चिदंबरम को जेल पहुंचाने वाले INX मीडिया केस में अब तक क्या कुछ हुआ?

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सुप्रीम कोर्ट ने बीते बुधवार को आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को ज़मानत दे दी ही.

प्रवर्तन निदेशालय ने कुछ समय पहले उनके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था.

ज़मानत मंज़ूर करते समय कोर्ट ने चिदंबरम को इस मामले पर मीडिया से बात करने से मना किया है.

इसके साथ ही उन्हें दो लाख रुपये का बॉन्ड भरने को कहा था.

लेकिन पी. चिदंबरम जिस मामले में बीते 102 दिनों से तिहाड़ जेल में बंद थे, वो मामला क्या है और इसमें अब तक क्या क्या हुआ है.

आईएनएक्स मीडिया केस क्या है?

सीबीआई ने मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ 15 मई, 2017 को एक एफ़आईआर दर्ज की थी.

आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये के विदेशी फ़ंड लेने के लिए फ़ॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफ़आईपीबी) की मंज़ूरी में कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं.

जब साल 2007 के दौरान कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री हुआ करते थे.

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चिदंबरम तब जांच एजेंसियों के रडार पर आए जब आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी से ईडी ने पूछताछ की.

ईडी ने इस संबंध में 2018 में मनी लांड्रिंग का एक मामला भी दर्ज किया था.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ईडी ने अपने आरोप पत्र में लिखा है, "इंद्राणी मुखर्जी ने जांच अधिकारियों को बताया कि चिदंबरम ने एफ़आईपीबी मंज़ूरी के बदले अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेशी धन के मामले में मदद करने की बात कही थी."

सीबीआई ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को फ़रवरी 2018 में चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार कर लिया था.

उनके ख़िलाफ़ ये आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ संभावित जांच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी. बाद में कार्ति चिदंबरम को कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.

सीबीआई का कहना है कि आईएनएक्स मीडिया की पूर्व डायरेक्टर इंद्राणी मुखर्जी ने उनसे पूछताछ में कहा कि कार्ति ने पैसों की मांग की थी.

जांच एजेंसी के मुताबिक़ ये सौदा दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में तय हुआ था.

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इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में हैं.

अब तक क्या क्या हुआ?

सीबीआई ने 15 मई, 2017 को आईएनएक्स मीडिया केस में एफ़आईआर दर्ज की थी.

इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने 16 फरवरी, 2018 को इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और सीबीआई ने चिदंबरम को सम्मन भेजा.

तीस मई आते-आते चिदंबरम ने दिल्ली हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की. इसके साथ ही 23 जुलाई को ईडी के केस भी अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की.

25 जुलाई को कोर्ट ने दोनों मामलों में चिदंबरम को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की. लेकिन हाई कोर्ट ने अग्रिम ज़मानत को लेकर अपना फ़ैसला सुरक्षित किया.

इसके बाद 20 अगस्त को हाई कोर्ट ने चिदंबरम की जमानत याचिकाएं रद्द कर दी और सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए तीन दिन देने की दरख्वास्त को भी दरकिनार कर दिया.

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21 अगस्त को चिदंबरम सीबीआई केस में गिरफ़्तार किए गए और अगले दिन उन्हें चार दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेजा गया जो बढ़ते-बढ़ते 5 सितंबर तक रही.

इसके बाद 5 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी को चिदंबरम से पूछताछ करने और ज़रूत पड़ने पर उन्हें गिरफ़्तार करने की इजाज़त दी.

फिर 16 अक्टूबर को ईडी ने तिहाड़ जेल में चिदंबरम से पूछताछ करके उन्हें गिरफ़्तार किया.

18 अक्टूबर को सीबाआई ने चिदंबरम समेत 13 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की जिसे सीबीआई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

22 अक्टूबर को चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से भ्रष्टाचार के मामले में ज़मानत मिली.

इसके बाद 24 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम को 30 अक्टूबर तक की कस्टोडियल इंटेरोगोशेन के लिए भेज दिया.

इसके बाद से चार दिसंबर तक चिदंबरम तिहाड़ जेल में रहे.

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