चीन को हो रहा कारोबार में फ़ायदा, कितने घाटे में है भारत?

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- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत और चीन के बीच कारोबारी और आर्थिक रिश्ते पिछले कुछ सालों में तेज़ी से बढ़े हैं और दोनों देश के बीच कई चीज़ों का व्यापार होता है.
भारत चीन को क्या निर्यात करता है?
भारत चीन को मुख्य रूप से जो चीज़ें बेचता है, वो हैं:
- कॉटन यानी कपास
- कॉपर यानी तांबा
- हीरा और अन्य प्राकृतिक रत्न
चीन, भारत को जो चीज़ें बेचता है, वो हैं:
- मशीनरी
- टेलिकॉम उपकरण
- बिजली से जुड़े उपकरण
- ऑर्गैनिक केमिकल्स यानी जैविक रसायन
- खाद
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कारोबार में चीन को ज़्यादा फ़ायदा
भारत और चीन के बीच कारोबार में किस तरह बढ़ोतरी हुई है, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि इस सदी की शुरुआत यानी साल 2000 में दोनों देशों के बीच का कारोबार केवल तीन अरब डॉलर का था जो 2008 में बढ़कर 51.8 अरब डॉलर का हो गया.
इस तरह सामान के मामले में चीन अमरीका की जगह लेकर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया.
2018 में दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया और दोनों के बीच 95.54 अरब डॉलर का व्यापार हुआ.
चीन में भारत के राजदूत ने जून में दावा किया था कि इस साल यानी 2019 में भारत-चीन का कारोबार 100 बिलियन डॉलर पार कर जाएगा.
कारोबार बढ़ रहा है, इसका यह मतलब नहीं है कि फ़ायदा दोनों को बराबर हो रहा है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के वेबसाइट के मुताबिक, 2018 में भारत चीन के बीच 95.54 अरब डॉलर का कारोबार हुआ लेकिन इसमें भारत ने जो सामान निर्यात किया उसकी क़ीमत 18.84 अरब डॉलर थी.
इसका मतलब है कि चीन ने भारत से कम सामान खरीदा और उसे पांच गुना ज़्यादा सामान बेचा. ऐसे में इस कारोबार में चीन को फ़ायदा हुआ.

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चीन के साथ व्यापार में सबसे ज़्यादा घाटा
इसमें एक और बड़ी बात यह है कि भारत को अगर किसी देश के साथ सबसे ज़्यादा कारोबारी घाटा हो रहा है तो वह चीन ही है. यानी भारत, चीन से सामान ज़्यादा खरीद रहा है और उसके मुक़ाबले बेच बहुत कम रहा है.
2018 में भारत को चीन के साथ 57.86 अरब डॉलर का व्यापारिक घाटा हुआ.
दोनों देशों के बीच का यह व्यापारिक असंतुलन भारत के लिए सरदर्द बन गया है.
भारत चाहता है कि वो इस व्यापारिक घाटे को किसी ना किसी तरह से कम करे.
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लेकिन यह व्यापारिक असंतुलन आख़िर कैसे ठीक होगा?
भारत ने चीन से इस बारे में बात भी की है और कहा है कि वो कुछ चीज़ों के लिए उसके बाज़ार में और ज़्यादा पहुंच हासिल करना चाहता है.
भारत में दवाइयां बनती हैं और इस क्षेत्र में भारत का दुनिया भर में नाम है. यानी:
- भारत चीन को दवाइयां बेच सकता है.
- आईटी सेवाएं दे सकता है.
- इंजीनियरिंग की सेवाएं दे सकता है.
- इसके अलावा चावल, चीनी, कई तरह के फल और सब्ज़ियां, मांस उत्पाद, सूती धागा और कपड़ा भी बेच सकता है.
व्यापार असंतुलन की इस गंभीर समस्या से निपटने की एक कोशिश 2014 में तब हुई थी, जब शी जिनपिंग भारत आए थे और दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग को बढ़ाने के लिए पांच साल का विकास कार्यक्रम बनाया गया था.
उस वक्त यह बात भी हुई थी कि कैसे भारत के सामान को चीन के बाज़ार में और ज़्यादा पहुंच बढ़ाया जाए.
फिर 2018 में तय हुआ कि अब कुछ और चीज़ें भारत चीन को बेचेगा.
इसमें ग़ैर बासमती चावल, फ़िश मील यानी मछली का खाना और मछली के तेल जैसी कुछ चीज़ें शामिल हैं.
इस साल यह तय हुआ है कि भारत चीन को मिर्च और तंबाकू के पत्ते भी निर्यात करेगा.
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निवेश की बात
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक़ दिसंबर 2017 के आखिर तक चीन ने भारत में 4.747 अरब डॉलर का निवेश किया.
चीन भारत के स्टार्ट-अप्स में काफ़ी निवेश कर रहा है.
हालांकि, भारत का चीन में निवेश तुलनात्मक रूप से कम है. सिंतबर 2017 के आखिर तक भारत ने चीन में 851.91 मिलियन डॉलर का निवेश किया है.
अब दोनों देश यह कोशिश कर रहे हैं कि वो आपसी निवेश को बढ़ाए.

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चीन अमरीका के साथ ट्रेड वॉर में उलझा हुआ है. अमरीका चीन से जो सामान ख़रीदता है, उनमें से कई पर अमरीका ने आयात शुल्क बेतहाशा बढ़ा दिए हैं.
इन दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कारोबारी लड़ाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख ने कहा है कि 2019-20 वित्तीय वर्ष में दुनिया के 90% हिस्से में आर्थिक सुस्ती दिखेगी. उन्होंने इसकी एक वजह अमरीका चीन में चल रही कारोबारी जंग को भी बताया है.
इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा पड़ेगा, जो अभी से दिखने लगा है.
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