पीएम मोदी के कोलकाता दौरे से राजनीति गर्म

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- Author, पीएम तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिप (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के भारी विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो-दिवसीय कोलकाता दौरे से पश्चिम बंगाल की सियासत अचानक गरमाने लगी है.
मोदी शनिवार को कोलकाता आएंगे. वाम दलों और कांग्रेस ने सीएए के मुद्दे पर मोदी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है.
दूसरी ओर, मोदी के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंच साझा करने पर भी अभी रहस्य कायम हैं. ममता बनर्जी एनआरसी और सीएए के मुद्दे पर सबसे ज़्यादा मुखर रही हैं.
वाम और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने हवाई अड्डे से राजभवन के पूरे रास्ते के अलावा उन तमाम जगहों को क़िले में तब्दील कर दिया है, जहां प्रधानमंत्री के कार्यक्रम होने हैं. प्रधानमंत्री के साथ ममता की बैठक को लेकर भी क़यासों का दौर तेज़ हो गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को एक विशेष विमान से कोलकाता पहुंचेंगे. यहां वे कोलकाता बंदरगाह ट्रस्ट की 150वीं वर्षगांठ के मौक़े पर आयोजित समारोह में शामिल होने के अलावा चार हेरिटेज इमारतों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे.

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कहां-कहां जाएंगे प्रधानमंत्री
इन इमारतों में पुरानी करेंसी बिल्डिंग, बेल्वेडर हाउस, मेटकॉफ हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल हॉल शामिल हैं.
इनकी मरम्मत और साज-सज्जा का काम केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने किया है. मोदी शनिवार शाम साढ़े पांच बजे पहले करेंसी बिल्डिंग जाएंगे और वहां से सात बजे मिलेनियम पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.
उसके बाद वे बेलूर मठ जाएंगे. वहां से लौटने के बाद वे राजभवन में रात गुजारेंगे. प्रधानमंत्री नए सिरे से सुसज्जित हावड़ा ब्रिज के नए लाइट एंड साउंड शो का भी उद्घाटन करेंगे.
रविवार को प्रधानमंत्री कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं जयंती के मौके पर नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह को संबोधित करेंगे.
इस कार्यक्रम में ममता उनके साथ मंच पर रहेंगी या नहीं, इस सवाल पर अनिश्चितता कायम है.

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ममता के मंच साझा करने पर असमंजस
राज्य सरकार या तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है. पोर्ट ट्रस्ट की ओर से इस समारोह के लिए ममता को भी न्योता भेजा गया है.
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "अभी कुछ तय नहीं किया गया है. देखते हैं दीदी क्या फ़ैसला करती हैं."
दूसरी ओर, वाम दलों और कांग्रेस ने मोदी के दौरे का विरोध करने का एलान किया है. माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, "वाम मोर्चा और कांग्रेस के कार्यकर्ता मोदी के दौरे के दौरान पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे."
चक्रवर्ती आरोप लगाते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ रणनीतिक गठजोड़ है और राज्य सरकार बढ़-चढ़ कर प्रधानमंत्री के स्वागत की तैयरियों में जुटी है.
उन्होंने कहा कि वाम दल, कांग्रेस और आम लोग नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के विरोध में मोदी के दौरे के दौरान सड़कों पर उतरेंगे.
वो कहते हैं, "अगर तृणमूल कांग्रेस सरकार सचमुच एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ है तो उसे प्रधानमंत्री का स्वागत नहीं करना चाहिए."

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विरोध प्रदर्शन की तैयारी
माकपा से संबद्ध छात्र संगठन एसएफ़आई के प्रदेश सचिव श्रीजन भट्टाचार्य कहते हैं, "नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरे के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान सवाल करते हैं, "अगर मोदी को भाजपा के शासन वाले असम में आने नहीं दिया गया तो फिर पश्चिम बंगाल में पैर रखने की अनुमति क्यों दी जा रही है?''
उधर, भाजपा के सांसदों और नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल 12 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री से मिलकर राज्य की स्थिति की जानकारी देगा.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "राज्य प्रशासन के विरोध की वजह से बुधवार को वामदलों का बंद नाकाम रहा था. अब देखना यह है कि सरकार वामदलों को शनिवार को अराजकता पैदा करने से रोकती है या नहीं."
प्रधानमंत्री के दौरे और तमाम राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन की योजना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां कोई खतरा नहीं मोल लेना चाहतीं.

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क़िले में तब्दील कोलकाता
नतीजतन पूरे महानगर और ख़ासकर मोदी के काफिले के रास्ते को शुक्रवार रात से ही क़िले में तब्दील कर दिया गया है.
जिन जगहों पर प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम हैं, उनको एसपीजी और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अपने घेरे में ले लिया है.
वहां आस-पास की ऊंची इमारतों पर कमांडो तैनात कर दिए गए हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एयरपोर्ट पर एक हेलिकॉप्टर भी तैयार रहेगा. अगर एयरपोर्ट से राजभवन के रास्ते में विरोध प्रदर्शन ज्यादा हुआ तो प्रधानमंत्री को सड़क मार्ग की बजाय हेलीकॉप्टर से ले आया जाएगा.
सुरक्षा एजेंसियां गुरुवार से ही एयरपोर्ट से राजभवन तक के रास्ते के सर्वेक्षण और संभावित विरोध प्रदर्शन से निपटने की रणनीति बनाने में जुटी हैं.
राज्य ख़ुफ़िया विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से आते समय कम से कम तीन संगठनों के विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ सकता है.
ख़ुफ़िया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, "इससे पहले मोदी के दौरे के समय कभी सुरक्षा का इतना मज़बूत इंतजाम नहीं किया गया था.
पूरे रास्ते पर जगह-जगह बैरीकेड लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति मोदी के काफ़िले के सामने नहीं आ सके. वहां भारी तादाद में पुलिसवालों को तैनात किया जाएगा."
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