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सबरीमाला मंदिर: आज से खुलेंगे कपाट, कितनी तैयार हैं महिला श्रद्धालु
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
सबरीमाला मंदिर के कपाट शनिवार से खुलने जा रहे हैं लेकिन इससे पहले ही केरल की लेफ़्ट फ़्रंट सरकार ने 50 साल से कम उम्र की महिलाओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. ये महिलाएं भगवना अयप्पा के दर्शन करना चाहती थीं.
क़ानूनी जानकारों से कई दौर की बातचीत के बाद सरकार ने फ़ैसला किया है कि वह लंबी चढ़ाई तय करके पहाड़ी पर मौजूद इस मंदिर तक आने वाली महिलाओं को कोई पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं कराएगी.
देवासम बोर्ड के मंत्री केडकमपल्ली सुरेंद्रन का कहना है, "सबरीमाला कोई आंदोलन की जगह नहीं है अगर वे जाना चाहती हैं तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ आना चाहिए और पुलिस सुरक्षा की मांग करनी चाहिए."
राज्य सरकार का यह फ़ैसला तब आया है जब सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले को सात जजों की पीठ को सौंप दिया गया है.
जनवरी के तीसरे सप्ताह तक खुले रहेंगे कपाट
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने 28 सितंबर 2018 के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है. इस फ़ैसले में कोर्ट ने परंपरा के ऊपर लैंगिक समानता और मौलिक अधिकार को रखा था और सबरीमाला मंदिर में सभी आयु की महिलाओं को प्रार्थना की अनुमति दी थी.
कल से शुरू होने वाला मंडला-मकराविलक्कु नाम का सत्र जनवरी के तीसरे सप्ताह तक चलेगा. पिछले साल कुछ महिलाओं ने मंदिर में जाने की कोशिश की थी जिसके बाद इस मंदिर की काफ़ी चर्चाएं रही थीं.
पुलिस सुरक्षा के बावजूद वो मंदिर में नहीं जा पाईं क्योंकि उस दौरान 'पुरुष श्रद्धालुओं' का प्रदर्शन चल रहा था जिसे बीजेपी का समर्थन हासिल था. इनमें से एक महाराष्ट्र की सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई भी थीं.
इसके अलावा 2 जनवरी को दो महिलाएं बिना किसी पुलिस की मदद के मंदिर में दाख़िल हुई थीं और पूजा की थी. ये दोनों महिलाएं बिंदु अमिन्नी और कनकदुर्गा थीं जिनकी आयु 40 वर्ष से कम थीं.
इस बार भी कई महिला कार्यकर्ताएं उम्मीद कर रही थीं कि सरकार उनको पुलिस सुरक्षा मुहैया कराएगी. लेकिन अभी भी कई महिला समूहों के एक मंच रेनेसां विमंस मूवमेंट के प्रवक्ता का कहना है कि वो इस बात को लेकर साफ़ हैं कि वो अपनी योजना के अनुसार चलेंगे.
मंदिर में जाने को लेकर महिलाएं दृढ़
इस आंदोलन की लिबि सीएस ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमने फ़ैसला किया है कि पहले हम दो या तीन महिलाएं जाएंगी. अगर उन्होंने हमें सुरक्षा नहीं दी और रोकने की कोशिश की तो हम महिलाएं समूह में सबरीमाला मंदिर में प्रार्थना करने जाएंगी."
जहां एक और महिलाओं के समूहों की अपनी चिंताएं हैं वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले साल के फ़ैसले पर रोक नहीं लगाई है. इसका मतलब है कि हर आयु की महिलाएं मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं. लेकिन बीजेपी इससे उलट सोचती है.
बीजेपी नेता एमटी रमेश ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमें लगता है कि एक मामला जब बड़ी बेंच को भेज दिया जाता है तो पुराना फ़ैसला निरस्त हो जाता है. तो हम सरकार से आग्रह करेंगे कि सबरीमाला आने वाली महिलाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं."
अगर इन सबके बावजूद भी महिलाएं मंदिर आती हैं? इस सवाल पर रमेश कहते हैं, "पिछली बार बीजेपी महिलाओं को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी लेकिन श्रद्धालुओं ने यह किया. इस बार भी पुरुष श्रद्धालु तैयार हैं."
कम शब्दों में अगर कहा जाए तो इस बार का मंडला सीज़न तनावपूर्ण रहने वाला है.
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