दीपिका पादुकोण को लेकर ब्रैंड्स ने अपनाई ये रणनीति : प्रेस रिव्यू

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इकॉनामिक टाइम्स ने पहले पन्ने पर दीपिका पादुकोण से संबंधित एक ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है.
इस ख़बर के मुताबिक़ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में घायल छात्र नेता से मिलने जाने के बाद दीपिका पादुकोण को लेकर प्रमुख ब्रैंड अब सेफ़ गेम खेल रहे हैं.
कुछ ब्रैंड्स ने थोड़े समय के लिए दीपिका पादुकोण से जुड़े अपने विज्ञापनों की विज़िबिलिटी कम करने का फ़ैसला लिया है. माना जा रहा है कि ब्रैंड्स किसी भी विवाद से बचने की कोशिश करते हैं और यह फ़ैसला उसी तर्ज़ पर लिया जा रहा है.
दीपिका पादुकोण मौजूदा समय में 23 ब्रैंड्स का विज्ञापन कर रही हैं. हालांकि किसी ब्रैंड ने उन्हें विज्ञापन से फ़िलहाल हटाया नहीं है. दीपिका बॉलीवुड की सबसे महंगी स्टार मानी जाती हैं और एक विज्ञापन के लिए अमूमन आठ करोड़ रूपया लेती हैं.
दीपिका सात जनवरी को जेएनयू गई थीं और विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष से मिली थीं और घायल छात्रों के साथ अपना समर्थन जताया था.
इसके बाद उनकी फ़िल्म छपाक प्रदर्शित हुई है. रविवार तक इस फ़िल्म के 20 करोड़ कलेक्शन का अनुमान है, इस फ़िल्म की लागत 40 करोड़ रुपये है.
दिल्ली में रिकॉर्ड प्रदर्शन
हिंदुस्तान टाइम्स की पहले पन्ने पर छपी ख़बर के मुताबिक़ दिल्ली में 2019 में धरना प्रदर्शन रिकॉर्ड स्तर पर हुए हैं.

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इस ख़बर में सरकारी आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि 2019 दिल्ली में कुल 12,652 धरना-विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए थे. यह 2018 की तुलना में 46 प्रतिशत ज़्यादा है.
2011 से दिल्ली पुलिस ने इस तरह के आंकड़ों को एकत्रित करना शुरू किया है और तब से यह सबसे बड़ी संख्या है. इससे पहले 2015 में 11,158 धरना - विरोध प्रदर्शन हुए थे.
वैसे 2019 के आंकड़े में 15 दिसंबर तक के प्रदर्शन को शामिल किया गया है, इसलिए अंतिम दो सप्ताह के धरना प्रदर्शन को जोड़ने पर यह संख्या और बढ़ जाएगी.
सोशल मीडिया पर पोस्टिंग मौलिक अधिकार
हिंदू अख़बार ने त्रिपुरा हाई कोर्ट के उस बयान को पहले पन्ने पर जगह दी है जिसमें उच्च न्यायालय ने कहा है कि सोशल मीडिया पर पोस्टिंग एक मौलिक अधिकार है.

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त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने यह सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट के आधार पर गिरफ़्तार किए गए शख़्स की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया है.
त्रिपुरा पुलिस ने यूथ कांग्रेस के एक कार्यकर्ता को नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ लिखे पोस्ट के चलते गिरफ़्तार किया था.
त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने कांग्रेसी कार्यकर्ता को रिहा करने का आदेश देते हुए पुलिस को कहा है कि इस तरह के मामले में किसी दूसरे की गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए.
जान पहचान वाले करते हैं बलात्कार

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक ख़बर के मुताबिक़ 94 प्रतिशत बलात्कार के मामलों में अभियुक्त जान पहचान वाले होते हैं.
अख़बार नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के हवाले से लिखी ख़बर में बताया गया है कि 2018 में बलात्कार के दर्ज मामलों में 94 प्रतिशत मामलों में अपराध पीड़िता के जान पहचान के शख़्स ने किया था.
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