निर्भया केस: दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज, अब आगे क्या?

इमेज स्रोत, Getty Images
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड के चार दोषियों में से एक अक्षय की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज कर दी है.
बुधवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अक्षय ठाकुर की याचिका पर सुनवाई की.
जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना शामिल थे.
अक्षय के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दाख़िल करने के लिए उन्हें तीन हफ़्ते का वक़्त दिया जाए.
लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि क़ानून के मुताबिक़ सिर्फ़ सात दिनों का ही वक़्त दिया जा सकता है.
अक्षय के वकील ने कहा कि हम पहले क्यूरेटिव पिटीशन दाख़िल करेंगे और फिर राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाख़िल करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के सामने उन्होंने ये भी कहा कि वो उन 17 मामलों का हवाला देंगे जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सज़ा खत्म की और सज़ा को उम्र क़ैद में बदला.
सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के वकीलों को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए 30-30 मिनट का समय दिया गया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
कोर्ट में दी गईं कई दलीलें
अक्षय ठाकुर के वकील एपी सिंह ने कोर्ट में पूरी याचिका पढ़कर सुनाई.
इसमें लिखा था कि निर्भया के दोस्त ने पैसे लेकर टीवी इंटरव्यू दिए थे इसलिए इस केस में मुख्य गवाह के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
इसके बाद उन्होंने एक पूर्व जेलर की क़िताब में दिए हुए कुछ तथ्यों की दलील दी.
कोर्ट में अक्षय के ग़रीब होने की भी दलील दी गई. साथ ही कहा गया कि दोषी को सुधरने का एक मौक़ा मिलना चाहिए.
वकील एपी सिंह ने कहा कि फांसी देकर अपराधियों को ख़त्म किया जा सकता है, लेकिन इससे जुर्म नहीं रोके जा सकते, इसलिए अक्षय की फांसी पर रोक लगनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये फांसी की सज़ा देने के लिए एकदम फिट केस है. यह 'रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर' केस की श्रेणी में आता है. दोषी की तरफ से कोर्ट में कई तरह की दलीलें देकर सिर्फ़ फांसी का वक़्त टालने की कोशिश की जा रही है. इनसे कोई सहानुभूति नहीं बरती जानी चाहिए.
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अक्षय ठाकुर के वकील ने दावा किया था कि उनके मुवक्किल को सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव में दोषी ठहराया गया है और अब राजनीतिक लाभ लेने के लिए ही उन्हें फांसी देने की जल्दबाज़ी की जा रही है.

इमेज स्रोत, Getty Images
अक्षय ठाकुर का दोष
34 वर्षीय बस हेल्पर अक्षय का ताल्लुक बिहार से है.
अक्षय को घटना (16-17 दिसंबर, 2012) के पाँच दिन बाद 21 दिसंबर 2012 को बिहार से गिरफ़्तार किया गया था.
अक्षय पर बलात्कार, हत्या और अपहरण के साथ ही घटना के बाद सुबूत मिटाने की कोशिश करने का भी आरोप था.
अक्षय उसी साल बिहार से दिल्ली आया था. विनय की तरह अदालत में अक्षय ठाकुर ने भी बस में मौजूद होने से इनकार किया था.
इस मामले से जुड़ी अहम तारीख़ें और फ़ैसले
16 दिसंबर 2012: 23 वर्षीय फ़िज़ियोथेरेपी छात्रा के साथ चलती बस में छह लोगों ने गैंगरेप किया. छात्रा के पुरुष मित्र को बुरी तरह पीटा गया और दोनों को सड़क किनारे फेंक दिया गया.
17 दिसंबर 2012: मुख्य अभियुक्त और बस ड्राइवर राम सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया. अगले कुछ दिनों में उनके भाई मुकेश सिंह, जिम इंस्ट्रक्टर विनय शर्मा, फल बेचने वाले पवन गुप्ता, बस के हेल्पर अक्षय कुमार सिंह और एक 17 वर्षीय नाबालिग को गिरफ़्तार किया गया.
29 दिसंबर: सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत. शव को वापस दिल्ली लाया गया.
11 मार्च 2013: अभियुक्त राम सिंह की तिहाड़ जेल में संदिग्ध हालत में मौत. पुलिस का कहना है कि उसने आत्महत्या की, लेकिन बचाव पक्ष के वकील और परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए.
31 अगस्त 2013: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग अभियुक्त को दोषी माना और तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा.
13 सितंबर 2013: ट्रायल कोर्ट ने चार बालिग अभियुक्तों को दोषी क़रार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई.
13 मार्च 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
मार्च-जून 2014: अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला आने तक फांसी पर रोक लगा दी.
मई 2017: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट की फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज किया.
6 दिसंबर 2019: केंद्र सरकार ने एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी और नामंज़ूर करने की सिफ़ारिश की.
12 दिसंबर 2019: तिहाड़ जेल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन को जल्लाद मुहैया कराने के लिए अनुरोध किया.
13 दिसंबर 2019: निर्भया की मां की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में फांसी की तारीख़ तय करने को लेकर एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें चारों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













