वो डर जिसके चलते लाइनों में लग रहे हैं हैदराबाद के बुजुर्ग

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- Author, दीप्ति बथिनी
- पदनाम, बीबीसी तेलुगू, हैदराबाद से
46 साल की सुलताना ने वारंगल से हैदराबाद जाने के लिए सुबह-सुबह की ट्रेन पकड़ी है.
सुलताना एक प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं.
130 किलोमीटर की दूरी तय करके उन्हें अपनी शादी का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए हैदराबाद जाना पड़ रहा है.सुलताना और उनके पति की शादी को 37 साल हो चुके हैं.
लेकिन पहली बार सुलताना को शादी के प्रमाण पत्र की ज़रूरत महसूस हो रही है.
इस बारे में सुलताना ने बताया, "जब हमारी शादी हुई थी तब हमें निकाहनामा की प्रति मिली थी. यह हमारे विवाह का प्रमाण पत्र था. लेकिन जिस तरह से अब एनआरसी और सीएए की बात हो रही है, उसे देखते हुए हमें लगता है कि शादी का प्रमाण पत्र होना चाहिए. निकाहनामा की प्रति हमारा निकाह कराने वाले क़ाज़ी साहब ने सौंपी थी. लेकिन शादी का प्रमाण पत्र तो सरकार की ओर से जारी प्रमाण पत्र होता है. उसमें हमारी जन्मतिथि के अलावा राष्ट्रीयता का विवरण भी होता है. इसलिए हम यह प्रमाण पत्र बनवाना चाहते हैं."
शादी प्रमाणपत्र बनवाने वालों की संख्या बढ़ीशादी का प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्था हैदराबाद स्थित वक्फ़ बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर, 2019 के बाद से प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है.
इन अधिकारियों के मुताबिक़, अमूमन हर दिन 150 नए शादीशुदा जोड़ों की तरफ़ से प्रमाण पत्र के लिए आवेदन हासिल होते थे लेकिन बीते दो महीनों से अधिकारियों को हर दिन 500 आवेदन मिल रहे हैं.
इन अधिकारियों के मुताबिक़ इन आवेदनों में चार दशक से शादीशुदा जोड़ों के आवेदन भी शामिल होते हैं, ये एक अंतर भी देखने को मिल रहा है.तेलंगाना वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद सलीम का कहना है कि जब से संसद ने नागरिकता संशोधन क़ानून को पारित किया है तब से वैवाहिक प्रमाणपत्र बनवाने के आवेदन बढ़ गए हैं.

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मोहम्मद सलीम ने बताया, "लोग वैवाहिक प्रमाणपत्र के लिए इसलिए आवेदन कर रहे हैं क्योंकि इस प्रमाण पत्र में आवासीय पता, राष्ट्रीयता और जन्मतिथि सब दर्ज होते हैं. पहले लोग शादी का प्रमाण पत्र नहीं बनवाते थे. लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि इसमें सारे विवरण दर्ज होते हैं, इसलिए इसे बनवाया जाए. जबसे एनआरसी को लेकर चर्चा बढ़ी है, तब से वैवाहिक प्रमाण पत्र के लिए आवेदन भी बढ़े हैं."सुलताना को शादी का प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए वक्फ़ बोर्ड के दफ्तर में पूरा दिन बिताना पड़ा.
सुबह 10 बजे दफ्तर पहुंचने के बाद सुलताना से तत्काल सर्टिफ़िकेट का आवेदन पत्र 400 रुपये में ख़रीदा.
तत्काल सर्टिफिकेट आवेदन के दिन ही जारी हो जाते हैं जबकि रेगुलर सर्टिफिकेट आवेदन के पांच दिनों के बाद जारी होते हैं.सुलताना ने आवेदन पत्र के विवरण भरने के बाद उसके साथ निकाहनामा संलग्न कर दिया.
इसके बाद वह वेरिफेकिशेन की क़तार में खड़ी हो गईं.
उनके दस्तावेज़ों के वेरिफिकेशन के बाद उन्हें एक टोकन नंबर मिला. इसके बाद सुल्ताना ने अपनी बारी आने तक इंतज़ार किया.सुलताना ने बताया, "मैं पूरी दिन की तैयारी के साथ यहां आई हूं. एक सर्टिफ़िकेट के लिए मैं कई बार यहां के चक्कर नहीं लगाना चाहती थी. मैंने पास के रेस्टोरेंट में ही खाना खा लिया है. अब मुझे इंतज़ार करना है. मुझे कहा गया है कि मेरा नंबर चार बजे के क़रीब आएगा, तब मुझे प्रमाण पत्र मिल जाएगा."

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लेकिन सुलताना के कामों की सूची यहीं समाप्त नहीं हुई है.
वह बताती हैं कि उनके परिवार के सदस्यों ने जन्म प्रमाण पत्र भी फिर से जारी कराने के लिए आवेदन दिए हैं.सुलताना ने बताया, "मेरे पति का जन्म 1953 में हुआ था. लेकिन उनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. इसलिए वह दसवीं परीक्षा पास करने के सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल करते हैं, यह जन्म तिथि के प्रमाण के तौर पर सरकार से मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र है.""लेकिन दसवीं के सर्टिफिकेट में मेरे पति के नाम की स्पेलिंग ग़लत है. इसलिए पहले हमें उनके नाम में संशोधन का आवेदन देना पड़ा और उसके बाद जन्म प्रमाण पत्र का आवेदन. उन्हें अपने जन्म प्रमाण पत्र की कभी ज़रूरत नहीं पड़ी. ना ही पढ़ाई के दौरान, ना ही पासपोर्ट बनवाने के दौरान और ना ही नौकरी करने के लिए. वह अपने वोटर आईडी कार्ड या राशन कार्ड या फिर दसवीं के सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल पहचान पत्र के तौर पर करते रहे."
चिंता का माहौल
लेकिन सुलताना चिंतित हैं, उनके मन में कहीं ना कहीं यह भाव है कि उन्हें और उनके परिवार को शायद इन सब प्रमाण पत्रों की ज़रूरत नहीं हो लेकिन वह यह सब बनवा लेना चाहती हैं ताकि शांति से रह पाएं.
अपनी चिंता के बारे में उन्होंने बताया, "जब समय आएगा तब हम नहीं जानते हैं कि हम से कौन सा प्रमाण पत्र मांगा जाएगा. मेरे तीन बेटे हैं. मेरा बड़ा बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. उसके मुताबिक़ हम लोग बिना किसी वजह के चिंतित हैं. वह सोचता है कि मैं और मेरे पति इन प्रमाणपत्रों को हासिल करने के लिए समय और ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं. लेकिन हमारा मानना है कि सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नागरिकता साबित करने के लिए किस प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी, इसलिए हमलोग वह सारे प्रमाण पत्र जुटा रहे हैं, जो हमारी मदद कर सकता है."
दस्तावेज़ी ज़िंदगी
सुलताना यह भी बताती हैं कि उनके दोस्तों और पारिवारिक रिश्तेदारी में हर कोई अपने दस्तावेज़ बनवा रहा है.
उन्होंने अपने फोन में परिवारिक रिश्तेदारों के व्हाट्सऐप पर बने ग्रुप को दिखाया, जिसमें वह अपने कजिन भाई बहनों से इस बारे में बात कर रही हैं कि किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी?सुलताना ने बताया, "हमलोगों ने एक चेकलिस्ट बनाया है. कुछ दस्तावेज़ तो ज़मीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ होते हैं जो कॉमन होते हैं. हमने एक कॉमन फोल्डर बनाया है और उनमें हमारे दस्तावेज़ जमा कर रहे हैं ताकि परिवार का हर सदस्य उसे देख सके. हम लोगों ने दस्तावेज़ों के स्टेट्स को जानने के लिए हर दिन शनिवार का दिन निश्चित किया है. दूसरे दोस्तों के ग्रुप में या फिर नमाज़ पढ़ने वालों के ग्रुप में भी इन दिनों ज्यादातर बातचीत एनपीआर, एनआरसी और सीएए को लेकर होती है."सुलताना जब अपने सर्टिफ़िकेट के लिए इंतज़ार कर रही थीं, उनके साथ कम से कम 20 दूसरे लोग भी अपने सर्टिफिकेट के लिए इंतज़ार कर रहे थे.

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सुलताना बताती हैं कि जब से नागरिकता संशोधन क़ानून पारित हुआ है तब से उन्हें ऐसी निराशा है जिसे वे एक्सप्लेन भी नहीं कर पा रही हैं.सुलताना बताती हैं, "हैदराबाद में काफ़ी मुसलमान है लेकिन मेरा जन्म वारंगल इलाक़े में हुआ था. मैं आज भी वहीं रहती हूं जो ज्यादातर हिंदू रहते हैं. मैं हिंदू दोस्तों के बीच में पली बढ़ी. मेरे अधिकांश पड़ोसी हिंदू हैं. एक दूसरे के घरों में हमारा खाना पीना रहा है. बच्चों के जन्म से लेकर किसी की मौत तक हम सब लोग एक दूसरे के साथ होते हैं. लेकिन मैं उन लोगों को कोई दस्तावेज़ बनवाने के लिए दौड़ भाग करते नहीं देख रही हूं. उन्हें किसी बात की चिंता भी नहीं है.""मैं ये जानती हूं कि मेरे कुछ दोस्तों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. कुछ कई दशकों से शादी शुदा है लेकिन उनके पास भी शादी का प्रमाण पत्र नहीं है. परिवार की पहचान के लिए उनके पास राशन कार्ड है. मेरे पास भी राशन कार्ड है लेकिन मैं चिंतित हूं और वे चिंतित नहीं दिखाई दे रहे हैं."
डर का माहौलसुलताना यह भी कहती हैं कि नागरिकता संशोधन क़ानून के पारित होने के बाद ना तो किसी ने ज़िक्र किया है और ना ही किसी ने लोगों को नागरिकता साबित करने को कहा है लेकिन एक तरह के डर का भाव बन गया है जिसमें सुलताना और उनके समुदाय के लोगों को इन दस्तावेजों को एकत्रित करना पड़ रहा है.दुखी भाव से सुल्ताना ने बताया, "इतने सालों के बाद भी, मैं वहीं हूं जो काग़ज़ का एक टुकड़ा मेरे बारे में बताएगा."सुलताना के टोकन नंबर की घोषणा होती है. वह अपना सर्टिफ़िकेट हासिल कर लेती हैं. इसके बाद सुलताना अपने पति को फोन करके इसकी जानकारी देती हैं.
वह फोन पर अपने पति को बताती हैं कि वह वक्फ़ बोर्ड के दफ्तर से निकल रही है और वारंगल की ट्रेन पकड़ने जा रही है.सुलताना की तरह ढेरों लोग, पहली बार सरकारी दफ्तरों में जाकर अपने दस्तावेज़ों के लिए आवेदन कर रहे हैं.
कई लोग अपने दस्तावेज़ों को फिर से इश्यू करा रहे हैं. उदाहरण के लिए हैदराबाद नगर निगम के दफ्तर में वैसे लोग पहुंच रहे हैं जो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने और उसका आवेदन कैसे करें, इसके बारे में जानना चाहते हैं.अमूमन, विभिन्न सरकारी योजनाओं को प्रदान करने वाली सिंगल सर्विस प्रोवाइडर का काम करती है मी सेवा सेंटर. इन सेंटरों में जन्म प्रमाण पत्र का आवेदन कर सकते हैं.

बुजुर्ग भी लगे लाइन में
लेकिन हैदराबाद नगर निगम के अधिकारियों ने हमें बताया कि 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग भी पूछने पहुंच रहे हैं कि क्या उनका जन्म प्रमाण पत्र बन सकता है.एक अधिकारी ने बताया, "हमारे पास पढ़े लिखे लोग भी जानकारी हासिल करने पहुंचते हैं. ऐसे लोग भी हैं जिनके पास दूतावास की ओर से जारी किए गए सर्टिफिकेट हैं लेकिन वे जन्म प्रमाण पत्र बनवाना चाहते हैं. हमारे पास अभी एक डॉक्टर आए थे. उनका जन्म मस्कट में हुआ था, उनके माता पिता भारतीय हैं. ऐसी सूरत में, दूतावास जन्म प्रमाण पत्र जारी करता है, जो एक वैध दस्तावेज़ है. लेकिन वे निश्चित नहीं थे कि यह प्रमाण पत्र काफ़ी है या नहीं. पूछताछ के लिए ऐसे कई लोग आए हैं. इनमें से अधिकांश लोग एक ख़ास समुदाय के हैं. एक 60 साल के बुज़ुर्ग आए थे और वे पूछ रहे थे कि क्या उनके पिता का जन्म प्रमाण पत्र बन सकता है?"हैदराबाद में 700 मी सेवा सेंटर हैं. अधिकारियों के मुताबिक़ अकेले जनवरी में, 21882 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए. जबकि दिसंबर में 13688 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए वहीं नवंबर में 11210 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए थे. दिसंबर और जनवरी में चारमीनार, खैरताबाद, घोषामहल जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, अधिकारियों के मुताबिक यह मुस्लिम आबादी की बहुलता वाले इलाक़े हैं.27 साल के बशीर ने पेशेवर काम-काज से दो दिनों की छुट्टी ली है. मार्केटिंग की दुनिया में काम करने वाला बशीर अपना और अपने परिवार वालों के जन्म प्रमाण पत्र के लिए मी सेवा सेंटर पहुंचे हैं. उनके दादाजी 1940 में पाकिस्तान से यहां आए थे. बशीर के मुताबिक उनका छोटा सा कारोबार था.बशीर बताते हैं, "मेरे पिता का जन्म 1943 में हैदराबाद में हुआ था. उनकी पढ़ाई लिखाई यहां हुई, शादी यहां हुई. उनकी संपत्ति यहां है लेकिन उनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. हम नहीं जानते हैं कि इस मामले में क्या होगा?"

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