नीतीश से पवन वर्मा ने कहा, CAA हिन्दू-मुस्लिम को बाँटने की कोशिश

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बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी बीजेपी और नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है.
रविवार को जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव पवन कुमार वर्मा ने पार्टी प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा.
इस पत्र में बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की एक घोषणा पर उन्होंने कड़ा ऐतराज़ जताया है.
सुशील कुमार मोदी ने भी रविवार सुबह अपने ट्विटर अकाउंट से समाचारपत्रों की कुछ कतरनें शेयर की थीं.
अख़बारों की ये सभी कतरनें सुशील मोदी के एक बयान से जुड़ी हैं जिनमें सुशील मोदी के हवाले से लिखा है कि बिहार में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर का काम 12 से 28 मई तक चलेगा.

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'संशोधित एनपीआर भी नहीं चलेगा'
पवन वर्मा ने कहा कि यह पूरी तरह से एकतरफ़ा घोषणा है.
पूर्व राजनयिक पवन वर्मा ने कहा कि 'सीएए-एनपीआर-एनआरसी लोगों को आपस में बाँटने वाले हैं'.
नीतीश कुमार के नाम लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा है, ''संयुक्त रूप से सीएए-एनआरसी हिन्दू और और मुसलमानों को बाँटने और सामाजिक अस्थिरता पैदा करने की सीधी कोशिश है. इसके अलावा यह उन भारतीयों के लिए भी मुसीबत है जो ग़रीब हैं, हाशिए पर हैं और मुश्किल स्थिति में जी रहे हैं.''
वर्मा ने लिखा है, ''मैं पूरी तरह से हैरान हूँ कि उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एकतरफ़ा घोषणा कर दी कि बिहार में 12 मई से 28 मई तक एनपीआर का काम चलेगा. जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार एनआरसी की शुरुआत एनपीआर से कर रही है. एनपीआर एनआरसी का पहला चरण है. आपने कहा है कि बिहार में एनआरसी की ज़रूरत नहीं है. इसी को देखते हुए आप यह भी कहिए कि संशोधित एनपीआर भी नहीं चलेगा.''


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पवन वर्मा ने कहा कि सिद्धांत की राजनीति को छोटी अवधि के फ़ायदे के लिए क़ुर्बान नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा, ''आइडिया ऑफ़ इंडिया के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को मैं जानता हूँ और आप इसे लेकर भी क़दम उठाएंगे.''
नीतीश कुमार एनआरसी को लेकर लगभग चुप रहे हैं. नीतीश की चुप्पी से जेडीयू में एक किस्म की दुविधा भी साफ़ दिखती है.
कोई नेता इसके समर्थन में बोलता है तो कोई ख़िलाफ़ में. देश भर के मुसलमानों की तरह बिहार में भी मुसलमानों के बीच सीएए और एनआरसी को लेकर चिंताएं हैं.
बिहार में 16 फ़ीसदी मुसलमान हैं और ये नीतीश कुमार को भी वोट करते रहे हैं.

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दोबारा सोचने की अपील
पवन वर्मा ने अपने पत्र में लिखा है, ''आप हमेशा सेक्युलर इंडिया के साथ रहे हैं. यही कारण है कि मैं आपसे अपील कर रहा हूँ कि विभाजनकारी नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर पार्टी के रुख़ पर फिर से विचार करें. मैंने पहले भी इसे लेकर अनुरोध किया था. लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया. मुझे इसे लेकर बहुत निराशा हुई थी.''
जेडी(यू) ने राज्यसभा में नारगिकता संशोधन बिल का समर्थन किया था.
उस वक़्त भी पवन कुमार वर्मा ने नीतीश कुमार से इस पर दोबारा सोचने के लिए कहा था लेकिन पार्टी ने उनकी सलाह को अनसुना कर दिया था.
इस बिल के समर्थन में राज्यसभा में बोलते हुए जेडीयू सासंद आरसीपी सिंह ने कहा था, "इस बिल पर विपक्षी पार्टियों के रुख़ से मैं हैरान हूँ. देश भर में अजीब तरह का माहौल बनाया जा रहा है. बिल में इस देश के अल्पसंख्यकों के बारे में कोई बात ही नहीं है. यह बिल पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों की नागरिकता के लिए है. इससे पहले नागरिकता देने के लिए पहले भी बिल पास हुए हैं."
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