महाराष्ट्र : देवेंद्र फडणवीस ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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महाराष्ट्र में नाटकीय घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.
उनके साथ एनसीपी नेता अजित पवार ने भी उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. मगर इस बीच पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि बीजेपी को समर्थन देकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने का फ़ैसला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का नहीं बल्कि अजित पवार का निजी है.
वहीं शिव सेना नेता संजय राउत ने अजित पवार पर धोखा देने और महाराष्ट्र की जनता का अपमान करने का आरोप लगाया है.
इस बीच बीजेपी के साथ सरकार बनाने में एनसीपी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. नई सरकार के गठन के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ट्वीट करके कहा है, "हम आधिकारिक रूप से कहना चाह रहे हैं कि अजित के इस फ़ैसले को हमारा समर्थन नहीं है."
उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे हैं.
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इस बीच शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा है कि अजित पवार ने शरद पवार को धोखा दिया है. उन्होंने कहा, "कल रात नौ बजे तक बैठक में अजित पवार मौजूद थे और बातचीत में सक्रिय थे. अचानक ग़ायब हो गए. नज़र से नज़र मिलाकर बात नहीं कर रहे थे. हमें शक़ हो रहा था. उन्हें ईडी की जांच का डर था, इसलिए उन्होंने शरद पवार को धोखा दे दिया है क्योंकि फडणवीस हमेशा कहते थे कि अजित पवार को जेल भेजेंगे."
संजय राउत ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "मैं मानता था कि वह आरएसएस से हैं. लेकिन रात के अंधेरे में जो काम किया गया, वह ठीक नहीं. यह छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र को शोभा नहीं देता."
अजित पवार पर निशाना साधते हुए शिव सेना सांसद ने कहा, "फडणवीस का नाम नहीं लूंगा क्योंकि वह सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं मगर अजित पवार और उनके साथ के विधायकों ने छत्रपति महाराज और महाराष्ट्र का नाम बदनाम किया है. राज्य की जनता इन्हें माफ़ नहीं करेगी."
अचानक पलट गया खेल
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाकर बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बनाने का यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ है जब एक दिन पहले ही शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने को लेकर सहमति बनी थी. शरद पवार ने शुक्रवार को ख़ुद इस बात की जानकारी दी थी.
आज ये तीनों पार्टियां मिलकर बाक़ी मुद्दों पर चर्चा करने वाली थीं मगर सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने मुंबई में राजभवन में शपथ ग्रहण कर ली.

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महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में पिछले महीने बीजेपी ने 105 सीटें जीती थीं. एनसीपी को 54 सीटों पर जीत मिली थी.
शिव सेना के हिस्से में 56 सीटें आई थीं. कांग्रेस ने 44 सीटें हासिल की थीं. बीजेपी ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और एनसीपी ने कांग्रेस के साथ.
बीजेपी और शिव सेना का गठबंधन आराम से सरकार बना सकता था मगर दोनों पार्टियों के बीच मुख्यमंत्री पद और 'सत्ता में साझेदारी' को लेकर मतभेद पैदा हो गए थे.
इसके बाद शिव सेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिशें शुरू की थीं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दिनों तक चली चर्चा के बाद आज सरकार बनाने पर कोई फ़ैसला आने की संभावना जताई जा रही थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ग्रहण के थोड़ी देर बाद ही ट्वीट करते हुए देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को बधाई दी और विश्वास जताया कि दोनों नेता मिलकर महाराष्ट्र के भविष्य के लिए मिल-जुलकर काम करेंगे.
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गृहमंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट किया है और लिखा है, "फडनवीस जी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अजित पवार जी को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई. मुझे विश्वास है कि यह सरकार महाराष्ट्र के विकास और कल्याण के प्रति निरंतर कटिबद्ध रहेगी और प्रदेश में प्रगति के नये मापदंड स्थापित करेगी.
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क्या बोले फडणवीस और अजित
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद कहा कि 'हमारे साथ चुनाव लड़ने वाली शिव सेना ने जनादेश का निरादर करते हुए और दलों के साथ सरकार बनाने की कोशिश की जिससे राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. लेकिन महाराष्ट्र में खिचड़ी सरकार नहीं बल्कि स्थायी सरकार चाहिए थी, इसलिए एनसीपी हमारे साथ आई है.'
उन्होंने कहा, "हमने मिलकर राज्यपाल महोदय के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया और उन्होंने राष्ट्रपति से अनुशंसा की कि राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाया जाए. अब मैंने अभी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और एनसीपी से अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है."
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शपथ लेने के बाद अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव के नतीजे आए काफ़ी दिन हो गए थे और सरकार न बनने के कारण लोगों को समस्या हो रही थी.
उन्होंने कहा, "राज्य में कई समस्याएं हैं, ख़ासकर किसानों की. अगर मिलकर स्थिर सरकार बनती है तो यह महाराष्ट्र के लिए अच्छा है."
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