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बीबीसी हिंदी की सर्वप्रिया सांगवान को मिला रामनाथ गोयनका पुरस्कार
बीबीसी हिन्दी की संवाददाता सर्वप्रिया सांगवान को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया. सांगवान को यह पुरस्कार भारत के परमाणु कार्यक्रम की वजह से मुश्किलें झेल रहे लोगों पर आधारित उनकी स्टोरी के लिए दिया गया है.
दिल्ली में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सर्वप्रिया सांगवान को ये पुरस्कार दिया.
सर्वप्रिया सांगवान की ये स्टोरी झारखंड के जादूगोड़ा में यूरेनियम से प्रभावित लोगों की कहानी कहती है और सवाल उठाती है कि क्या ये इलाक़ा भारत के न्यूक्लियर सपनों की क़ीमत चुका रहा है?
सर्वप्रिया सांगवान को पर्यावरण और विज्ञान कैटोगरी में ब्रॉडक्रास्ट पत्रकारिता के लिए यह पुरस्कार दिया गया है.
झारखंड में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) कंपनी 1967 से यूरेनियम की माइनिंग कर रही है.
देश के न्यूक्लियर रिएक्टरों के लिए 50 सालों से वहाँ से यूरेनियम आ रहा है.
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम ज़िले में सात यूरेनियम माइंस हैं - जादूगोड़ा, भाटिन, नरवापहाड़, बागजाता, बांदुहुरंगा, तुरामडीह और मोहुलडीह. लेकिन नब्बे का दशक ख़त्म होते-होते यहां पर सैकड़ों बच्चे विकलांग नज़र आने लगे.
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि फ़र्ज़ी ख़बरें एक ख़तरे के रूप में सामने आई हैं. इन ख़बरों के पैरोकार ख़ुद को पत्रकार बताते हैं और इस शानदार पेशे को दाग़दार करते हैं.
उन्होंने कहा कि "ब्रेकिंग न्यूज़" सिंड्रोम के शोर में अवरोध और ज़िम्मेदारी के बुनियादी सिद्धांत वास्तव में कम हो गए हैं.
कोविंद ने कहा कि पत्रकार कई ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं. वे अक्सर, खोजपरक, फरयादी और न्यायाधीश की भूमिकाओं में नज़र आते हैं.
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा है कि महान सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को उजागर करने वाली कहानियों को अनदेखा किया जाता है और उनकी जगह पर मामूली बातों को तरजीह दी जाती है.
पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले अन्य पत्रकारों को भी रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किया गया.
रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार ऐसे संवाददाताओं को दिया जाता है जिन्होंने ख़तरनाक या कठिन परिस्थितियों में रह कर काम किया और सटीक समाचार दिया.
पत्रकारिता के लिए दिया जाने वाला ये पुरस्कार 2006 में शुरू हुआ और ये प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाले चुनिंदा पत्रकारों को प्रदान किया जाता है.
जूरी में जिंदल स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एवं डीन टॉम गोल्डस्टीन, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी, पत्रकार व इंडियन काउंसिल ऑफ़ सोशल साइंस रिसर्च में वरिष्ठ फ़ेलो पामेला फ़िलिपोस और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण शामिल थे.
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