शरजील इमाम: लड़कों की प्रेरणा बनने से देशद्रोह के आरोप लगने तक

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- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, काको (जहानाबाद) से,
जेएनयू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे शरजील इमाम कथित रूप से देशविरोधी और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में अब पुलिस की गिरफ्त में हैं.
शरजील को बिहार के जहानाबाद में काको स्थित उनके पैतृक घर से पकड़ा गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा है कि पुलिस ने शरजील को गिरफ्तार किया. लेकिन उनके परिवार का कहना है कि शरजील ने खुद ही दिल्ली पुलिस को अपने घर बुलाकर सरेंडर किया है.
शरजील की मां अफसां रहीम ने बीबीसी से कहा, "हमने पुलिस को वादा किया था कि अगर शरजील के बारे में हमें पता चलेगा तो हम अपने बेटे को पुलिस के हवाले कर देंगे. आज सुबह शरजील दिल्ली के अपने साथियों के साथ यहां आया. मुझसे मिला. घर के सभी लोगों से बातचीत की. फिर हमने दिल्ली पुलिस को सूचना देकर यहां बुलाया और उसने सरेंडर कर दिया."
उधर दिल्ली पुलिस के डीसीपी (क्राइम) राजेश देव ने शरजील की गिरफ्तारी के बाद वीडियो बयान जारी करते हुए कहा है कि शरजील को उनके घर के पास से गिरफ्तार किया गया है. वे अपने बयान में कहते हैं कि सरेंडर करने की बात फर्जी है क्योंकि सरेंडर कोर्ट में होता है.
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शरजील की गिरफ्तारी पर बिहार पुलिस के एडीजी जितेंद्र कुमार ने कहा है कि यह दिल्ली पुलिस, अलीगढ़ पुलिस और बिहार पुलिस का ज्वाइंट ऑपरेशन था, बिहार पुलिस ने पूरा सहयोग किया है.
शरजील की गिरफ्तरी पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है, "नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करने वाले शरजील इमाम का भाषण पूर्व जेएनयू छात्र नेता कन्हैया कुमार से भी अधिक ख़तरनाक है."
मंगलवार की सुबह ही पुलिस ने शरजील इमाम के बड़े भाई मुजम्मिल इमाम को हिरासत में लिया गया था. सोमवार को भी तीन लोग हिरासत में लिए गये थे. जिन्हें बाद में पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया.
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भाई मुजम्मिल को हिरासत में लेने के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे थे दबाव में आकर शरजील सरेंडर कर देंगे.
जहानाबाद के काको में जिस वक्त शरजील इमाम को पकड़ने की कवायद चल रही थी, उस वक्त हम उनके गांव में ही मौजूद थे.
काको बाज़ार के पास एनएच 10 से जो रास्ता शरजील की घर की तरफ जाता है उसका नाम उनके पिता के नाम पर है - अकबर इमाम पथ.
इस सड़क से थोड़ी ही दूर आगे चलने पर पुराने ज़माने के तोप की एक प्रतिकृति लगी हुई है. वहां कुछ लोग खड़े थे.
शरजील के घर का पता पूछने पर उन लोगों ने एक ढहे हुए घर की ओर इशारा किया और बोले यही घर है लेकिन कोई रहता नहीं है.
लोगों ने बताया कि "इसे घर नहीं कोठी बोला जाता है. ये शरजील के पिता अकबर इमाम को भाइयों के साथ बंटवारे में मिला था. शरजील और मुजम्मिल इसे बनवाने की तैयारी कर रहे थे इसलिए इसे ढहाया गया है."

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हमारे पास जानकारी थी कि शरजील की मां गांव आई हुई हैं. यह शेयर करने पर उन लोगों ने बताया कि वो हैं तो मगर बातचीत करने के हालत में नहीं है.
दरअसल सभी लोग मुजम्मिल के रिश्तेदार और पड़ोसी ही थे. लेकिन कुछ भी बोलने से डर रहे थे क्योंकि पुलिस सुबह ही मुजम्मिल को उठाकर ले गई थी.
शरजील के चचेरे भाई सज्जाद बताते हैं, "पुलिस किसी को भी उठा ले रही है. जिस पर आरोप लगे हैं उसे तो पकड़ नहीं पा रही है और जिन लोगों का उन आरोपों से कोई वास्ता तक नहीं है, इन्हें उठा ले रही है. हम लोग भी कुछ बोलेंगे तो हमें भी उठा लिया जाएगा."
शरजील इमाम के बारे में उनकी राय पूछने पर सज्जाद कहते हैं, "हम लोगों के लिए यह शॉक की बात है कि शरजील जैसे लड़के पर देशद्रोह का आरोप लगा है. आप काको के एक-एक आदमी से पूछ लीजिए. सब उसके बारे में पॉजिटिव ही बोलेंगे चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान. पूरे प्रखंड में आईआईटी का इंजीनियर बनने वाला पहला लड़का था वो. ऑल इंडिया कंपटीशन में 208 रैंक मिला था. उसी को देखकर काको में बहुत से इंजीनियर बन गए. यहां के लड़के आज भी उससे प्रेरणा लेते हैं."

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काको जहानाबाद का एक गांव है. ये प्रखंड मुख्यालय भी है. यहां की आबादी मिश्रित है. लेकिन काको गांव में मुस्लिम बहुल आबादी है.
शरजील का घर मल्लिक टोले में पड़ता है.
उनके पिता अकबर इमाम की छवि इलाके में अच्छी है. वो दो-दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं.
2005 में आखिरी बार जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे तब 2250 वोटों से उन्हें हार मिली थी.

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शरजील के फूफा मुमताज उल हक कहते हैं, "अकबर साहब जब 2005 में चुनाव लड़े थे तब बिहार में जदयू और भाजपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रही थी. भाजपा ने यहां से अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया था. लेकिन उनकी छवि ऐसी थी वह सीट जदयू अपने खाते में लेने के लिए मजबूर हो गई. आप कह सकते हैं कि वे जदयू के बड़े नेताओं में से एक थे. मैंने अपनी आंखों से देखा है जेटली जी उनकी पीठ थपथपा रहे थे."
पिता के इंतकाल के बाद शरजील के भाई मुजम्मिल इमाम यहां की राजनीति देखने लगे. हाल तक वे जदयू के प्रखंड महासचिव थे.
लेकिन शरजील स्थानीय राजनीति में कभी नहीं पड़े. उनके चाचा के बेटे दानिश कहते हैं, "यहां तो वह आते भी कम थे. इसी मोहल्ले के नए लड़के उनको चेहरे से नहीं पहचानते होंगे. जब आईआईटी निकाले थे तभी हमलोगों को भी पहली बार उनके नाम के बारे में पता चला था. "
शरजील की प्रारंभिक पढ़ाई काको से हुई है. लेकिन बाद में वे पटना के सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ने के लिए चले गए. वहां से डीपीएस वसंत कुंज और फिर आईआईटी पोवई से कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग और अब जेएनयू से पीएचडी.

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लोग इंतजार कर रहे थे पुलिस के आने का. उन्हें पहले से सूचना मिल चुकी थी. इसलिए डर रहे थे बात करने से.
दानिश कहते हैं, "अभी तो दिन है इसलिए हमें पता चल गया कि पुलिस आ रही है. लेकिन रात में भी वे फोर्स लेकर आते हैं. आधी-आधी रात को घर में घुसकर कर चेक करने लगते हैं."
कुछ देर में सारे लोग वहां से अपने घरों में चले गए. दानिश हमें अपने घर ले गए. वहीं शरजील की मां थीं. वो शरजील के चाचा अरशद इमाम का घर था.

मां की हालत वाकई खराब थी. एकदम शांत और गुमसुम बैठी थीं. दोपहर के तीन बजने वाले थे. भाई मुजम्मिल को अभी तक हिरासत से छोडा नहीं गया था. उन्हें डर था कि कहीं पुलिस मुजम्मिल को भी न गिरफ्तार कर ले!
पुलिस महकमे में आखिर चल क्या रहा है? पता करने के लिए हम पहुँचे काको थाना में. लेकिन थाने के कैंपस में प्रवेश करने से कुछ पुलिसकर्मियों ने रोक दिया. बताया कि एसपी का आदेश है.
थाना के गेट के बाहर इंतजार करते हुए अचानक मोबाइल में नोटिफिकेशन आया कि शरजील को काको थाना क्षेत्र से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
थोड़ी ही देर में स्थानीय मीडिया के लोग भी आ गए. उन्हें भी थाना में प्रवेश नहीं करने दिया गया. हमें पता चल चुका था शरजील को पुलिस थाने में लेकर आ गई है.
कुछ ही पलों बाद काको थाना के बाहर सैकड़ों की भीड़ देखने के लिए इकट्ठी हो गई. नेशनल मीडिया में यह खबर चल चुकी थी कि शरजील को गिरफ्तार कर लिया गया है.
करीब दो घंटे तक शरजील को थाने में रखा गया. थाना कैंपस में पुलिस के अधिकारियों को छोड़ बाकी कोई भी अंदर नहीं जा सका.
थाने से शरजील को जहानाबाद कोर्ट ले जाया गया. कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया के बाद उन्हें दिल्ली ले जाया जाएगा.
लेकिन सवाल यह कि शरजील को कब और कहां से पकड़ा गया? क्योंकि थोड़ी देर पहले मैं उनके घरवालों के साथ घर में ही था. जबकि गिरफ्तारी भी घर से ही बताई जा रही थी.
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यह जानने के लिए हम वापस शरजील के घर पहुँचे. इस बार भीड़ पहले से काफी ज़्यादा थी. मोहल्ले के लोग अपने घरों से बाहर निकलकर शरजील के बारे में ही बात कर रहे थे.
हमनें शरजील के चाचा अरशद से पूछा कि वो जगह कौन सी है जहां से अरशद को पकड़ा गया?
वे कहते हैं, "एकदम इसी जगह से पकड़ा गया है जहां आप खड़े हैं. दिल्ली पुलिस को यहीं बुलाया गया था. हमें डर था कोर्ट में जाने से. क्योंकि आजकल माहौल बहुत खराब चल रहा है."
लेकिन कब? क्योंकि जिस वक्त गिरफ्तारी की बात बताई जा रही है उस वक्त हम उसी जगह पर थे.
अरशद कहते हैं, "हो सकता है कि आप घर से जब थाना जा रहे थे तभी हुआ हो. लेकिन इसी जगह से हुआ है यह हम आपको कसम खाकर कह सकते हैं. मीडिया वाले गिरफ्तारी दिखा रहे हैं मगर हमारे लड़के ने सरेंडर किया है. पुलिस की इतनी क्षमता नहीं कि हमारे लड़के को पकड़ ले.
शरजील के परिजनों से और बातचीत में पता चला कि जिस वक्त हम घर के बाहर खड़े थे, शरजील बगल वाले घर के अंदर थे. उनके साथ दिल्ली से दो वकील भी आए थे जो पूरे समय उनके साथ रहे.

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थाने से कोर्ट जाते वक्त शरजील कार से हाथ हिला रहे थे. वहां मौजूद पत्रकारों ने शीशा नीचे करने को कहा. लेकिन आगे पुलिस के अधिकारी थे. शरजील ने उनकी ओर इशारा करके हाथ जोड़ लिए.
जब पुलिस का काफिला शरजील को लेकर चला गया तब हमनें वहां इकट्ठे लोगों से बातचीत की.
कोई ऐसा नहीं मिला जिसने शरजील या उनके परिवार वालों की बुराई की हो.
हमें शरजील के अम्मी की एक बात याद आ गई. वो कह रही थीं, अगर आज शरजील के अब्बा जिंदा होते तो ये सब नहीं होने देते.
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