सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा

बाबरी मस्जिद

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने फ़ैसला किया है कि वो बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फ़ैसला मानेगा और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा.

बोर्ड ने अभी इस बात पर फ़ैसला नहीं किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत मस्जिद के लिए पांच एकड़ ज़मीन ली जाए या नहीं. इस पर फ़ैसले के लिए बाद में बैठक बुलाई जाएगी.

अयोध्या मामले पर लखनऊ में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की मंगलवार को हुई बैठक में ये फ़ैसला किया गया. बोर्ड के सात सदस्यों में से पांच सदस्यों ने पुनर्विचार याचिका न दायर करने पर सहमति दी जबकि एक सदस्य अब्दुल रज़्ज़ाक इससे सहमत नहीं थे.

सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक नौ नवंबर को अयोध्या मामले में आए फ़ैसले पर बातचीत के लिए बुलाई गई थी. बैठक से पहले बोर्ड के चेयरमैन ज़फ़र फ़ारूकी ने बीबीसी को बताया था कि हम लोग इस बात पर फ़ैसला लेने वाले हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बोर्ड को क्या करना है?

पिछले हफ़्ते लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भी बैठक हुई थी जिसमें एकमत से इस बात का फ़ैसला किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पेटिशन दाख़िल की जाएगी. पर्सनल लॉ बोर्ड जल्द ही यह याचिका दाख़िल करने वाला है.

राम मंदिर

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बैठक के बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफ़र फ़ारूक़ी ने बताया, "पांच एकड़ ज़मीन पर आम राय बनाने के लिए अभी सदस्य और समय चाहते हैं क्योंकि सभी सदस्यों ने अभी सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पूरी तरह से पढ़े नहीं हैं. जितने भी मुस्लिम संगठन और पक्षकार हैं उनका शुरू से यही मानना था कि जो फ़ैसला आएगा हम मान लेंगे. हम उसी स्टैंड पर आज भी क़ायम हैं."

सुप्रीम कोर्ट के जज

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उन्होंने बताया कि यूपी सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने आम राय से तय किया है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने जो फ़ैसला दे दिया है, उसके ख़िलाफ़ कोई पुनर्विचार याचिका नहीं दायर की जाएगी. उन्होंने बताया कि बोर्ड की बैठक में यह भी तय किया गया है कि मीडिया से बातचीत के लिए सिर्फ़ अध्यक्ष ही अधिकृत व्यक्ति होंगे, और कोई नहीं. पांच एकड़ ज़मीन के मुद्दे पर बोर्ड में अभी कोई फ़ैसला नहीं हो सका है लेकिन ज़ुफ़र फ़ारूक़ी का कहना था इसे लेना है या नहीं लेना है, ये बोर्ड ने नहीं बल्कि अन्य लोगों ने उठाया है.

इससे पहले ये ख़बरें भी चल रही थीं कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अपने दस्तावेज़ों में से बाबरी मस्जिद का नाम हटा देगा, लेकिन बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफ़र फ़ारूक़ी ने बताया कि इस बारे में फ़िलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है और न ही ऐसी कोई योजना है.

हालांकि इस मामले में पिछले हफ़्ते हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड से ये अपील की गई थी कि वो पुनर्विचार याचिका दायर करने के बारे में आम राय बनाए.

ज़ाफरयाब जिलानी

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एआईएमपीएलबी फ़ैसले के ख़िलाफ़ पुनरीक्षण याचिका दायर करने जा रही है जिसका फ़ैसला बोर्ड की बैठक में लिया गया था.

बोर्ड के सदस्य और वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा था, "हम चाहते हैं कि सुन्नी वक़फ़ बोर्ड भी ऐसा करे क्योंकि ये मामला ज़मीन का नहीं मुस्लिमों के हक़ का है. यदि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ऐसा नहीं करेगा तो हम इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार के लिए ले जाएंगे. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश के आम मुसलमानों के प्रतिनिधि के तौर पर इस विवाद में एक पक्ष था और उसी हैसियत से हम इस पर पुनर्विचार की भी मांग करेंगे."

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नौ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की पीठ ने लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को ख़त्म करते हुए विवादित ज़मीन रामलला को सौंप दी थी. एक अन्य हिन्दू पक्षकार निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के दावे को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मंदिर बनाने के लिए अयोध्या में पांच एकड़ ज़मीन देने का सरकार को निर्देश दिया था.

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