अरुंधति रॉय 'NPR में रंगा-बिल्ला नाम बताने' पर क्यों घिरीं?

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प्रतिष्ठित बुकर सम्मान से सम्मानित लेखिका और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय का नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है.
नागरिकता संशोधन क़ानून के मुद्दे पर भी बीते कुछ दिनों से अरुंधति रॉय सक्रिय हैं.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में 15 दिसंबर को हुए एक कार्यक्रम में अरुंधति रॉय ने कहा, ''एनपीआर वाले लोग आएं तो हम लोग पांच नाम तय कर लेते हैं. जब ये नाम पूछें तो अपना नाम रंगा-बिल्ला रख दो या कुंग-फू कुत्ता. 7 रेसकोर्स पता दे दो. एक फ़ोन नंबर तय कर लेते हैं...''
रंगा और बिल्ला दो खूंखार अपराधी थे, जिन्हें 1982 में बलात्कार और हत्या के मामले में फांसी दी गई थी.
अरुंधति ने कहा, ''एनपीआर पहले भी हो चुका है. एनपीआर में ये लोग आपके घर आएंगे. कुछ नहीं पूछेंगे. कोई भी दस्तावेज़ दे दो. लेकिन एनपीआर एनआरसी का डेटाबेस बनेगा. यूं तो हमें इनसे रोज़ लड़ना चाहिए लेकिन चार साल इनसे रोज़ लड़ा नहीं जा सकता. तो क्या करेंगे हम? एक तो ये कि हमें इनको चार साल नहीं देने चाहिए थे. दूसरा हमारे पास एक प्लान भी होना चाहिए था. जब ये लोग आपके घर एनपीआर लेकर आएं तब आप कोई दूसरा नाम दे दो.''

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अरुंधति के बयान पर बीजेपी की प्रतिक्रिया
अरुंधति रॉय के इस बयान पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति ज़ाहिर की है.
शिवराज सिंह ने ट्वीट किया, ''अगर यही हमारे देश के बुद्धिजीवी हैं तो पहले हमें ऐसे 'बुद्धिजीवियों' का रजिस्टर बनाना चाहिए. वैसे उन्होंने अपना नाम तो बता ही दिया. साथ में ये भी बता दिया कि उन्हें कंग-फ़ू की भी जानकारी है. अरुंधति जी को शर्म आनी चाहिए! ऐसे बयान देश के साथ विश्वासघात नहीं हैं तो क्या है?''
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बीजेपी की प्रीति गांधी ने लिखा, ''16 साल की गीता और 14 साल के संजय चोपड़ा का केस अपहरण और रेप का था. अरुंधति रॉय इन हत्यारों रंगा-बिल्ला की पहचान चुनने के लिए कह रही हैं. ये बेहद परेशान करने वाली बात है.''
शैफाली वैद्य ने ट्वीट किया, ''130 करोड़ लोगों में से अरुंधति को सिर्फ़ रंगा-बिल्ला का ही नाम मिला.''
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, ''ये नेशनल सिक्योरिटी का मामला है. अरुंधति को गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि वो देश के लिए ख़तरा हैं.''
प्रियंका नाम की यूज़र ने ट्वीटर पर लिखा, ''अरुंधति ने जो कहा वो सही कहा. जिस देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री डिटेंशन सेंटर को लेकर अलग-अलग जवाब देते हैं...उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.''
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अरुंधति रॉय ने और क्या कहा था?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अंश के अलावा अरुंधति रॉय ने डीयू कार्यक्रम में कुछ और बातें भी कही थीं.
- ''हम सब साथ मिलकर लड़ रहे हैं लेकिन यूपी में मुसलमानों पर हमला हो रहा है. पुलिस घरों में घुसकर तोड़फोड़ कर रही है. मुझे आशंका है कि जैसे 2002 में जैसे गुजरात में हुआ वो यूपी में भी हो सकता है.
- जब जामिया की लाइब्रेरी में हमला हुआ, तब मैं केरल में थी. तब रात में पुलिस हेडक्वार्टर जेएनयू स्टूडेंट्स भी पहुंचे क्योंकि उनके अंदर 2016 का ग़ुस्सा अभी बाक़ी था.
- मेरे अंदर डर था क्योंकि हम सब इनके लिए विलेन, टुकड़े-टुकड़े और अर्बन नक्सल हैं. आदिवासी लड़ते हैं तो माओवादी बन जाते हैं. स्टूडेंट्स लड़ें तो अर्बन नक्सल. मुसलमान लड़ते हैं तो आतंकवादी बन जाते हैं.
- उस रात जब मैंने बाबा साहेब का पोस्टर देखा, जय भीम का नारा सुना...तब मैं चैन से सो गई. मुसलमानों के घरों में जो घुस रहे हैं, हमें आगे बढ़कर एक-दूसरे की रक्षा करनी होगी.
- दो दिन पहले पीएम मोदी ने रामलीला मैदान में बच्चों वाले झूठ बोले. मोदी ने एनआरसी को लेकर झूठ बोला. वो जानते थे कि एक मिनट के अंदर इंटरनेट से उन्हीं का एनआरसी पर बोला वीडियो सामने आ जाएगा.
- मोदी ने ऐसा पकड़े जाने वाला झूठ क्यों बोला? क्योंकि उन्हें मालूम था कि गोदी मीडिया उनके पास है. इस मीडिया ने एक घंटे की ये स्पीच टेलिकास्ट की और ऐसी जगहों तक पहुंचाई, जहां इंटरनेट नहीं है. जहां लोगों को पता नहीं है कि ये क्या है.
- इस सरकार को सबसे ज़्यादा मज़बूत मीडिया ने किया है. बीजेपी नेता हमें कह रहे हैं कि ज़हर मत फैलाओ. लेकिन सोशल मीडिया पर उल्टा हो रहा है.
- मैं असम के छोटे-छोटे गांवों में गई थी. वहां लोग अपने दस्तावेज़ों को बच्चों, खेतों और गायों से ज़्यादा प्यार करते हैं. वहां ग़रीबी है. ब्रह्मपुत्र में बाढ़ आती है तो लोग अपने बच्चों से ज़्यादा दस्तावेज़ बचाते हैं.
- इतनी तैयारी के बाद भी 19 लाख लोगों का नाम एनआरसी में नहीं है. अब नागरिकता क़ानून जब आया है, तब जो असली नागरिक है वो क्या अपने आप को घुसपैठियां साबित करके फिर नागरिक बन सकेगा?
- ऐसे लोगों के पास खाने के पैसे नहीं हैं. वो लोग ट्राइब्यूनल में जाकर वकील का ख़र्च उठा पाएंगे?
- असम में तीन हज़ार लोगों के लिए 45 करोड़ में एक डिटेंशन सेंटर बन रहा है. 20 लाख लोगों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाएंगे तो कितना ख़र्च लगेगा?
- इकॉनमी को पूरा ख़त्म कर दिया है. अभी वो संविधान को ख़त्म करने में लगे हुए हैं.
- सारे फॉर्म में आप भर लेना... रंगा बिल्ला या कुंग-फू कुत्ता.
- सिर्फ़ लाठी और गोली खाने के लिए पैदा नहीं हुए हैं. हमें प्लान बनाना पड़ेगा. इन्होंने सीएए को संसद में पास किया था लेकिन एनआरसी और एनपीआर को पास करने की ज़रूरत भी नहीं है.
- हालात अभी ऐसे हैं कि ये देश आर्थिक, समाजिक तौर पर बचेगा नहीं. हम सब साथ हैं लेकिन हमला सिर्फ़ एक कौम के ऊपर हो रहा है.

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2015 में जब सरकार के विरोध में पुरस्कार लौटाए जा रहे थे, तब पुरस्कार लौटाने वालों में अरुंधति रॉय भी शामिल थीं.
ये नेशनल अवॉर्ड अरुंधति को 1989 में सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए दिया गया था.
अरुंधति रॉय 2005 में भी साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा चुकी थीं.
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