परवेश वर्मा: शाहीन बाग़ में लोग जिहाद की बात करते हैं

- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा सांसद और बीजेपी के नेता परवेश वर्मा ने एक विवादित बयान दिया जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनको दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर करने का आदेश दिया है. परवेश वर्मा बीजेपी की स्टार प्रचारको की लिस्ट में शामिल थे.
परवेश वर्मा ने सीएए के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे लोगों के बारे में कहा था, ''वहां (शाहीन बाग़ में) लाखों लोग जमा होते हैं. दिल्ली के लोगों को सोचना होगा, और फ़ैसला करना होगा. वे आपके घरों में घुसेंगे, आपकी बहन-बेटियों के साथ बलात्कार करेंगे, उन्हें क़त्ल कर देंगे. आज ही वक़्त है, कल मोदी जी और अमित शाह आपको बचाने नहीं आ पाएंगे''.
बीबीसी ने जब उनसे पूछा कि आपने ऐसा बयान क्यों दिया तो उनका कहना था, "जब शाहीन बाग़ में बैठे लोग जिहाद की बात करते हैं, वहां पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते हैं और जिन्ना वाली आज़ादी की बात करते हैं तो इससे ये साफ़ हो जाता है कि आगे क्या होना वाला है, अगर मैंने ऐसा कहा तो मैंने क्या कुछ ग़लत कहा."

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15 दिसंबर से शाहीन बाग़ में महिलाएं विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. परवेश वर्मा कहते हैं कि वहां पाँच लाख लोग इकट्ठा हो गए हैं लेकिन कोई उन्हें वहां से हटा नहीं पा रहा है. हालांकि शाहीन बाग़ की एक सड़क के पास प्रदर्शनकारी बैठें हैं और उनकी संख्या ज़्यादा से ज़्यादा 5-10 हज़ार होती है.
जब परवेश वर्मा से पूछा गया कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है. लेकिन फिर भी प्रदर्शनकारियों को नहीं हटा रही है, बीजेपी इसे एक चुनावी मुद्दा क्यों बना रही है?
तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''दिल्ली के मुख्यमंत्री कहते हैं कि मैं शाहीन बाग़ के साथ खड़ा हूं अगर वो उनके साथ खड़े हैं तो उन्हें वहां जाकर उन्हें हटाना चाहिए.''
दिल्ली में पुलिस हमारी है लेकिन चुनाव के माहौल में हम वहां 10 हज़ार पुलिस वाले कैसे भेजें? आप चाहते हैं वहां गोलियां चलें, पत्थरबाज़ी हो?
चुनाव की घोषणा होने से पहले दिल्ली के शाहीन बाग़ में ये प्रदर्शन चल रहा है. लेकिन परवेश वर्मा का कहना है कि पूरे देश में हर जगह प्रदर्शन सिर्फ़ चार-पांच दिन चल कर बंद हो गए. आज देश में कहीं भी प्रोटेस्ट नहीं हो रहे हैं. लेकिन हक़ीक़त ये है कि उत्तप्रदेश, पटना, दिल्ली समेत देश के कई इलाक़ों में प्रदर्शन आज भी जारी हैं.

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यहां तक की ख़ुद दिल्ली में ही शाहीन बाग़ की तरह चार-पाँच जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सैकड़ों की संख्या में महिलाएं बैठी हैं.
इस पर परवेश वर्मा कहते हैं, ''कोई भी प्रोटेस्ट एक-एक महीने नहीं चल रहा है. कोई मुख्यमंत्री नहीं कह रहा है कि मैं इनके (प्रदर्शनकारियों) के साथ खड़ा हूं. उनको भड़का कौन रहा है?"
लेकिन सच्चाई ये है कि केरल, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री न केवल सीएए के मामले में प्रदर्शनकारियों के साथ हैं बल्कि वहां की विधासभा से एक प्रस्ताव भी पास किया जा चुका है जिसमें केंद्र सरकार से सीएए को वापस लेने की अपील की गई है.
लेकिन परवेश वर्मा ने अपने भाषण में जो कहा क्या उसे भड़काऊ नहीं कहा जाएगा? प्रदर्शन कर रहे लोगों को रेपिस्ट कहना, क्या इसे इस तरह न देखा जाए कि ये दिल्ली के लोगों को डराने की कोशिश है?
परवेश वर्मा बार-बार जिहाद की बात करते हुए कहते हैं, ''कश्मीर में क्या हुआ सब जानते हैं, अभी दिल्ली में उनकी संख्या पाँच लाख है अगर पचास लाख हो गई तो यहां भी वही होगा जो मैं कह रहा हूं. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि मैं रोज़ बहुत से भाषण देता हूं और 90 प्रतिशत यही बात कहता हूं कि दिल्ली के लोग अपना वोट विकास को ध्यान में रख कर ही दें.''
भाजपा के नेताओं की तरफ़ से लगातार इस तरह के भड़काऊ बयान देखे जा रहे हैं. चुनाव आयोग ने परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की है.
चुनाव प्रचार के दौरान अनुराग ठाकुर ने अपने समर्थकों से 'देश को ग़द्दारों को गोली मारने' के नारे लगवाए थे.अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था, "आप बटन ऐसे दबाएं कि करंट शाहीन बाग़ तक लगे"
इस बयान पर सफ़ाई देते हुए परवेश वर्मा ने कहा, "गृहमंत्री जी चाहते हैं शाहीन बाग़ का प्रोटेस्ट ख़त्म हो और लाखों लोगों की जो आवाजाही है वो आराम से हो जाए, बच्चे स्कूल जाएं, कॉलेज जाएं."
परवेश कहते हैं कि वहां बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी हो रही है, लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है लेकिन इसके लिए उन्होंने अभी तक किया क्या?

"अगर हम कुछ करेंगे तो आप लोग दिखाएंगे कि पुलिस उनको मार रही है, हटा रही है. क्योंकि वो शांति से तो वहां से हटने वाले नहीं है. जब तक दिल्ली का मुख्यमंत्री कहता रहेगा कि मैं उनके साथ खड़ा हूं, उन्हें सपोर्ट मिलता रहेगा तब तक वो नहीं जाएंगे. लेकिन जब 11 फ़रवरी को भाजपा की सरकार बन जाएगी वो एक घंटे में अपने आप अपने-अपने घर चले जाएंगे."
अपने कई भाषणों में परवेश वर्मा कह चुके हैं कि सरकारी ज़मीन पर बनी मस्जिदों को वो हटवा देंगे. इस बारे में जब उनसे पूछा गया कि एक सासंद का इस तरह के बयान देना कहां तक ठीक है तो उन्होंने कहा, "मैं आपके चैनल पर कहता हूं कि हम सरकारी ज़मीन पर बने किसी भी धार्मिक स्थल को हटा देंगे. लेकिन हमारे पास शिकायतें सिर्फ़ मस्जिदों की आती हैं. कोई मंदिर, गुरुद्वारा किसी सरकारी ज़मीन पर बने ही नहीं हैं."

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पिछले 20 सालों से भाजपा दिल्ली की सत्ता से बाहर है. परवेश वर्मा से हमने पूछा क्या इस बार बीजेपी का इतना लम्बा वनवास ख़त्म होगा?
इस पर परवेश वर्मा कहते हैं, ''ये वनवास केवल भाजपा का ही नहीं है. ये दिल्ली की जनता का भी वनवास है. अगर भाजपा का वनवास ख़त्म होता है, दिल्ली की जनता का वनवास भी ख़त्म होगा.''
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