं, "देखिए, जब विरोध तेज़ होना शुरू हुआ तो दबाव में आकर सरकार एक बार यू टर्न ले चुकी है. अब बस यही है कि उसको लेफ्ट-राइट टर्न नहीं लेने देना है. इसको ऐसे समझने की ज़रूरत है कि यही गृह मंत्री कहते थे कि पूरे देश में एनआरसी लागू कराएंगे. लेकिन, रामलीला मैदान में आकर प्रधानमंत्री बोलते हैं कि एनआरसी की कोई ही बात ही नहीं हो रही है. हमको तो लगता है कि सरकार एक इंच नहीं पांच फीट पीछे हो चुकी है."
बिहार चुनाव और कन्हैया की यात्रा
कुछ लोगों का मानना है कि कन्हैया कुमार यह यात्रा बिहार में आने वाले विधानसभा चुनाव को भी ध्यान में रखकर कर रहे हैं.
इस पर कन्हैया कहते हैं, "चुनाव तो हमेशा होते रहते हैं. कभी विधानसभा, कभी लोकसभा. लेकिन हम जो काम कर रहे हैं कि वो केवल बिहार के लिए या केवल बिहार में ही थोड़ी कर रहे हैं. इतना तय मानिए कि ये सब हम बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इसके पहले बंगाल में भी कर चुके हैं, वहां तो कोई विधानसभा चुनाव नहीं था."
क्या भविष्य में कन्हैया कुमार और प्रशांत किशोर एक साथ दिख सकते हैं? कन्हैया कहते हैं कि ये हाल हर पार्टी में है. इस मुद्दे पर सारी पार्टियां दो धड़ों में बंटी हैं. एक जो है वो उतनी रुचि नहीं दिखा रही है जबकि दूसरा धड़ा सड़क पर आकर विरोध कर रहा है. मुझे लगता है कि उधेड़बुन से बाहर आकर बिना राजनीतिक गुणा-गणित और समीकरण के सच के साथ लोगों को इसके ख़िलाफ़ खड़ा होना चाहिए.
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